भू-जल प्रकृति की एक अनमोल धरोहरः पीडी

भू-जल प्रकृति की एक अनमोल धरोहरः पीडी

मुजफ्फरनगर। परियोजना निदेशक ने बताया कि हमें अपने भू-जल को बचाये रखना है और अति दोहन न हो इसके लिए जन जागरण अभियान चलाना है। उन्होंने बताया कि पानी का सदुपयोग करें और पानी को प्रदूषित न करें। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक मात्रा में वृक्षारोपण करंे तथा अधिक मात्रा में तालाबों को जीर्णोद्धार को बढ़ावा दिया जाये, जिससे पानी रिचार्ज हो सके। सबमर्सिवल खुला न छोडे़ और खेत तालाब योजना को अपनायें। उन्हांेने कहा कि अध्कि पानी की बर्बादी के कारण जनपद के कई ब्लॉक डार्क जोन में और कई ब्लॉक क्रटिकल जोन में आ गये हैं।
परियोजना निदेशक विक्रम सिंह आज यहां विकास भवन सभागार में भूजल जीवन की आस-संरक्षण का करो प्रयास से सम्बन्धित आयोजित गोष्ठी मंे बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भू-जल प्रकृति की एक अनमोल ध्रोवर है, जिसके बिना जीवन सम्भव नहीं है। उन्होंने कहा कि उद्योग ध्न्धें के समुचित विकास, कृषि उत्पादन में वृद्ध एवं पेयजल के विपणन में भू-गर्भ-जल का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर केवल 2.5 प्रतिशत पेयजल है, बाकी खारा पानी है। उन्होंने बताया कि भू-गर्भ-जल के मध्य संतुलन बनाकर तथा इसके नियंत्रित दोहन से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि खेती के लिए अध्कि पानी वाली फसलों को बदले जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर का उपयोग करके पानी की बचत की जा सकती है। उन्होंने कहा कि घरों में पानी की टोंटियां खुली न छोड़ी जायंे। उन्होंने बताया कि नहाने के लिए बाल्टी आदि का प्रयोग करें। इस अवसर पर परियोजना निदेशक द्वारा संकल्प पत्र भी पढ़वाया गया कि वे पानी का दुरूप्रयोग नहीं करेंगे, पानी संरक्षित करेंगे और जन जागरूकता के माध्यम से दूसरे लोगांे को भी पानी की बचत करने के लिए प्रेरित करेंगे। उन्होंने कहा कि ग्राम विकास विभाग द्वारा 200 तालाबों के जीर्णाद्धार का लक्ष्य रखा गया है। जिसके सापेक्ष 149 तालाबों पर कार्य चल रहा है और 46 तालाब पूर्ण कर लिये गये हैं। उन्होंने कहा कि इससे वाटर रिचार्ज होगा और जल स्तर में सुधर आयेगा। परियोजना निदेशक ने कार्ययोजना के अनुसार विभागों से कार्य करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्कूलों में प्रेरित किया जाये कि वह अपने घर वालों को जागरूक करंे। उन्होंने पानी की बर्बादी को रोकने तथा नये तालाबों के निर्माण और पुराने तालाबांे का जीर्णाद्धार कराने के निर्देश दिये। उन्होंने शासकीय/अशासकीय भवनों में रूटाफ रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्टिम स्थापित करने तथा खेत का पानी खेत में का सिद्धान्त अपनाये जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि चैक डेमों का निर्माण से जल स्तर में सुधर आयेगा। उन्होंने नहरों का पानी टेल तक छोडे़ जाने के भी निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि गु्रप हाउसिंग स्किंग के अन्तर्गत 200 मीटर अथवा अधिक क्षेत्रफल के सरकारी व निजी भूखण्डों तथा प्रस्तावित आवासीय योजना के लेऑउट प्लॉन में सामूहिक भू-जल रिचार्जिंग की व्यवस्था अनिवार्य की गयी है। इसके अतिरिक्त कृषि विभाग, वन विभाग, डीपीआरओ एवं जिला विद्यालय निरीक्षक कार्य योजना के अनुसार जल संरक्षित करने एवं जल की बचत करने तथा जल को प्रदूषित होने से बचाने तथा जन जागरूकता कार्यक्रमों को संचालित करने के निर्देश दिये। इस अवसर पर डीएफओ, बेसिक शिक्षा, डीआईओएस उपस्थित रहे।

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