चंद पैसों के चलते जिंदगियों से खेल रहे रेलवे कर्मचारी...-पैसे लेकर ट्रैक पर ही उतार देते हैं बाहर से आया माल, यात्री होते हैं परेशान

मुजफ्फरनगर। रेलवे के कर्मचारी चंद पैसों की खातिर यात्रियों की जिंदगियों से खिलवाड़ करते हैं। वह बाहर से आने वाले अवैध माल को ट्रैक पर उतार देते हैं। इसके साथ ही यात्रियों से पहले अवैध सामान को उतारना उनकी पहली प्राथमिकता रहती है। जिसके चलते अक्सर यात्राी हादसे का शिकार हो जाते हैं। वहीं दूसरी ओर रेलवे का ट्रेनों की दी जाने वाली जानकारी का ऑन लाइन चलने वाले सिस्टम भी गलत सूचना देकर यात्रियों को भ्रमित करता है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण 16 अप्रैल को रात्रि में देखने को मिला। इतना ही नहीं पूछताछ केंद्र के कर्मचारी तो यात्रियों के गुस्से से बचने को लेकर अपनी कुर्सी से ही नौ दो ग्यारह हो गये थे। बाहर से बिना कर चुकाये अवैध माल को लाने का सबसे उत्तम साधन ट्रेन है। इसमें ट्रेन का गार्ड भी उनका मददगार साबित होता है। उक्त लोग बाहर से लाये गये माल को प्लेटफार्म पर न उतार कर ट्रैक पर ही ऐसे उतार देते हैं कि जैसे इनके घर का ट्रैक हो। इसके साथ ही गार्ड से यह सांठगांठ करके ट्रेन को तय समय से अधिक रोकते हैं। ट्रेन से यात्री भले ही न उतरे, उनका माल अवश्य उतरता है। इसके चलते जल्दी में यात्री उतरने के चलते अक्सर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। ऐसा ही एक मामला कल देखने को मिला, जब ट्रेन द्वारा बाहर से आये माल को ट्रैक पर ही उतार दिया गया, जबकि सामने से ट्रेन आ रही थी। ट्रैक पर पड़े माल को उठाने के चक्कर में यदि किसी मजदूर की जान चली गयी, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। इसे न तो रेलवे के कर्मचारी रोकते हैं न ही जीआरपी व आरपीएफ वाले। कल ही रेलवे की लापरवाही सामने आयी। फाटक नंबर 48 (मंसूरपुर) को लेकर किसानों ने रेलवे ट्रैक कब्जा कर ट्रेनों का संचालन ठप्प कर दिया था। जिसके चलते उस समय आ रही ट्रेनों को आसपास के स्टेशनों पर रोका गया था। ट्रेनों की स्थिति का पता करने को जब नेट पर देखा गया, तो रेलवे के साफ्टवेयर ने ट्रेनों की स्थिति की जानकारी गलत दी। इसके साथ ही पूछताछ केंद्र पर कर्मचारी के स्थान पर केवल खाली कुर्सी ही नजर आयी। जिसके चलते यात्रियों में रोष देखने को मिला।

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