हिंदुस्तान गंगा-जमनी तहजीब का मुल्कः अरशद मदनी

हिंदुस्तान गंगा-जमनी तहजीब का मुल्कः अरशद मदनी

मुजफ्फरनगर। हिंदुस्तान गंगा-जमनी तहजीब व सभी र्ध्म व संस्कृति के लोगों का मुल्क है। इसकी बुनियाद में हमारे बुजुर्गों का खून शामिल है। हम यहीं पैदा हुए और यहीं पर दफन होते हैं। इन खयालात का इजहार जमीअत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने मुजफ्फरनगर की रूड़की रोड पर शेरपुर चुुंगी पर स्थित एक बैंकट हॉल में आयोजित कार्यक्रम जश्न-ए-आजादी में व्यक्त किये। उन्होंने आगे कहा कि आज फिरकापरस्त ताकतें मुल्क में आग लगाना चाहती हैं। जिसकी हम सख्त अल्फाज में निंदा करते हैं और हिंदू, मुस्लिम, सिख व इसाई को एक साथ प्यार व मुहब्बत के साथ रहने का पैगाम देते हैं। सैयद अरशद मदनी ने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने हमेशा मुल्क की तरक्की व मुल्क में रहने वालों की भलाई के लिए काम किया है। ईदुल अजहा का पर्व करीब है, इसको लेकर मुसलमानों को उन्होंने पैगाम दिया कि गाय की कुर्बानी न करें और दूसरे जानवर की कुर्बानी बेखौफ होकर करें। उन्होंने हुकूमत व जिला प्रशासन से अपील की कि मुसलमानों के इस मुकद्दस त्योहार को मनाने में सामने आ रही हर तरह की परेशानी को दूर करे। इस अवसर पर अजय कृष्ण महाराज ने कहा कि आजादी को पाने के लिए सभी ने मिलकर कुर्बानी दी है, ये देश हम सब का है, हर र्ध्म यही सिखाता है कि अपने वतन के साथ मोहब्बत करें। फादर जगत सिंह ने कहा कि इंसान का पहला काम यह है कि वह इंसानियत को प्यार करे। इंसानियत से बढ़कर कोई कर्म नहीं है। सरदार जंग सिंह ने कहा कि देश के लिए जीना और मरना यही जीने का सार होना चाहिए। इस अवसर पर कई राजनैतिक दलों के नेताओं ने भी शिरकत की और अपने विचार रखे। इनमें जमियत उलेमा उप्र के उपाध्यक्ष मौलाना नजर मोहम्मद, हरेंद्र मलिक, प्रमोद त्यागी, जुबैर रहमानी, अशोक बालियान, शाहिद त्यागी शामिल रहे। इस अवसर पर जमीयत उलेमा के सभी पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद थे। भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने प्रोग्राम में चार चांद लगा दिये, शान ऐ तिरंगे से सजा हॉल खचाखच भरा हुआ था तथा बाहर भी हजारों की भीड़ जमा थी। आज का नजारा देखते ही बनता था। कार्यक्रम को सफल बनाने में मौेलाना शाहनवाज कासमी, ताहिर कासमी, सलीम मलिक, मुकर्रम कासमी, मौेलाना कासिम, शाहिद हुसैनी, कारी असगर, उम्मीद अली, नादि राना, मौलाना महबूब, नपफीस, मौलाना यामीन, मौलाना अरशद, तनमीक, अकील अहमद, जमील अहमद, मौलाना इनाम, मुदस्सिर, कलीम, सलीम कासमी, शमीम कस्सार, हाफिज तहसीन राना, आसिफ कुरैशी, मौलाना खालिद जाहिद, बदरूज्जमा खान, मौहम्मद इकराम आदि का विशेष योगदान रहा।

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