नियमित चालक को अनुपस्थिति पड़ गयी भारी, नौकरी से बर्खास्त

नियमित चालक को अनुपस्थिति पड़ गयी भारी, नौकरी से बर्खास्त

मुजफ्फरनगर। नियमित चालक चतर सिंह पर आरोप है कि वह 18 नवंबर 2015 से 11 जुलाई 2016 तक अपनी ड्यूटी से अनुपस्थित रहा। जिस कारण निगम संचालन बाधित हुआ। इनके द्वारा अपनी ड्यूटी पर न आने की सूचना विभाग को किसी भी माध्यम से नहीं दी। इस तरह इनके द्वारा विभागीय अवकाश के नियम का पालन नहीं किया गया। वीएआई राजकुमार तोमर की रिपोर्ट पर चतर सिंह को उप्र परिवहन निगम में लागू कर्मचारी सेवा नियमावली 1981 (अधिकारियों से भिन्न) की धारा 62 के अनुच्छेद (5) के अनुसार निगम हितों के प्रतिकूल कार्य करने, अनुच्छेद (6) के अनुसार आदेशों की अवेहलना करने, अनुच्छेद (7) के अनुसार आदेशों की अवेहलना करने (9) के अनुसार कर्तव्य पालन की उपेक्षा करने एवं अनुच्छेद (10) के अनुसार निगम को आर्थिक हानि पहुंचाने के लिए आरोपित किया।

वहीं दूसरी ओर आरोप पत्रा के जवाब में चालक द्वारा लिखा गया कि वह डाक से हर माह सूचना भिजवाता रहा तथा उसकी माताजी की अधिक तबीयत खराब थी। इसलिये उसके द्वारा अवकाश लिया गया। बाद में उसकी माताजी का स्वर्गवास भी हो गया था। आरोप पत्रा की जांच हेतु खतौली सक्षेप्र. को जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए प्रकरण की जांच कराई गयी। आरोपी चालक पर लगे आरोप जांच अधिकारी द्वारा आंशिक पाये गये।

जांच अधिकारी की रिपोर्ट से पूर्ण सहमत होते हुए आरोपी चालक को समस्त देयक जब्त करते हुए सेवा से पृथक कर दिये जाने का नोटिस जारी किया गया तथा कारण बताओ नोटिस का जवाब देने हेतु 07 दिन का समय दिया गया। नोटिस के जवाब में आरोपी द्वारा लिखा गया कि उसके परिचालक शिवेन्द्र के हाथांे अपना प्रार्थना पत्रा भिजवाया था। डिपो के सहायक क्षेत्राीय प्रबंधक बीपी अग्रवाल के द्वारा पाया गया कि आरोपी चालक द्वारा अपने ड्यूटी पर न आने की सूचना विभाग को नहीं प्राप्त कराई और और अरोपी का यह कहना की वह प्रत्येक माह अपनी सूचना विभाग को प्रेषित कर रहा था, गलत है, क्यांेकि ऐसा कोई तथ्य पत्रावली में मौजूद नहीं पाया गया, जो सि( करता हो कि आरोपी चालक की सूचना विभाग को प्राप्त हो रही थी। चालक के द्वारा अनुपस्थित रहकर निगम को आर्थिक हानि पहुंचाई गयी। इसलिये आरोपी चालक चतर सिंह को विभागीय मिलने वाले लाभ/देयक जब्त करते हुए सेवा से पृथक कर दिया गया।

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