Read latest updates about "बाल जगत" - Page 4

  • बाल कथा: बांधो मत पानी

    मछुआरों का एक गांव था। सभी मछुआरे सूरज निकलने से पहले ही मछलियां पकडऩे निकल पड़ते। दोपहर तक उन्हें हाट में बेचकर घर लौट आते। रात को नाचते-गाते और सो जाते। यही उनका जीवन क्रम था। उसी गांव में बालू नाम का एक मछुआरा रहता था। उसकी तीन लड़कियां थीं। पत्नी माया और बच्चे काम में बालू की...

  • बाल जगत/जानकारी: एक अनोखा संग्रहालय, मानव मस्तिष्कों का

    मस्तिष्क ईश्वर द्वारा प्रदत्त एक अनुपम उपहार है जिसे मानव ने प्राप्त किया है। मस्तिष्क मानव के शरीर का सबसे महत्त्वपूर्ण एवं रहस्यमय अंग भी है। बुद्धि एवं अनन्त जानकारियों को समेटे मस्तिष्क की कार्य प्रणाली आज भी वैज्ञानिकों की समझ से परे है हालांकि इनके रहस्य को जानने के लिए वैज्ञानिक निरंतर...

  • प्रेरणा कथा : मां की सेवा

    कल बाजार में फल खरीदने गया, तो देखा कि एक फल की रेहड़ी की छत से एक छोटा सा बोर्ड लटक रहा था। उस पर मोटे अक्षरों से लिखा हुआ था... घर में कोई नहीं है। मेरी बूढ़ी माँ बीमार है। मुझे थोड़ी थोड़ी देर में उन्हें खाना, दवा और टायलट कराने के लिए घर जाना पड़ता है। अगर आपको जल्दी है तो अपनी...

  • बाल कथा: प्रेरणा

    एक समय की बात है। गांव के मंदिर में दूर प्रदेश से आकर एक संत जी ठहरे थे। उन्होंने रोजाना लोगों को धर्म-कर्म की बातें सुनाकर उनका दिल जीत लिया था। एक दिन गांव का ही एक कुम्भकार उनके पास आया और कहने लगा-'गुरूदेव, मुझे कोई ऐसा उपाय बताइये ताकि मैं दुनियां का सबसे महान व्यक्ति कहलाऊं!'संत जी उसकी बातें...

  • नींव का पत्थर

    लाल बहादुर शास्त्री बड़े हंसमुख और मिलनसार स्वभाव के थे लेकिन जब वे लोकसेवा मंडल के सदस्य बने तो बहुत ज्यादा संकोची हो गये। यह कतई नहीं चाहते थे कि उनका नाम अखबारों में छपे और लोग उनकी प्रशंसा करें। एक बार उसके मित्र ने उनसे पूछा कि आपको अखबारों में नाम छपवाने से इतना परहेज क्यों है? ...

  • बाल लोक कथा: कालीनाग, गोरीधाना और साइद्यो

    कुमाऊं क्षेत्र (उत्तरांचल) में चैत्र माह में एक त्यौहार होता है-भिटौली। यह त्यौहार भाई बहन के निश्छल, पवित्र स्नेह व प्रेम की स्मृति का त्यौहार है। इस क्षेत्र में मान्यता है कि चैत्र माह में लड़की को अपनी ससुराल से मायके में नहीं आना चाहिए। मायके की तरफ से लड़की को भिटौली भेजने का रिवाज...

  • माता-पिता भगवान तुल्य हैं

    चूंकि आज तो घोर कलियुग है, इसलिए देव-तुल्य माता-पिता की क्या दुर्गति हो रही है? यह हम सभी जानते हैं, फिर भी भारतीय संस्कृति में जो महत्त्व माता-पिता को दिया गया है उसे नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। मनुष्य पहले अपने बच्चों को भरपेट खिलाता है, और फिर ,खुद खाता है जबकि कुत्ता-बिल्ली जब सात...

  • जरा सोच-समझ कर करें खर्च

    प्राय: देखा जाता है कि महिलाएं सेल या ऑफर के चक्कर में पड़ कर सस्ते के लालच में ऐसी अनेक चीजें खरीद बैठती हैं जिनका घर में तात्कालिक कोई भी उपयोग नहीं होता और जब तक वह उपयोग में लाई जाने वाली होती हैं उस वक्त वह या तो 'आउटडेटेड' हो जाती हैं या फिर उसकी हालत इतनी खराब हो जाती है कि उसे सिवाय...

  • बाल कथा : परिवर्तन

    संदीप हमेशा की तरह नकल करके परीक्षा में उत्तीर्ण हो जाता था। फिर क्या था, वह नकल करने का आदी हो गया और दिन भर पढ़ाई की जगह खेल कूद में अपना समय बर्बाद करता रहता। इस बार विद्यालय में नए प्रधानाध्यापक ने कार्यभार संभाला और वे प्रत्येक छात्र की ओर विशेष ध्यान रखकर अधिकाधिक अध्ययन करवाते...

  • बाल कथा : किस्सा इनाम के हकदार का

    एक छोटा-सा गांव था। उस गांव का नाम था लालसर। उस गांव में एक आश्रम था। आश्रम में रहते थे एक संत। उनका नाम था नामदास। वह बहुत दयालु, सज्जन और परोपकारी संत थे। गांव के लोग उनकी बहुत इज्जत करते थे। गांव वाले रोज ही आश्रम में आटा-दाल, चावल और चीनी आदि भेंट में चढ़ाते। एक दिन की बात है।...

  • बाल जगत/जानकारी: विचित्र जीव जंतुओं की विचित्र दुनियां

    प्रकृति से ऊंचा कलाकार न कोई पैदा हुआ है और न ही कभी पैदा होगा। किसी महान व्यक्ति द्वारा कही गयी यह बात अक्षरश: और चिर पुरातन सत्य है। जीव जन्तुओं के शरीर पर बने भांति भांति के धब्बे, विभिन्न रेखायें और रंगों के तालमेल देखकर बरबस मुंह से निकल जाता है कि परमात्मा की महिमा अपरंपार है।...

  • जानकारी: मोमबती की लौ हमेशा सीधी क्यों रहती है?

    जब मोमबती जलती है तो इसका हाइड्रोकार्बन वातावरण में उपस्थित प्राकृतिक ऑक्सीजन से रासायनिक प्रतिक्रिया करता है। इसी प्रतिक्रिया से वाष्प और कार्बन डायक्साइड गैस भी बनती है। यह सब गर्म और हल्के होते हैं सो अपने आसपास की हवा के घनत्व को आरम्भ में कम कर देते हैं। दूसरी तरफ इसी के अनुपात...

Share it
Share it
Share it
Top