अजूबा अंक है 7

अजूबा अंक है 7

माना जाता है कि संसार की रचना सात दिनों में ही हुई थी। सात दिनों का एक सप्ताह होता है। आदिकाल से उन ग्रहों की संख्या भी सात ही मानी जाती थी जिनके बारे में विश्वास था कि वे पृथ्वी पर होने वाली सभी घटनाओं को प्रभावित करते हैं।

संगीत के सुर क्रम में भी सात सुर होते हैं। सात महासागर और सात महाद्वीपों से मिलकर ही पृथ्वी बनी है। सात की संख्या पूर्णता की संख्या है इसलिए सूरज तथा इंद्रधुनष की किरणों में सात रंग होते हैं।

गौरतलब है कि संसार में आश्चर्य भी सात हैं। ग्रीस के बुद्धिमानों की संख्या सात थी और ग्रीक वर्णमाला में भी सात स्वर हैं। यूनानी कथा के अनुसार अपोलो ने आरफियस को जो वीणा दी थी, उसमें भी सात ही तार थे। गुणों की संख्या भी सात बताई गई है। इनमें आशा, विश्वास, आदर्श, दान, धैर्य, निग्रह तथा न्याय शामिल हैं। पाप भी सात हैं-जिनमें अभिमान, लालच, ईष्र्या, क्रोध, वासना, अति भोजन तथा आलस्य शामिल हैं।

सूर्य के रथ में भी सात घोड़े होते हैं। तंत्र-मंत्र दोनों में सात की संख्या का बड़ा महत्त्व है। यही नहीं, यह अंक विज्ञान की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण माना गया है। ऐसा विश्वास है कि सातवीं संतान तत्वदर्शी होती है। हिन्दू युवक-युवतियां शादी में अग्नि के सात फेरे लेते हैं तो मुसलमान तीर्थयात्री काबा की सात परिक्रमा करते हैं। ओल्ड टेस्टामेंट में आत्मा के सात उपहार बताए गए हैं- विवेक, उपदेश, प्रज्ञा, शक्ति, ज्ञान, भक्ति तथा ईश्वर का भय। लार्डस प्रेयर में भी सात ही प्रार्थनाएं हैं।

सात की संख्या रहस्यमय शक्तियों की प्रतीक है। रोम की एक देवी सात आवक्ष प्रतिमाओं का मुकुट धारण करती थी। प्रभु के आदेशानुसार जब इजरायलियों ने सात की संख्या का मंत्रों द्वारा आवाह्न किया, तब वे जेरिको शहर पर विजय पाने में सफल हुए। कहते है मंत्रों के प्रभाव से शहर की मुख्य प्राचीर गिर गई और लोग शहर में प्रवेश कर गए।

यह भी माना जाता है कि पृथ्वी पर जीवन-मृत्यु, विकास और विनाश आदि घटनाएं चन्द्रमा चक्र के बढ़ाव-घटाव प्रभावित होती है। चन्द्र चक्र के चार रूपों में से प्रत्येक रूप सात दिनों का होता है। चार सप्ताहों के महीने के विधान के पीछे यही तथ्य जान पड़ता है। है न सात का अंक अजूबा।

- दीपक नौगांई 'अकेला'

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