मुजफ्फरनगर: निकाय चुनाव में जमकर चढ़ रहा हरियाणी मदिरा का जादू...आबकारी विभाग बाहरी शराब की तस्करी रोकने में नाकाम, प्रत्याशियों के द्वारा घर-घर जाकर बांटी जा रही मदिरा

मुजफ्फरनगर: निकाय चुनाव में जमकर चढ़ रहा हरियाणी मदिरा का जादू...आबकारी विभाग बाहरी शराब की तस्करी रोकने में नाकाम, प्रत्याशियों के द्वारा घर-घर जाकर बांटी जा रही मदिरा

मुजफ्फरनगर। चुनाव चाहे लोकसभा का हो, चाहे विधानसभा का या चाहे स्थानीय निकाय का। इनमें मदिरा का खेल जमकर खेला जाता है प्रत्याशियों के द्वारा। इसमें सबसे अधिक हरियाणा, हिमाचल प्रदेश मार्का मदिरा का प्रयोग किया जाता है। जनपद में 26 नवंबर को दूसरे चरण में मतदान होना है। मतदाताओं को लुभाने के लिए प्रत्याशियों के द्वारा मदिरा की भगीरथी पूरी तरह से बहायी जा रही है। इसे रोकने में जनपदीय आबकारी विभाग पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ है। वह एक भी प्रत्याशी के पास से नाममात्र की भी मदिरा को बरामद करने में कामयाब नहीं हो सका।
नगर निकाय चुनाव समीप आते ही प्रत्याशियों के द्वारा मतों को लेकर हिसाब-किताब जोड़ना प्रारंभ कर दिया जाता है। मौके को भुनाने को लेकर मदिरा के माफियाओं के द्वारा भी युद्धस्तर पर अपनी तैयारियों को कई दिनों पूर्व ही अंजाम दिया जाना प्रारंभ कर दिया जाता है। हर बार की भांति इस बार भी हरियाणा राज्य से तस्करी कर मंगवाई गयी मदिरा उत्तर प्रदेश में चल रहे स्थानीय नगर निकाय चुनाव में चुनाव को रंगीन कर रही है।
वहीं मतों को अपने पक्ष में करने को लेकर प्रत्याशियों के द्वारा हरियाणा की मदिरा का खुलकर प्रयोग किया जा रहा है। चुनाव चाहे कोई भी हो, इसमें मदिरा के होने वाले प्रयोग को रोकना अर्थात मदिरा के माफियाओं के मंसूबों को नाकाम करना पुलिस सहित आबकारी विभाग के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता है। आबकारी विभाग की माने तो उनकी ओर से इसके लिए प्लान काफी पहले तैयार किया गया था, लेकिन वर्तमान में वह इस पर रोक लगा पाने में पूरी तरह से नाकाम होता प्रतीत हो रहा है। मतदान को केवल एक दिन शेष है। अभी तक आबकारी विभाग के द्वारा किसी भी प्रत्याशी चाहे वह नगर का हो या देहात का कोई भी बड़ी खेप बरामद न कर पाना उसकी कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है। ऐसा नहीं है कि प्रत्याशियों के द्वारा हरियाणा की मदिरा का प्रयोग नहीं किया जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो जमकर किया जा रहा है। मतदान से एक दो दिन पूर्व तो युद्धस्तर पर किया जाता है। हरियाणा राज्य की मदिरा का यूपी में प्रयोग होने के पीछे सूत्रों का मत है कि हरियाणा राज्य में मदिरा के दाम उत्तर प्रदेश से कम होने के चलते उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनावों में बड़े पैमाने पर तस्करी कर हरियाणा राज्य की मदिरा मंगवाई जाती है। जिसे मिले ऑर्डर के तहत मदिरा के माफियाओं के द्वारा पहुंचाया जाता है। इसके साथ ही हरियाणा राज्य से मिलावटी मदिरा की अधिक तस्करी होती है। जो कि आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इसका अधिक प्रयोग प्रत्याशियों के द्वारा मतदाताओं को लुभाने को किया जाता है। जनपद में होने वाले निकाय चुनाव को लेकर इसमें बाहरी व मिलावटी मदिरा पर रोक लगाने को लेकर भले ही आबकारी विभाग के द्वारा प्लान बनाया गया हो, लेकिन मिलावटी व बाहरी मदिरा के चुनाव में होने वाले प्रयोग पर लगाम लगाने में आबकारी विभाग पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ है। आबकारी विभाग के सदर क्षेत्र के इंस्पेक्टर त्रिभुवन सिंह हयांकी पिछले 15दिनों में 4072.70 लीटर देशी/विदेशी मदिरा व 8900 लीटर लाहन बरामद कर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। इसमें से यह बरामदमी किसी भी चुनावी प्रत्याशी से नहीं है। यह आंकड़े आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को बयां करने को लेकर काफी हैं।

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