अपराधी हो सलाखों के पीछेः डीएम...कहा-अत्याधुनिक सम्मन सैल का गठन हो, अभियोजन प्रक्रिया को बनाये चुस्त दुरूस्त

अपराधी हो सलाखों के पीछेः डीएम...कहा-अत्याधुनिक सम्मन सैल का गठन हो, अभियोजन प्रक्रिया को बनाये चुस्त दुरूस्त

मुजफ्फरनगर। जिलाधिकारी जीएस प्रियदर्शी ने कहा कि अत्याधुनिक सम्मन सैल का गठन कराया जाये और उसमें अत्याधुनिक उपकरण कम्प्यूटर, फैक्स मशीन आदि लगायी जाये और कार्यरत कर्मियों को एनआईसी के माध्यम से ट्रेनिंग दिलायी जाये। उन्होंने कहा कि मुकदमों को लटकाया नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी वकीलों की समीक्षा अपराधियों को कितनी सजा दिलायी गयी है, इसी अधार पर की जायेगी। उन्होंने कहा कि सरकारी वकीलों को उददेश्य अपराधियों को लम्बी अवधि के लिए सलाखों के पीछे भिजवाने का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक थाने से ऐसे अपराधियों की सूची बनाकर प्रस्तुत की जाये, जिन पर अधिकाधिक मुकदमें है। उन्होंने कहा कि ऐसे कम से कम 20-20 अपराधियों की सूची बनाकर प्रस्तुत की जाये। उन्होंने आईओ, डॉक्टर्स आदि को प्रचलित साधनों के अलावा ईमेल और फोन अथवा फैक्स माध्यम से सूचना भेजे जाने के भी निर्देश दिये। जिलाधिकारी जीएस प्रियदर्शी आज कलैक्ट्रेट सभागार में मासिक अभियोजन प्रक्रिया की समीक्षा कर रहे थे। जिलाधिकारी ने शासकीय अधिवक्ताओं को निर्देश दिये कि अभियोजन प्रक्रिया को चुस्त दुरूस्त व व्यवहारिक बनायें, ताकि अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को कठोर सजा दिलाई जा सके तथा अन्य अपराधिक तत्वों में दहशत बनी रहे। जिलाधिकारी ने कहा कि अभियोजन प्रक्रिया को गतिमान करने के लिए जिलास्तर पर समन्य समितियों की नियमित बैठकें भी आयोजित करें व एसपीओ अपने स्तर पर भी सप्ताह में नियमित बैठक में वादों की समीक्षा करें। जिलाधिकारी ने सम्मन सैल में नियतन कितने कर्मी होने चाहिए उनकी तैनाती के भी निर्देश दिये। उन्होंने माल खाना मौहर्रिर की तैनाती कराये जाने के निर्देश भी एसपी क्राईम को दिये। उन्होंने कहा कि मालखाना प्रबन्धन काफी खस्ताहाल है उसे दुरूस्त किया जाये। उन्होंने सदर माल खाना को बनाये जाने के सम्बन्ध में जिलाधिकारी की और से एक पत्र प्रमुख सचिव गृह केा लिखे जाने के भी निर्देश दिये। जिलाधिकारी ने शासकीय अधिवक्ताओं को कडे निर्देश दिये कि अपराधिक प्रवृत्ति के लोग सलाखों के पीछे नजर आने चाहिये। उन्होंने निर्देश दिये कि सभी प्रकार के वादों में प्रभावी पैरवी करें, तभी बदमाश व गुण्डा तत्व जेल में होने चाहिए। उन्होंने कहा कि शासकीय अधिवक्ता वाद की तिथि से पूर्व अपने केसों की भलि प्रकार अध्ययन अवश्य करें तथा अपने गवाहों पर भी नजर रखें, गवाह किसी के बहकावे या लालच में न आयें। जिलाधिकारी ने कहा कि बदमाशों की किसी भी स्तर पर जमानत न होने दी जाये, येे तभी सम्भव है जब वादों की प्रभावी पैरवी होगी। उन्होंने कहा कि अपराधी तत्वों को अधिकाधिक सजा दिलवाये, ताकि अन्य लोग भी भयभीत हो जाये व उन पर कानून का मजबूत शिकंजा कसने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सभी प्रकार के वादों में गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाये। जिलाधिकारी ने कहा कि गम्भीर वादों के सम्बन्ध में यदि कोई समस्या आती है, तो एसएसपी से सम्पर्क किया जा सकता है। जिलाधिकारी ने कहा कि सम्बन्धित थानों से भी सम्पर्क कर वादों के निस्तारण में सहयोग लिया जा सकता है, हर स्थिति में बदमाश व गुण्डा तत्व जेल में नजर आने चाहिये। जिलाधिकारी ने कहा कि अपराधिक तत्वों के हौंसले तभी पस्त होंगे, जब शासकीय अधिवक्ता प्रभावी पैरवी करेंगे बदमाश व गुण्डा लोगों की जमानत न होने दें। जिलाधिकारी ने शासकीय अधिवक्ताओं को निर्देशित किया कि सबसे अधिक पुराने वादों में पैरवी कराकर उन्हें निस्तारित कराये। जिलाधिकारी ने निर्देश दिये कि पीडित और गवाहों से जाकर मिले तथा उन्हेें सुरक्षा दिलाये और साक्ष्य जुटाकर शीघ्र ही आपराधिक प्रवृत्ति के लोग सलाखों के पीछे नजर आये। उन्होंने शासकीय अधिवक्ताओं से कहा कि गवाही के समय गवाह के साथ आईओ व पुलिस न होने पर तत्काल सूचित करें। गवाह को पुलिस सुरक्षा तत्काल उपलब्ध कराई जायेगी। बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रशासन, एसपी क्राईम तथा एसपीओ सहित शासकीय अधिवक्ता उपस्थित थे।

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