बहनें आज करेंगी निःशुल्क यात्रा, बाजार दुल्हन की भांति सजाये गये

बहनें आज करेंगी निःशुल्क यात्रा, बाजार दुल्हन की भांति सजाये गये

मुजफ्फरनगर। कल (आज) रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा। त्योहार को देखते हुए बाजार दुल्हन की भांति सजाये गये हैं। बाजारों में आयी एक से बढ़कर एक आकर्षण राखी बाजार आने वालों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। बाजारों की स्थिति यह हो गयी है कि उन्हें पैर रखने तक की जगह नहीं हे। बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर बांधने को लेकर एक से बढ़कर एक आकर्षक राखी को बाजार से लिया है। बहनों ने भाइयों के लिए राखी खरीदने में किसी भी प्रकार की कंजूसी नहीं बरती है।
रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है। इस पवित्र त्योहार को न केवल हिंदु मनाते हैं, बल्कि इसी मुस्लिम समाज मंे कुछ लोगों द्वारा मनाया जाता है। रक्षाबंधन को लेकर बहनों ने काफी समय से अपनी तैयारी कर रखी थी। इस बारे में जानकारी देते हुए आकांक्षा राठी का कहना था कि उसने अपनी पोकेट मनी से थोड़ा-थोड़ा करके कुछ रूपये एकत्र किये थे। जिनको लेकर वह बाजार गयी और अपने भाई के लिए एक आकर्षक राखी खरीदी। इसके साथ ही भाई को खिलाने को लेकर मिठाई भी खरीदी। इसके साथ ही एक अच्छा से उपहार भी लिया है। आकांक्षा राठी ने आगे बताया कि ऐसा नहीं है कि रक्षाबंधन को लेकर केवल बहनें ही तैयारी करती हैं। भाई भी करते हैं। वह भी अपनी बहनों को राखी पर देने के लिए एक से बढ़कर एक महंगे व आकर्षक उपहार बाजार से लाते हैं, ताकि बहनें खुश हो सके। उनका कहना था कि प्यार का कोई मोल नहीं होता है। इस त्योहार पर ऐसा नहीं है कि केवल बहनें ही भाइयों के पास राखी बांधने को जाती हैं। भाई भी अपनी बहनों के पास जाते हैं। सर्वप्रथम राखी किसने बांध्ी इसे लेकर भी लोगों में जिज्ञासा रहती है। इस जिज्ञासा को पंडित सुनील भारद्वाज ने शंात किया। उन्होंने बताया कि सर्वप्रथम लक्ष्मी जी ने बालि को राखी बांध्ी थी। यह बात उस समय की है, जब राजा बालि अश्वमेघ यज्ञ कर रहे थे। तब नारायण ने राजा बालि को छलने के लिए वामन अवतार लिया था। तीन पग में सब ले लिया था। जब उसे भगवान न पाताल लोक का राज्य रहने को दिया था। इस पर बालि ने एक शर्त रखी थी। कहा था कि मुझे वचन दे कि जो मांगूगा, आप मुझे देंगे। तब नारायण ने कहा कि हां। बालि ने कहा कि जिधर देखूं आप ही नजर आये। जब इस बारे मंे लक्ष्मी जी को पता चला तो वह चिंतित हो गयी। वह रोती हुई बालि के दरबार में पहुंची तथा कहा कि मेरा कोई भाई नहीं है। मैं दुखी हूं। जिस पर बालि ने उन्हें अपनी बहन बनाते हुए तीन वचन दिये। जिस पर लक्ष्मी ने पहरेदार बने नारायण का मांग लिया। तभी से रक्षाबंध्न का त्योहार मनाया जाता है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहले पर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की ओर से छह अगस्त की रात्रि 12 बजे से लेकर सात अगस्त की रात्रि 12 बजे तक निगम की बसों में बहनों के लिए निःशुल्क यात्रा सेवा कर दी है। वहीं दूसरी ओर इसी परिपाटी पर प्राईवेट बस यूनियन भी चल निकली हैं। उन्होने भी उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की तर्ज पर ही अपनी बसों में बहनों के लिए एक दिन की फ्री यात्रा की सुविध दी है। गौरतलब है कि जनपदीय सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी राजीव कुमार बंसल ने इस संबंध् में जनपद की सभी बस यूनियनों को निर्देशित किया था। जिसमें कहा गया था कि मुख्यमंत्री की पहल पर रक्षाबंधन के पावन पर्व पर सभी महिला यात्रियों को प्रफी आवागमन की सुविध प्रदान की गयी है। सरकारी बसों की ही भंाति प्राईवेट बसों में भी महिलाओं के लिए निःशुल्क यात्रा की व्यवस्था की गयी है। जनपद में सभी प्राईवेट बसों में रक्षाबंधन के दिन महिला यात्रियों से कोई किराया नहीं लिया जाएगा। सभी प्राईवेट बस यूनियन वाले अपने-अपने स्टैंड पर नोटिस बोर्ड पर यह संबंध् में दिशा-निर्देश जारी करें।

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