जेल में बंद भाईयों को राखी बांधने पहुंची बहनें

जेल में बंद भाईयों को राखी बांधने पहुंची बहनें

मुजफ्फरनगर। रक्षाबन्धन के पावन पर्व पर जेल अधीक्षक अरूण कुमार सक्सैना द्वारा कारागार में निरूद्ध बंदियों को उनकी मुलाकात पर बहनों से राखी बंधने, तिलक एवं मिष्ठान खिलाने आदि की व्यवस्था करायी गयी। कारागार में निरूद्ध लगभग 500 बंदियों की बहनों ने जेल में आकर उनके रक्षासूत्र (राखी) बांधी तथा उनके तिलक कर उन्हें मिष्ठान खिलाया। रक्षाबन्धन पर सभी आने वाली महिलाओं/बहनों में काफी उत्साह देखा गया। जेल के बाहर लम्बी-लम्बी कतारें बहनों की लगी रही। सुबह से ही जेल के गेट पर महिलाओं की काफी भीड लगनी शुरू हो गयी थी, जो देर सायं तक जारी रही। जेल अधीक्षक एके सक्सैना लगातार व्यवस्था पर निगरानी बनाये हुए थे। आज रक्षाबंधन के त्यौहार को देखते हुए बडी संख्या में महिलाएं जिला कारागार में बंद अपने भाईयों को राखी बांधने पहुंची, तो वहां लम्बी-लम्बी कतारें लगी रही। मौजूदा समय में जिला कारागार में ढाई हजार से भी ज्यादा बंदी है, जिनमें महिला बंदी भी शामिल है। जेल में बंद बहनों से भी राखी बंधवाने के लिये भाई आते है। आम दिनों में जेल के अंदर मिठाई ले जाने पर प्रतिबंध् है, लेकिन रक्षाबंधन के त्यौहार पर भाई और बहन दोनों को ही जेल में बन्दियों से मुलाकात के दौरान जांच के बाद मिठाई ले जाने की छूट मिली। रक्षाबंधन ऐसा त्यौहार है, जिसमें बन्दियों से मिलाई की इजाजत त्यौहार के दिन ही प्रदान की जाती है। अन्य किसी भी त्यौहार में उसी दिन मिलाई करने की इजाजत नहीं दी जाती। सभी त्यौहारों के अगले दिन ही जेल प्रशासन बन्दियों से मुलाकात की इजाजत देता है। अंग्रेजों के द्वारा बनाये गये कानून का आज भी जेलों में पालन कराया जा रहा है।

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