मास्टर विजय सिंह का धरना कचहरी से उठाकर शिव चौक पर जमा

मास्टर  विजय सिंह का धरना  कचहरी से उठाकर शिव चौक पर जमा

मुजफ्फरनगर। भूमाफियाओं के खिलाफ पिछले 24 सालों से मुजफ्फरनगर कचहरी में धरने पर बैठे मास्टर विजय सिंह को अचानक जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी. जे. ने कचहरी परिसर में धरने पर न बैठने का फरमान सुना दिया। गौरतलब है कि मास्टर विजय सिंह पिछले 24 सालों से मुजफ्फरनगर कचहरी में भूमाफियाओं और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ अनवरत धरना दे रहे हैं। मास्टर जी के इस गांधीवादी सत्याग्रह को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉडर्स में भी जगह मिल चुकी है। पूरे देश में गाँधी जी का 150वां जयन्ती वर्ष मनाया जा रहा है लेकिन सत्ता अहिंसात्मक आन्दोलन कर रहे मास्टर विजय सिंह की आवाज नहीं सुन रही है। अब कदम आगे आगे बढ़कर मास्टर जी पर कचहरी परिसर में धरने पर बैठने हेतु भी प्रतिबन्ध लगा दिया गया है। मास्टर जी का कहना है कि इसे खोखला आदर्शवाद ही कहा जाएगा कि एक ओर तो सत्ता अपने हित के लिए गाँधी के नाम का भरपूर इस्तेमाल कर रही है, वहीं दूसरी ओर अहिंसक गांधीवादी आन्दोलनों पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। जिलाधिकारी के इस फरमान के बाद भी मास्टर विजय सिंह निराश नहीं हैं। उन्हें विश्वास है कि गाँधी के देश में उनकी आवाज सुनी जाएगी। गौरतलब है कि कुछ वर्ष पूर्व तत्कालीन जिलाधिकारी सुरेन्द्र सिंह ने भी कचहरी परिसर से मास्टर जी का धरना उठाने की कोशिश की थी, लेकिन पत्राकारों और बुद्धीजीवियों के विरोध के चलते जिलाधिकारी को अपना फैसला बदलना पड़ा था।

गौरतलब है कि 22 साल पहले एक 4 साल के भूखे बच्चे की व्यथा से मास्टर जी का मन द्रवित हो गया। बच्चा अपने मां से कह रहा था कि मां किसी के यहां से आटा मांग लाओ और शाम को रोटी बना लो। हमने कई दिनों से खाना नहीं खाया है। यह वेदना सुन मास्टर विजय सिंह ने अध्यापक की नौकरी से इस्तीफा देकर गाँधीवादी आन्दोलन शुरू कर दिया। सबसे पहले उन्होंने अपने गाँव चौसाना की 4000 बीघा भूमि पर शोध करके घोटाला खोला। इस भूमि पर गाँव के राजनीतिक, दबंग और भूमाफियों ने राजस्व अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत से अवैध कब्जा कर लिया था। पिछले 24 वर्षों में मास्टर जी की मांग पर कई जाँचें हो चुकी हैं। 32 बीघा जमीन पर घोटाला साबित हो चुका है। लगभग 300 बीघा जमीन अवैध कब्जे से मुक्त कराई जा चुकी है। काफी मुकदमें भी दर्ज कराए गए हैं। भ्रष्टाचार, लचर प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक दबाव के चलते प्रकरण निस्तारित नहीं हो सका है। मास्टर जी ने आन्दोलन के माध्यम से अन्य गाँवों में भूमाफियाओं द्वारा किए गए कब्जों को भी छुड़वाया है, जिनमें पुरकाजी और रामराज प्रमुख हैं। जनपद मुजफ्फरनगर और शामली में लगभग 7 लाख बीघा सार्वजनिक भूमि, तालाब ,झील आदि पर अवैध कब्जे हैं। मास्टर विजय सिंह इस प्रकार की भूमि को कब्जामुक्त करवाने तथा इस भूमि के सार्वजनिक प्रयोग या गरीबों को बंटवाने की जद्दोजहद में 24 घंटे धरने पर रहकर गांधीवादी लड़ाई लड़ रहे हैं।

एकल व्यक्ति धरने के रूप में 24 साल का यह धरना देश व दुनिया का सबसे लम्बा धरना घोषित हो चुका है। इस धरने को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्डस, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्डस, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्डस, मीरा सैल्स ऑफ द वर्ल्ड रिकॉर्डस, यूनिक रिकार्ड ऑफ द वल्र्डस ने सबसे लम्बा सत्याग्रह दर्ज किया है। धरने के दौरान पिछले 24 सालों में मास्टर विजय सिंह को जान से मारने की धमकी दी गई और उन पर हमले भी हुए। उनके घर को भी आग लगा दी गई। मास्टर जी का कहना है कि 4000 बीघे सार्वजनिक भूमि से भूमाफिया लगभग 25 लाख रुपये की अवैध मासिक आय प्राप्त कर राजकोष को निरन्तर हानि पहुँचा रहे हैं। मुजफ्फरनगर की जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी. जे. द्वारा अचानक मास्टर विजय सिंह से किए गए इस व्यवहार से शहर के बुद्धीजीवियों में रोष है। वहीं दूसरी ओर मास्टर विजय सिंह का कहना था कि उनका धरना समाप्त नहीं हुआ है। केवल स्थान परिवर्तन हुआ है। उन्हें जिलाधिकारी के द्वारा तुरंत प्रभाव से धरना कलेक्ट्रेट परिसर समाप्त करने को कहा गया था। वह अहिंसावादी हैं, जिसके चलते उनके द्वारा तुरंत आदेश का पालन करते हएु धरना को कलेक्ट्रेट से समाप्त कर उसे शिवचौक पर प्रारंभ किया गया है। उनका कहना था कि उनकी केंंद्रीय राज्य मंत्राी डा. संजीव बालियान से वार्ता हुई थी। उनका कहना था कि ध्रना समाप्त नहीं किया जाएगा। मास्टर विजय सिंह का कहना था कि मंत्री के आने के बाद ही वह धरने को लेकर निर्णय लेंगे।

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