महिलाओं ने एक स्वर में की हैदराबाद कांड की निंदा...कड़ा कानून हो और सजा सरेआम हो

मुजफ्फरनगर। हैदराबाद के डा. प्रियंका रेड्डी मामले ने पूरे देश में तूल पकड़ लिया है। इस मामले को लेकर आज पूरे दिन संसद के दोनों सदनों लोकसभा व राज्यसभा में जमकर बहस हुई। इस कांड की महिला जगत सहित सभी कड़ी निंदा कर रहे हैं। महिलाओं ने एक स्वर में बलात्कार के मामले को लेकर कड़ा कानून बनाने की मांग करते हुए डा. प्रियंका रेड्डी के दोषियों को मौत की सजा सरेआम देने की भी मांग की है। साथ ही उनके द्वारा कानूनी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाये। उनका कहना था कि इस प्रकार के मामलों में न्याय में विलंब नहीं होना चाहिए। सजा ऐसी दी जाए, जो कि एक मिसाल बन जाए तथा अन्य के लिए एक कड़ा सबक हो।

नगर के शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले अनुशासन में नंबर वन डीएवी महाविद्यालय की प्राचार्या डा. शशि शर्मा ने हैदराबाद के डा. प्रियंका रेड्डी के गैंगरेप मामले को लेकर कहा कि जो हुआ वह बेहद दर्दनाक है। ऐसा लगा रहा हेै कि जैसे मेरी बेटी के साथ हुआ हो। बचपन में माता-पिता बच्चों को मछली जल की रानी है, जीवन उसका पानी है, हाथ लगाओ के डर जाएगी, बाहर निकालोगे मर जाएगी। हमें नहीं पता था कि आज यह मछली का स्थान हमारी बेटियां ले लेंगी। हमें केवल विरोध स्वरूप मोमबत्ती लेकर चलना भर नहीं है, बल्कि यह समय बदलाव लाने का है। हर गली नुक्कड पर मानसिक विकृति के लोग बैठे हैं। इस सब पर पूरी तरह से लगाम लगायी जानी चाहिए, ताकि फिर कोई बच्ची इन जैसे दरिंदों का शिकार न बन जाए। द्रौपदी का चीर हरण होने से महाभारत हुआ था तथा सीता का अपहरण होने से लंका का दहन हुआ था।

वैदिक पुत्री कन्या इंटर कालेज नई मंडी की उपप्रधानाचार्या शैली रंजन ने हैदराबाद गैंगरेप मामले को लेकर कहा कि जो हुआ वह बेहद निंदनीय है। इसकी जितनी भर्त्सना की जाए, कम है। सरकार एक ओर बेटी बचाओ बेटी पढाओ का नारा दे रही है, लेकिन अपने राज में वह बेटियों को सुरक्षित नहीं रख पा रही है। इस प्रकार का कृत्य होना बेहद शर्मनाक है। इस प्रकार का कार्य करने वाले अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। जिससे दुनिया में यह संदेश जाए कि भारत में कानून से उपर कोई नहीं है। बालिकाओं के साथ-साथ जनता को भी जागरूक होना होगा।

भागवंती सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज नई मंडी की उपप्रधानाचार्या ऋतु गोयल ने कहा कि पुरूष प्रधान समाज महिलाओं को अपने से उपर नहीं देख सकता। इस प्रकार की मानसिक विकृति वाले लोगों पर सरकार सहित पुलिस को विशेष ध्यान देना चाहिए। यह लोग समाज के लिए कैंसर से भी घातक हैं। इस प्रकार के जघन्य कांड को अंजाम देने वालों को कानून को कम समय में कड़ी सजा देने चाहिए, ताकि दूसरों को सबक मिल सके।

