मुजफ्फरनगर: चुनावी चौपालों पर बिछ रही हार-जीत की बिसात

मुजफ्फरनगर: चुनावी चौपालों पर बिछ रही हार-जीत की बिसात

मुजफ्फरनगर। स्थानीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया अंतिम चरण में आ पहुंची है। कल (आज) तीसरे चरण का मतदान होने जा रहा है। इसके साथ ही अंतिम प्रक्रिया के रूप में एक दिसंबर को मतगणना का कार्य भी संपन्न करा दिया जाएगा। जनपद में दूसरे चरण में 26 नवंबर को मतदान हुआ था। जिसके बाद नगर सहित देहातों में चुनावी चौपाल तैयार हो गयी हैं। हर चौपाल पर चुनावी बिसात की बाजी बिछायी जा रही है। जिसमें पल-पल में हार-जीत को तय किया जा रहा है। समर्थकों के द्वारा अपने-अपने प्रत्याशी को विजेता घोषित किया जा रहा है। साथ ही हर प्रत्याशी अपने को सभासद व चेयरमैन मान कर चल रहा है। नगर पालिका परिषद के चेयरमैन की पदवी किसके भाग्य में आती है और वह विरले 50 सभासद कौन होंगे, जो कि चेयरमैन के पद पद व गोपनीयता की शपथ लेंगे, इसका निर्णय एक दिसंबर की करिश्माई तारीख तय करेगी। सभासदों की किस्मत का निर्णय तो जानकारों की यदि मानें, तो दोपहर 12 बजे तक हो जाएगा। हां, चेयरमैन पद को लेकर मत अधिक होने के चलते शाम तक ही निर्णय सामने आ पाएगा। मतगणना का कार्यक्रम एक दिसंबर की तिथि को प्रशासन के द्वारा संपन्न कराया जाएगा। इसको लेकर एक ओर जहां सभी मतपेटियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के मध्य नवीन मंडी स्थल पर रखा गया है। वहीं मतगणना को लेकर भी प्रशासन की ओर से किलेनुमा सुरक्षा व्यवस्था की गयी है। इस बात का खास ध्यान रखा जा रहा है कि प्रत्याशी/समर्थक आदि को किसी प्रकार की निर्णय को लेकर परेशानी न हो। मतगणना में पूरी पारदर्शिता हो। साथ ही असामाजिक तत्वों से निपटने को लेकर भी रणनीति तैयार की गयी है। उधर दूसरी ओर मतदान के बाद से नगर सहित देहातों में चुनावी चौपालों पर चुनावी बिसात बिछा कर हार-जीत की बाजी खेली जा रही है। कभी किसी को जीता दिया जाता है, तो कभी किसी को। सभी अपने-अपने प्रत्याशी को विजेता मानकर चल रहे हैं। हर प्रत्याशी अपने को चेयरमैन/सभासद मानकर ही चल रहा है। जानकारों का कहना था कि जब तक मतपेटियों में बंद प्रत्याशियों की किस्मत का निर्णय बाहर नहीं आ जाता, तब तक तो सभी चेयरमैन/सभासद हैं। निर्वाचित तो केवल 51 ही होने हैं। इसमें एक चेयरमैन व 50 सभासद। शेष को कुछ दिन तो खयाली पुलाव पका लेने दो। दिन-रात लगने वाली चौपालों पर जिस प्रकार से शेयर मार्किट मे भाव उफपर-नीचे होता है, ठीक उसी प्रकार से प्रत्याशियों को हारा हुआ व विजेता घोषित किया जा रहा है। कुल मिला कर सार यह है कि उट किस करवट बैठेगा, यह तो एक दिसंबर की तिथि तय कर ही देगी। तब तक प्रत्याशियों के समर्थकों की कुछ तो मौज रहेगी है। उसके बाद उन्हें अगले पांच साल तक कोई पूछने वाला नहीं होगा।

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