धूमधाम से मनाया गया भैयादूज का पर्व....बहनों ने की भाइयों की लंबी उम्र की प्रार्थना

धूमधाम से मनाया गया भैयादूज का पर्व....बहनों ने की भाइयों की लंबी उम्र की प्रार्थना

मुजफ्फरनगर। भाई-बहन के अटूट बंधन का त्योहार भैयादूज मंगलवार को धूमधाम के साथ मनाया गया। बहनों के घर पर जाने को लेकर प्रात: से ही भाइयों के द्वारा तैयारी कर ली गयी थी। बस स्टैंड सहित रेलवे स्टेशन पर पूरी भीड़ नजर आयी। अधिकांश ने तो अपने वाहनों का ही प्रयोग किया। इस मौके पर बहनों के द्वारा अपने भाइयों की लंबी उम्र की प्रार्थना की गयी। वहीं भाइयों के द्वारा अपनी बहनों की रक्षा का वचन देते हुए उनके लिए एक से बढ़कर एक आकर्षक उपहार दिये गये। भैयादूज के साथ ही दीपों के पर्व का समापन हो गया। पांच दीपों के पर्व की कड़ी में भैयादूज का पर्व अंतिम पर्व होता है। मंगलवार को नगर सहित देहात में भैयादूज का पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। अपनी बहनों के घर जाने को लेकर भाइयों में पूरा उत्साह नजर आया। किसी ने बस का सहारा लिया, तो किसी ने ट्रेन का। अधिकांश ने अपने निजी वाहनों का ही प्रयोग किया। अपने भाइयों के आने का बहनों के द्वारा पूरी उत्साह व उमंग के साथ इंतजार किया गया। इस मौके पर बहनों के द्वारा अपने भाइयों के टीका कर उन्हें गोला व मिठाई दी गयी। वहीं भाइयों के द्वारा भी अपनी बहनों को एक से बढ़कर एक आकर्षक उपहार भेंट स्वरूप दिये गये। बहनों के द्वारा अपने भाइयों की दीर्घायु की कामना के लिए व्रत रखा गया। प्रात: स्नान-ध्यान करने के उपरांत भाई के घर पर आने के उपरांत उसकी तिलक करने के बाद आरती उतारी गयी। साथ ही उन्हें गोला देने के उपरांत मिठाई खिलायी गयी। जिस पर भाइयों के द्वारा बहनों को भेंट स्वरूप उपहार आदि दिये गये। इस दिन विवाहित बहनों के लिए कोथली भी दी जाती है। भाई-बहन के अटूट प्यार भैयादूज के त्योहार को अलग-अलग प्रांतों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। एक ओर जहां इसे हिंदी भाषा वाले प्रांतों में भैयादूज के नाम से जाना जाता है। वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र में भावभीज व पश्चिमी बंगाल में भाईफोटा के नाम से जाना जाता है। भैयादूज के त्योहार मनाने को लेकर पंडित सुनील अंगीरा का कहना था कि यमराज इस दिन अपनी बहन यमुना के घर पर गये थे। जहां पर उनकी बहन ने अपने भाई यमराज की पूजा करके उनके लिए मंगल आनंद एवं समृद्धी के लिए कामना की। तभी से समस्त बहनें इस दिन अपने भाइयों की रक्षा के लिए भैयादूज की पूजा करती चली आ रही हैं। इसे यम द्वितीय के नाम से भी जाना जाता है। भैयादूज को लेकर एक और कथा प्रचालित है। जिसके अनुसार द्वापर युग में श्रीकृष्ण नरकासुर को मारकर अपने बहन सुभद्रा के घर पर गये थे। सुभद्रा ने अपने भाई श्रीकृष्ण का पारंपरिक स्वागत किया था। साथ ही उनकी आरती करते हुए पूजा की थी। कहा जाता है कि इस दिन भगवान महावीर ने निर्वाण प्राप्त किया था। जिसके बाद उनके भाई राजा नंदीवर्धन महावीर को खोने से अत्यंत ही व्यथित हुए थे। उस दिन उनकी बहन सुदर्शना ने अपने भाई को दिलासा दी थी और उनकी सुख-शांति व समृद्धी की कामना करते हुए उनका साथ निभाया, उनकी रक्षा के लिए प्रार्थना की। तभी से बहनों अपने भाइयों की सुख, शांति, समृद्धी व लंबी आयु के लिए यह भैयादूज का व्रत रखती हुई आ रही हैं। पंडित सुनील अंगीरा का कहना था कि इस त्योहार का मुख्य उद्देश्य भाई-बहन के बीच सौमनस्य व सद्भावना का पावन प्रवाह अनावरत प्रवाहित रखना तथा एक-दूसरे के प्रति निष्कपट प्रेम को प्रोत्साहित करना है।

Share it
Top