ट्रेक्टर-ट्रॉली से बाईक की टक्कर होने से युवक घायल...ग्राम भेडाहेडी के निकट सडक किनारे खडी थी ट्रेक्टर-ट्रॉली

ट्रेक्टर-ट्रॉली से बाईक की टक्कर होने से युवक घायल...ग्राम भेडाहेडी के निकट सडक किनारे खडी थी ट्रेक्टर-ट्रॉली

भोपा। सडक किनारे खडी ट्रेक्टर ट्रॉली में बाईक टकरा जाने से बाईक सवार गम्भीर रूप से घायल हो गया। घंटांे सरकारी एम्बुलेंस का इंतजार करने के बाद डायल 100 पुलिस ने घायल को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मोरना पहुंचाया, जहां से उसे गम्भीर हालत के चलते मुजफ्फरनगर के लिए रैफर कर दिया गया। परिजनों ने निजी वाहन द्वारा घायल युवक को मु.नगर के निजी अस्पताल में पहुंचाया, जहां पर उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई है। थाना भोपा क्षेत्र के कस्बा भोकरहेडी के मौ. नई बस्ती निवासी 22 वर्षीय अंकित पुत्रा नरेश प्रजापति अपनी होंडा शाईन बाईक नं. यूपी12एबी 8875 द्वारा मेरठ से भोकरहेडी अपने घर वापस आ रहा था। जैसे ही अंकित ग्राम भेडाहेडी के निकट पहुंचा, तभी सामने से आ रही ट्रेक्टर ट्रॉली से बचाने के चक्कर में उसकी बाईक सडक किनारे खडी दूसरी ट्रेक्ट्रर ट्रॉली से टकरा गई। टक्कर लगने से अंकित सडक पर दूर जाकर गिरा तथा बाईक पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। दुर्घटना में अंकित के मुंह में गंभीर चोटें आई हैं। राहगीरों द्वारा 108 एम्बुलंेस को घंटों कॉल करने के बाद भी सरकारी एम्बुलंेस मौके पर नहीं पहुंची। अंकित कापफी देर तक सडक किनारे पडा रहा। उसके बाद डायल 100 पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पीआरवी 2233 के एसआई सुरेन्द्र सिंह व कॉ. प्रदीप ने खून में लथपथ अंकित को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मोरना पहुंचाया, जहां पर अंकित के परिजनों ने घंटों तक सरकारी एम्बुलेंस को कॉल की गई, लेकिन एम्बुलंेस मौके पर नहीं पहुंची। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचे थाना भोपा के उपनिरीक्षक चन्द्रसैन सैनी, कां. विनोद कुमार, राजकुमार, रवि कुमार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचकर घटना की जानकारी ली। उसके बाद थक हारकर परिजन घायल अंकित को निजी वाहन द्वारा इवान हॉस्पिटल, मु.नगर ले गये, जहां पर उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई है। अंकित ग्राम वजीराबाद में निजी चिकित्सक के रूप में प्रैक्टिस करता है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते रविवार को सरकारी एम्बुलेंस के समय से न पहुंचने के कारण एक व्यक्ति की जान चली गई थी। वहीं सोमवार को हुई भीषण सडक दुर्घटना में एक ओर जान खतरे में है। अब प्रश्न उठता है कि लाखों करोडों रूपये लगाकर चलाई गई 108 एम्बुलेंस यदि समय से घायलों को अस्पताल नहीं पहुंचा पा रही है और घायल समय से इलाज न मिलने के कारण सडक पर ही दम तोड रहे है, तो ऐसी योजनाओं का आखिर क्या फायदा?

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