जैन कन्या इंटर कालेज नई मंडी की विज्ञान विषय की शिक्षिका राखी कौशिक का हैदराबाद गैंगरेप को लेकर कहना था कि हम ऐसे देश में रहते हैं, जहां सब सुरक्षित हैं, लेकिन बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। जिस राज्य में इतना वीभत्स कांड हो गया हो, उस राज्य के मुख्यमंत्री की नींद चार दिन बाद जाकर टूटी। यह बेहद निंदनीय है। अपराधियों को कड़ा दंड दिया जाए। ताकि आगे इस प्रकार की मानसिकता रखने वाले खुले न घूम सके और उनका सही इलाज हो सके। राखी कौशिक ने कानूनी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लचर प्रक्रिया का लाभ उठाकर अपराधी बच जाते हैं तथा आगे जाकर फिर इस प्रकार की घटना को अंजाम देते हैं। ऐसे अपराधियों को खुले में सजा दी जाए, ताकि दूसरे सबक ले सके तथा इस प्रकार का कार्य करने से पूर्व सौ बार सोचे।

फिजियोथेरेपिस्ट डा. सारा तारिक का कहना था कि घटना को लेकर क्रोध आ रहा है, साथ ही एक बड़ा झटका भी लगा कि एक होनहार चिकित्सक दरिंदों का शिकार हो गयी। क्या इस प्रकार के अपराधियों को कानून का डर नहीं है। ऐसे लोग शैतान हैं। इनके साथ वहीं सलूक किया जाना चाहिए, तो पीडिता के साथ हुआ। उन्होंने बागपत की कोर्ट के उस निर्णय का स्वागत किया, जिसने मात्र पांच दिन में एक दरिंदे को सजा दे दी।

पीआर पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या श्रीमती मानसी सिंघल का हैदराबाद की घटना को लेकर कहना था कि साल 2012 में दिल्ली का निर्भय कांड हुआ था। यदि उसी समय बेहद कड़ा कानून बना दिया जाता, तो आज इस प्रकार की घटना न हुई होती। इस प्रकार के मामले के अपराधियों को प्रति किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। ऐसा कड़ा कानून हो, जिसमें कम समय में फांसी की सजा हो और वह भी सरेआम, ताकि दूसरों के लिए सबक बन जाए।

श्रीमती चंद्रमुखी यादव शिक्षिका एवं समाजसेवी ने कहा कि हैदराबाद में डा. प्रियंका के साथ हुई हृदय विदारक घटना का मैं पुरजोर विरोध करती हूँ। साथ ही हिन्दुस्तान में भी एक ऐसे सख्त कानून की आवश्यकता है, जिसमें प्रियंका के बलात्कारियों और हत्यारों को त्वरित फांसी की सजा सुनाई जाये। देश में ऐसे कानून को लागू करने के लिये सांसद और विधायकों को एक मत होकर पहल करनी चाहिये, तभी भारतीय नारी के अस्तित्व को बचाया जा सकता है। मेरी भारत की बेटियों से अपील है कि वह हिम्मती और बहादुर बनकर समाज में अमानवीय घटनाओं को अंजाम देने वाले भेडियों को सबक सिखाये

रजनी पवार जिला विधिक प्राधिकरण सदस्य डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने कहा कि देश की लचर कानून व्यवस्था का डर समाज में नहीं है। कानून का सशक्त होना जरूरी है, ताकि जब भी कोई व्यक्ति गलत हरकत के बारे में सोचें तो उसे डर हो कि अब वह बचेगा नहीं। बेटियों को हम सशक्त बना ले, शिक्षित बना ले, लेकिन जब तक हम उन्हें सुरक्षित समाज नहीं दे पाएंगे तो उन्हें दुनिया में लाने का क्या फायदा। अगर हमारे समाज में निर्भया, प्रियंका रेड्डी जैसी आत्मा को झकझोर देने वाली घटनाएं होती रहेंगी, तब तक हम कितना ही सशक्तिकरण अभियान या बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान चलाते रहे कोई फायदा नहीं, क्योंकि जब तक ऐसे जघन्य अपराध करने वालों के दिलों दिमाग में सजा का खौफ नहीं होगा, तब तक अपराधी ऐसे अपराध करने मैं संकोच नहीं करेंगे।

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