इतिहास बन गयी पालिका की बोर्ड बैठक...पालिका के इतिहास में पहली बार दो चेयरमैन के सानिध्य में हुई बोर्ड बैठक

मुजफ्फरनगर। नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर की आज बोर्ड बैठक थी। आज की यह बोर्ड बैठक अपने आप में एक इतिहास बन गयी। यह दो चेयरमैन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक के प्रारंभ होने से पूर्व ही पालिकाध्यक्ष ने यह कहते हुए कि उनके विकास के साथ रहे सभासदों को राजनीति के तहत रोका गया है। वह बैठक स्थगित कर चली गयीं। उसके बाद सभासदों के द्वारा हंगामा करते हुए ईओ व आब्जर्वर की सहमति से उपस्थित सभासदों में सर्वसम्मति से नया अध्यक्ष चुन कर बोर्ड बैठक को सम्पन्न कराया गया। इस पर पालिकाध्यक्ष के द्वारा कहा गया कि उनकी अनुपस्थिति में इस प्रकार की बोर्ड बैठक होना गैरकानूनी है। बैठक से पूर्व भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।

शनिवार को नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर की बोर्ड बैठक आयोजित की गयी। यह बैठक प्रात: 11 बजे प्रारंभ होनी थी। बैठक से पूर्व की भारी पुलिस बल को सभाकक्ष के अंदर व बाहर तैनात कर दिया गया था। बैठक के लिए सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था। प्रात: 11 बजकर 32 मिनट पर पालिकाध्यक्ष सभाकक्ष में आयीं। इससे पहले नीचे उन्हें कुछ व्यापारियों के द्वारा घेरा गया। उनका कहना था कि ईओ हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं। जिस पर पालिकाध्यक्ष ने कहा कि वह बोर्ड बैठक के बाद उनकी बात को सुनेंगी। सभाकक्ष में आते ही पालिकाध्यक्ष श्रीमती अंजू अग्रवाल ने कहा कि पूरा एजेंडा विकास का हैै। प्रधानमंत्री के सपने को पूरा करने का है। बहुमत से अधिक सभासद उनके साथ हैं। उन्हें राजनीति के चलते बैठक में आने से रोक दिया गया है। उनका फोन आया था। जिसके चलते वह यह बैठक स्थगित कर रही हैं। उस समय 35 सभासद सदन में उपस्थित थे। मात्र पांच मिनट में ही 11.37 पर पालिकाध्यक्ष चली गयीं।

पालिकाध्यक्ष के इस प्रकार से बैठक स्थगित करके चले जाने का सभासदों के द्वारा भारी विरोध किया गया। इसके बाद ईओ व पर्यवेक्षक के द्वारा नगर पालिका अधिनियम की कई कानूनी किताबों को खंगाला गया। सभासदों का कहना था कि इस प्रकार से बैठक स्थगित करने का पालिकाध्यक्ष को अधिकार नहीं है। यदि स्थगित करनी थी, तो इसकी सूचना नोटिस बोर्ड पर लगानी चाहिए थी।

भारी मंथन के उपरांत 12.35 पर उपस्थित लगभग 24 सभासदों के द्वारा पालिका के अधिनियम की धरा 1916 की 89 में प्रदत्त शक्ति; जिसमें कहा गया है कि यदि अध्यक्ष अनुपस्थित हो, तो उपस्थित सभासद अपने में से नया अध्यक्ष चुन सकते हैं। अध्यक्ष को बोर्ड बैठक की अध्यक्षता करते हुए अपने कर्तव्यों का पालन करेगा तथा अपने शक्तियों का प्रयोग भी कर (सकेगा) का प्रयोग करते हुए वार्ड 25 के सभासद सुनील शर्मा को कार्यवाहक अध्यक्ष चुन लिया। इससे पूर्व कार्यवाही रजिस्टर पर ईओ के द्वारा यह लिखा गया कि उनके द्वारा पालिकाध्यक्ष से संचालन की अनुमति मांगी गयी थी, लेकिन पालिकाध्यक्ष बिना अनुमति दिये व साईन किये बैठक स्थगित चली गयी, जबकि ईओ के द्वारा संचालन की अनुमति नहीं मांगी गयी थी। इसके बाद वंदेमातरम् के साथ बैठक का प्रारंभ किया गया तथा 61 प्रस्तावों में से 21 को सर्वसम्मति से पास किया गया। इसमें वार्ड तीन से सभासद श्रीमती पिंकी के द्वारा प्रस्ताव संख्या 237 अन्य में बंदर व आवारा कुत्तों को पकडऩे का मामला सदन में रखा, जिसे प्रस्ताव में स्वीकार किया गया।

इस मौके पर उपस्थित होने वालों में ईओ विजय कुमार मणि, पर्यवेक्षक अतुल कुमार, कर अधीक्षक आरडी पोरवाल, अशोक ढिंगरा, ओमवीर सिंह, विकास कुमार, संदीप सहित पालिका के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।

मेरी अनुपस्थित में बैठक होना सही नहीं: पालिकाध्यक्ष

मुजफ्फरनगर। पालिका परिषद की बोर्ड बैठक को लेकर घटे पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष पालिकाध्यक्ष श्रीमती अंजू अग्रवाल के द्वारा रखा गया। उनका कहना था कि पूरा एजेंडा विकास व सफाई का था। प्रधानमंत्री के सपने को पूरा करने का था। बहुमत से अधिक 37 सभासद उनके साथ थे। इसमें से कुछ को राजनीति के तहत बोर्ड बैठक में आने से रोका गया। जब वह बैठक के लिए सभाकक्ष में आ रही थीं, तो उन्हें कुछ व्यापारियों के द्वारा रोका गया। जिस पर उन्होंने कहा था कि वह बैठक के उपरांत उनकी बात को सुनेंगी, उनकी हर समस्या का समाधान किया जाएगा। इसके बाद वह बैठक में आयीं। बैठक में उपस्थित रजिस्टर में उनके विकास को लेकर पक्षधर सभासदो के हस्ताक्षर नहीं थे। जिसके बाद उनके द्वारा बोर्ड बैठक को स्थगित करने की बात गयी है। रही बात उनकी अनुपस्थित में बोर्ड बैठक करना, तो यह सही नहीं है। बोर्ड बैठक को बुलाने का अधिकार उनका है। यह सब सत्ता के दबाव में किया गया है। प्रशासन भी सत्ता के दबाव में है। उनका कहना था कि क्या विकास करना गलत है। बोर्ड बैठक उनके द्वारा अतिशीघ्र बुलायी जाएगी।

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