डीएम व डीआईओएस ने बजट न होने का हवाला दे पल्ला झाड़ा

डीएम व डीआईओएस ने बजट न होने का हवाला दे पल्ला झाड़ा

मुजफ्फरनगर। गत 7 माह से मानदेय न मिलने पर प्रदेश सरकार के फरमान कि दीपावली से पूर्व 25 अक्टूबर से पूर्व सभी प्रदेश सरकार के कर्मचारियों को उनके खाते में वेतन भेज दिया जाये, का उदाहरण देखने को मिला। जब मुजफ्फरनगर माध्यमिक व राजकीय विद्यालयों मे कार्यरत् व्यावसायिक शिक्षक/शिक्षकाएं जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदेश के मुख्यमत्री योगी आदित्यनाथ को पिछले 7 माह से मानदेय न मिलने की शिकायत का ज्ञापन देने को लेकर पहुचे। शिक्षक/शिक्षिकाओं का आरोप है कि प्रदेश सरकार ने वायदा किया था कि 25 अक्टूबर तक हर हाल में प्रदेश में कार्य करने वाले सभी कर्मचारियों का वेतन /मानदेय उनके खाते में पहुंच जायेगा ताकि दीपावली जैसा प्रमुख त्यौहार धूमधाम से मनाया जा सके, लेकिन अफसोस की बात है कि पिछली सरकार की तरह योगी सरकार भी व्यवसाय परक शिक्षा देने वाली व्यावसायिक शिक्षको को छलने का काम कर रही है। एक तो 6 माह तक मानदेय नहीं आता और तो और एक आस थी कि दीपावली जैसे प्रमुख त्यौहार तक तो उनका मानदेय मिल ही जायेगा, लेकिन वो भी धूमिल हो गया। व्यावसायिक शिक्षक रोशनी के त्यौहार मानदेय न मिलने के कारण अन्धेरे में मनाने को मजबूर होंगे। आज मानदेय की मांग को लेकर एक प्रतिनिधिमडंल जिलाधिकारी से मिला। जिसमें उन्होंने बजट न होने की बात कहकर सभी को निराश कर दिया। जब शिक्षक व शिक्षिकाओं ने राजकीय इण्टर कालेज में मीटिंग कर रहे जिला विद्यालय निरीक्षक को मिलकर अपनी समस्या बतायी, तो उन्होंने भी बजट न होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड लिया और सिर्फ आश्वासन दिया कि दीपावली के बाद बजट मंगवाया जायेेगा। उधर बेहद निराशा में डूबे व्यावसायिक शिक्षक /शिक्षिकाएं प्रदेश सरकार की लापरवाही को कोसते नजर आये व कुछ ने तो यहां तक कहा कि जब सरकार के पास रोजगारपरक शिक्षा देने के लिए बजट ही नहीं है, तो क्यों न व्यावसायिक शिक्षा को ही बंद कर दें। कम से कम ऐसे शिक्षक अपनी दूसरी राह तो ढूंढ लेंगे। ज्ञापन देने वालों में मुख्य रूप से रकम सिंह सैनी, अनिल कुमार, मोहत शर्मा, मनोज कुमार, अर्चना गोयल, योगिता सैनी, सलोनी गुप्ता, अंजली गर्ग, संगीता गुप्ता, मनीष गुप्ता, राजीव मोहन गोयंल, रीतू गोयल, कामना, रितू र्मार्या, सुमन मित्तल सहित अनेक शिक्षक व शिक्षिकाएं शामिल रहे।

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