जीवन शैली भोजन प्राणायाम से सम्भव सिर दर्द का उपचार: डॉ. एम.के. तनेजा

जीवन शैली भोजन प्राणायाम से सम्भव सिर दर्द का उपचार: डॉ. एम.के. तनेजा

मुजफ्फरनगर। आज भारतीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा मावलंकर हाल, कन्सटीट्यूशन क्लब नई दिल्ली में एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन सिर दर्द के कारण तथा निदान हेतु आयोजित किया गया। जिसमें भुवनेश्वर से डॉ. महापात्रा ने न्यूरोजीनिक हैडएक तथा मेदान्ता गुरू ग्राम के विभागाध्यक्ष ने साईनस रोग से सिर दर्द पर प्रकाश डाला। आज के मुख्य वक्ता तथा आयोजक डॉ. महेन्द्र तनेजा ने बताया कि मनुष्य की प्रकृति को जानकर उसके अनुरूप उपचार भोजन, जीवनशैली से, सिर दर्द तथा समस्त रोगों से बचा जा सकता है। डॉ. तनेजा ने बताया कि सिर दर्द तीन प्रकार का होता है। टेंशन, हैडएक पित्त प्राकृति माईग्रेन, वात प्रकृति तथा साईनस का सिर दर्द कफ प्रकृति का होता है। डॉ. तनेजा ने माईग्रेन के उपर विशेष चर्चा करते हुए बताया कि वात को शान्त करने वाले भोजन जीवन शैली योग तथा प्रणायाम से लाभ होता है। आसन में हमें तीव्र उष्ण गति वालों का निषध जैसे सूर्य नमस्कार भश्त्रिाका कपाल भांति को न करके चन्द्रभेदा प्रणायाम, शीतकारी, शीतली प्रणायाम से लाभ होता है। वही रंग के हिसाब से सफेद, नीला, आसमानी, पीला रंग शान्त रखने वाला वही चमकीला लाल रंग, सर दर्द को बढाने वाला होता है। डॉ. तनेजा ने विशेष रूप से बताया कि शान्त ध्वनी एवं धुआ मुक्त वातावरण वात को शान्त करते है। डॉ. तारिणी ने वातावरण-जीवन शैली पर प्रकाश डाला। अम्बेडकर मैडिकल के प्रधानाचार्य डॉ. अचल गुलाटी ने कहा डॉ. तनेजा द्वारा बतायी गयी विधि जीवन शैली भोजन तथा प्रायायाम से अधिकांश रोगों से बचाव सम्भव है। वहीं वर्धमान मैडिकल कॉलेज दिल्ली के प्रधानाचार्य डॉ. एनएन माथुर ने बताया कि नाक, कान, एक महत्वपूर्ण अंग है। इनका उपचार एवं रोगों से बचाव आवश्यक है। कार्यक्रम में आचार्य विक्रमादत्य ने मुद्रा के द्वारा सिर दर्द के उपचार पर तथा डॉ. शरद लखौटिया नेत्र रोग विशेषज्ञ ने आस्कुलर माईग्रेन पर चर्चा की। डॉ. हरीश गुप्ता ने डॉ. तनेजा के समग्र्र चिकित्सा की सराहना की। कहा कि प्रधानमंत्री केे पिफट इंडिया कार्यक्रम के लिए यह कार्यशाला महत्वपूर्ण कदम है। आचार्य मुकेश ने शटकर्म एवं नैचुरोपेथी पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की भागीदारी तथा योग के प्रचार-प्रसार के लिए डॉ. विनोद कश्यप इत्यादि को सम्मानित किया गया। सम्पूर्ण भारत के लगभग 700 व्यक्तियों ने इसमें भाग लिया।

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