बेहतर तालमेल से अपराध रोकेगी पुलिस...यूपी व उत्तराखण्ड के पुलिस अधिकारियों ने सूचनाओं के आदान-प्रदान पर जताई सहमति

बेहतर तालमेल से अपराध रोकेगी पुलिस...यूपी व उत्तराखण्ड के पुलिस अधिकारियों ने सूचनाओं के आदान-प्रदान पर जताई सहमति

मुजफ्फरनगर। देहरादून एसटीएफ द्वारा गिरफ्रतार किये गये मुजफ्फरनगर के 50 हजार के ईनामी बदमाश शाहरूख पठान के हाथों से निकलने पर जनपद पुलिस को अब होश आया है कि वह पडौसी राज्यों की पुलिस से बेहतर तालमेल कर सूचनाओं का आदान-प्रदान करें, ताकि किसी अपराधिक घटना को अंजाम देने के बाद बदमाश पडौसी राज्यों में जाकर शरण न ले लें। जानकारी के अनुसार मुजफ्फरनगर के शहर कोतवाली क्षेत्र के मौहल्ला खालापार निवासी 50 हजार का ईनामी बदमाश शाहरूख पठान पुलिस कस्टडी से फरार चल रहा था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने के प्रयास भी किये, लेकिन वह हाथ नहीं आ सका। गत दिवस उसने देहरादून एसटीएफ से सैटिंग कर गिरफ्तारी करा ली और मुजफ्फरनगर पुलिस हाथ मलती रह गई। इसी के बीच पुलिस को होश आया और उसने उत्तराखण्ड पुलिस से बेहतर तालमेल करने के लिये सम्पर्क साधा। रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्मारक के निरीक्षण भवन में हरिद्वार और मुजफ्फरनगर के पुलिस अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें सूचनाओं के आदान-प्रदान के मसले पर सहमति बनी और आपसी समन्वय बनाने पर भी बल दिया। हरिद्वार के एसएसपी कृष्णकुमार वीके, एसपी देहात मणिकान्त मिश्रा, सीओ मंगलौर परीक्षित कुमार, खानपुर, लक्सर, झबरेडा, मंगलौर के थाना प्रभारी भी बैठक में मौजूद रहे। सभी ने मुजफ्फरनगर पुलिस से मिलकर आपसी समन्वय बनाने पर बल दिया। मुजफ्फरनगर के एसएसपी अनन्तदेव तिवारी, एसपी सिटी ओमबीर सिंह, एसपी देहात अजय सहदेव, सीओ सदर योगेन्द्र सिंह, एसओ पुरकाजी एपी भारद्वाज, छपार एसओ आदेश त्यागी समेत दोनों जनपदों के सीमावर्ती थानों के पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। एसएसपी अनन्तदेव तिवारी ने कहा कि उत्तराखण्ड के हरिद्वार जनपद की मुजफ्फरनगर से सीमा मिलने के कारण बदमाश यहां से अपराध को अंजाम देकर हरिद्वार व देहरादून में जाकर शरण ले लेते हैं। इसी प्रकार हरिद्वार के बदमाश भी मुजफ्फरनगर आकर छिप जाते है। इस बॉर्डर का फायदा बदमाश खूब उठा रहे है। अब साझा बैठक से यह पता चल सकेगा कि कौन अपराधी उत्तराखण्ड की जेल में है और कौन मुजफ्फरनगर की जेल में बंद है। कई बार हाईवे पर लूट की घटना को अंजाम देकर बदमाश दूसरे प्रदेश की सीमा में भाग जाते है, जिस कारण पुलिस को काफी दिक्कत उठानी पडती है। कुछ बडे अपराधी भी एक-दूसरे की सीमा लांघकर अपना ठिकाना बना लेते है। सुनील राठी, संजीव जीवा व जमशेद जैसे अपराधी हरिद्वार व मुजफ्फरगर में सक्रिय है और दोनों जनपदों की पुलिस में आपसी समन्वय न होने के कारण पकड से दूर रहते है। यही कारण है कि 50 हजार का ईनामी बदमाश शाहरूख पठान उत्तराखण्ड में छिपा रहा और मुजफ्फरनगर पुलिस के हाथ नहीं आ सका। देहरादून की एसटीएफ ने उसकी गिरफ्तारी दिखाई है, जबकि वह सैटिंग करके जेल गया है। चर्चा है कि मुजफ्फरनगर पुलिस को भी ईनामी शाहरूख पठान के सरेन्डर का ऑफर मिला था, ऑपफर देने वाले का कहना था कि ईनामी शाहरूख पठान को पुलिस को सौंपा जायेगा, लेकिन उस पर कोई बडी कार्यवाही नहीं होनी चाहिए। पुलिस ने ऑपफर को ठुकराकर अपने बलबूते ही शाहरूख पठान को पकडने का दावा किया था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका और जनपद पुलिस को मायूसी हाथ लगी। दोनों जनपदों की पुलिस ने तय किया है कि मिलकर बॉर्डर पर संयुक्त चैकिंग व सत्यापन कराया जायेगा। 10 साल में किसी अपराध में लिप्त दोनों जिलों के अपराधियों की सूची तैयार की जायेगी। यह भी तय हुआ कि इस बात की जानकारी भी की जायेगी कि कौन अपराधी मौजूद है और कौन निष्क्रय है। शीघ्र ही दोनों जनपदों की पुलिस मिलकर अपराधियों की कुण्डली खंगालने में जुट जायेगी।

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