सुहागिनों के पर्व को लेकर दुल्हनों की भांति सजे बाजार

मुजफ्फरनगर। सुहागिनों का सबसे बड़ा त्योहार करवाचौथ समीप है। यह 17 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इसके लिए सुहागिनों की ओर से जमकर तैयारी की जा रही है। करवाचौथ का त्योहार हो और बाजारों में रौनक न हो, भला ऐसा कभी हो सकता है। पितृपक्ष के चलते बाजारों में एक प्रकार से मरघट का सा सन्नाटा पसरा हुआ था। इस सन्नाटे को थोड़ा बहुत नवरात्रों में मां दुर्गा की पूजा अर्चना के काम में आने वाले सामानों की खरीदारी ने तोड़ा था। इसके बाद दुकानदारों को थोड़ी बहुत उम्मीद बाजार के उठान पर आने की बंधी थी। इस बारे में एक दुकानदार अमित कुमार का कहना था कि पितृपक्ष में तो काम एक प्रकार से पूरी तरह से वेंटीलेटर पर चला गया था। नवरात्र में कुछ बाजार उठा। अब तो करवाचौथ पर होने वाली महिलाओं के द्वारा खरीदारी ही बाजार को उठा सकती है। यदि बाजार उठ गया, तो दीवाली दीवाली की तरह ही मनेगी अन्यथा नहीं। बाजार बुरी तरह से मंदी के दौर से गुजर रहा है।

करवाचौथ के समय को लेकर अमित कुमार का कहना था कि उन्होंने अपनी दुकान में साज-श्रंगार का काफी सामान रख लिया है। इसकी तैयारी काफी समय पहले कर ली गयी है। उनका कहना था कि आज महिलाओं के द्वारा जमकर करवाचौथ की खरीदारी करने से उनके चेहरे पर काफी दिनों से गयी रौनक लौटी है।

वहीं दूसरी ओर करवाचौथ को लेकर अपनी बाजार में खरीदारी करने आयी श्रीमती नीलम राठी ने अपनी करवाचौथ की तैयारियों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने इसकी तैयारी काफी समय पहले ही कर दी थी। सबसे पहले उन्होंने पतिदेव के द्वारा दिये गये खर्च के पैसों में से बचत की। इसके बाद पैसे एकत्र हो जाने पर उन्होंने बाजार का रुख किया है। उनका कहना था कि यह त्योहार करवाचौथ का महिलाओं के द्वारा रखा जाने वाला सबसे बड़ा त्योहार होता है। इसके लिए वह किसी प्रकार की कंजूसी नहीं करती है। यह त्योहार पति की लंबी आयु के लिए रखा जाता है। वहीं दूसरी ओर श्रीमती नीरज देवी का कहना था कि अब बाजार में आने पर मन प्रसन्न होता है भरे हुए बाजार को देखकर। पितृपक्ष में तो स्थिति यह हो गयी थी बाजार की कि जैसे बाजार न होकर रेगिस्तान हो। जहां पर दूर-दूर तक व्यक्ति नजर नहीं आता था।

यहां पर भी ग्राहक नजर नहीं आ रहा था। जिसके चलते दुकानदार हाथ पर हाथ धरे बैठे थे, जिसके चलते बाजार में आने का बिल्कुल भी मन नहीं करता था। करवाचौथ पर बाजार में महिलाओं के सामानों से सजी दुकानों को देखकर जो कि एक से बढ़कर एक आकर्षक तरीके से सजी हैं, मन प्रसन्न हो गया है। अपनी तैयारियों को लेकर श्रीमती नीरज देवी का कहना था कि साड़ी आदि तो पहले ही ली गयी थी, बस श्रंगार का सामान लेने था, जिसकी पूर्ति आज बाजार में आकर कर ली गयी है। उनका कहना था कि वह अपने त्योैहार को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं कर सकती हैं।

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