मुजफ्फरनगर: जच्चा-बच्चा की मौत से मातम

मुजफ्फरनगर: जच्चा-बच्चा की मौत से मातम

भोपा। जिला चिकित्सालय में प्रसव के उपरान्त सही इलाज न मिलने से जच्चा बच्चा ने दम तोड दिया। मृतका के पति ने अस्पताल के स्टाफ पर लापरवाही के गम्भीर आरोप लगाये हैं। परिवार में हुई अचानक मौत से शोक की लहर दौड गयी। वहीं अर्थी पर रखते समय महिला के अचानक जीवित हो जाने की सूचना से हडकम्प मच गया। हजारों ग्रामीणों का हुजूम उधर दौड पडा। चिकित्सकों ने दोबारा महिला को मृत घोषित कर दिया।
ग्राम मोरना की दलित बस्ती निवासी रविन्द्र पुत्र धर्मसिंह की शादी तीन वर्ष पूर्व सरिता से हुई थी। बडी मन्नतों के बाद सरिता द्वारा परिवार का वंश बढाने की आशा जगी थी। सरिता के प्रसव को लेकर परिवार में उत्सुकता व हर्ष का माहौल था। मंगलवार को प्रसव पीडा के चलते सरिता को जिला चिकित्सालय ले जाया गया, जहां महिला चिकित्सक द्वारा डिलीवरी को गम्भीर बताते हुए खून की व्यवस्था करने को कहा गया। सरिता के भाई ने अपनी बहन की जिन्दगी के लिए खून की व्यवस्था की। बुधवार को दूसरी महिला चिकित्सक ने सरिता के प्रसव को साधारण बताया। देर रात जब सरिता की तबीयत अचानक बेहद बिगड गयी, तो अस्पताल के स्टाफ ने प्रसव पीडिता को प्राईवेट अस्पताल में ले जाने को कहा। परिजनों द्वारा सरिता को निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहां उसने प्रसव के कुछ देर बाद दम तोड दिया तथा उसके नवजात की भी मौत हो गयी। मृतका के पति ने जिला चिकित्सालय स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अपनी पत्नी की मौत का जिम्मेदार बताया है। गुरूवार दोपहर सरिता का अन्तिम संस्कार शुक्रताल स्थित शमशान घाट पर कर दिया गया। वहीं सरिता को जब अर्थी पर रखने की तैयारी की जा रही थी, तभी सरिता के सांस लेने की सूचना से हडकम्प मच गया। मृतका के ससुर ने सरिता के शरीर के पास खडे होकर यमराज से जान छोड देने की गुहार भी लगाई, किन्तु गांव के प्रसिद्ध चिकित्सक ने सरिता को मृत घोषित कर दिया। परिजन घंटों बाद भी सरिता में प्राण आ जाने की बहस में जुटे रहे। गणमान्यों द्वारा समझाने के उपरान्त ही परिजनों ने सरिता के शव का अन्तिम संस्कार किया।

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