Read latest updates about "बाल जगत" - Page 3

  • मत घबराइये परीक्षाओं से

    परीक्षा के दिन भी क्या दिन होते हैं। विद्यार्थी के लिए यह कठिन समय होता है। न खाने की चिन्ता रहती है, न शरीर का ध्यान। बस मन में एक ही भय समाया रहता है-परीक्षा का। चाहे गरीब विद्यार्थी हो या अमीर, कमजोर हो अथवा कक्षा में सदैव प्रथम आने वाला, सभी अपने आस पास रंग बिरंगी किताबें फैलाए उन्हीं में खोए...

  • बाल कथा: बालक की ईमानदारी का फल

    बारह वर्ष का छोटा-सा कालू एक लकड़हारे का पुत्र था। उसका पिता बूढ़ा व बीमार था। इस कारण वह चलने-फिरने और शरीरिक परिश्रम करने में असमर्थ था। कालू पर ही घर की सारी जिम्मेदारी थी। इसलिये कालू सवेरे खा-पीकर, कुल्हाड़ी कंधे पर रख अपनी धुन में गाते हुए लकड़ी काटने के लिये चल पड़ता। वह लकड़ी काट कर लाता और...

  • बाल कथा: नन्हें का बलिदान

    भारतीय इतिहास अमर बलिदानियों की अनेक गाथाओं से परिपूर्ण है किन्तु कुछ ऐसे भी बलिदानी हुए हैं जिनकी गाथा इतिहास के पृष्ठों तक पहुंच नहीं सकी। इतिहास पुरूषों की ध्येय साधना में उस निष्काम साधक की कहानी भी प्रकाश में नहीं आ पाई। घटना महाराणा प्रताप के जीवनकाल की है जब वह मुगल सेनाओं से अपने देश की...

  • बाल जगत/ जानकारी: भारतीय परंपरा का वृक्ष-बरगद

    एक अनुश्रुति है कि इलाहाबाद के दुर्ग में स्थित अक्षयवट कई कल्पों से जीवित है। सुप्रसिद्ध इतिहासकार सर जदुनाथ सरकार ने अपने ग्रन्थ 'शिवाजी' में जहांगीर के समय की एक घटना का उल्लेख किया है। सम्राट जहांगीर ने इलाहाबाद के अक्षयवट को जड़ से कटवा दिया। इसके बाद उसने जड़ की ठूंठ में लाल गरम लोहे की सलाख...

  • बोध कथा: महात्मा का तर्क

    किसी घने जंगल में एक बाघ काफी समय से शिकार के लिये इधर उधर भटक रहा था। शिकार न मिलने के कारण वह निराश होकर एक जगह खड़ा हो गया और चारों ओर निहारने लगा। अचानक उसकी दृष्टि जंगल के खुले भाग पर पड़ी। वहां एक गाय बड़े आराम से हरी हरी दूब चर रही थी। दूब चरते चरते उसने जैसे ही गरदन उठाई तो उसकी दृष्टि अपनी...

  • बाल कथा: अंकिता परी

    परी लोक में अंकिता नामक एक परी थी। बहुत ही सुंदर। उसके पास सोने की छड़ी थी। छड़ी वह सदा अपने पास रखती थी। धरती पर किसी गांव में चंदू नाम का ग्वाला रहता था। वह प्रतिदिन नदी किनारे बैठकर बांसुरी बजाया करता था। एक दिन वह बांसुरी बजा रहा था। तभी देखा, नदी में बड़ी-बड़ी लहरें उठ रही हैं। उसमें...

  • जानकारी: बच्चों में लोकप्रिय: हेलोवी

    इसमें कोई ताज्जुब की बात नहीं कि भारत में आजकल पश्चिमी सभ्यता और पश्चिमी देशों में मनाए जाने वाले रस्म-रिवाजों व पर्वों को दिल खोल के अपनाया जा रहा है। इनमें सबसे प्रचलित त्यौहार है क्रिसमस जो हर साल 25 दिसंबर को भारत में भी बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। टेक्नोलाजी के लगातार बढ़ते विकास के चलते...

  • बाल जगत / जानकारी: पशु-पक्षियों संबंधी कुछ रोचक एवं आश्चर्यजनक बातें

    सभी पक्षी गाते हैं या चहचहाते हैं, ऐसी बात नहीं है। जंघील या दोख तथा इसकी जाति के कई पक्षी गूंगे होते हैं, उसी प्रकार पशुओं में जिराफ भी गूंगा होता है। सारस हमारे देश का सबसे बड़ा पक्षी है। सारस की जोड़ी का प्रेम सर्वविदित है। इतना ही नहीं, यह पक्षी मनुष्यों की भांति एक पत्नीव्रत व एक पतिव्रत का...

  • बोध कथा: अच्छी पढ़ाई के लिए टिप्स

    एग्जाम डेज पास आते ही विद्यार्थियों में तनाव बढ़ जाता है। तनाव इतना अधिक होता है कि वे अपनी पढ़ाई के साथ ताल मेल बिठाने में असमर्थ महसूस करते हैं और उनका ध्यान भटक जाता है। विद्यार्थियों को पढऩा अच्छा नहीं लगता पर एग्जाम के समय विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपना ध्यान एकाग्र करें। उनके लिए उन्हें...

  • जानकारी/बाल जगत: क्रांतियां जिन्होंने बदल दी जीवन शैली

    दस पंद्रह वर्ष पूर्व और आज की जीवनशैली में इतना अंतर है जिसका अंदाजा शायद किसी ने नहीं सोचा होगा। कितनी भागदौड़ है जीवन में। जितनी भागदौड़ है, उतनी ही सुविधाएं भी हैं, तब भी सबके चेहरे तनावग्रस्त ही रहते हैं क्योंकि सब दूसरे से आगे बढऩा चाहते हैं और स्वयं को अधिक बुद्धिमान साबित करना चाहते हैं। इस...

  • विकसित करें बच्चों का शैक्षिक माहौल

    यह एक तथ्य है कि जो बच्चा शुरूआती दौर में पढ़ाई-लिखाई में तेज होता है, वही आमतौर पर आगे चलकर शैक्षिक जीवन में अच्छा प्रदर्शन करता है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब बच्चे के अध्ययन की नींव मजबूत हो जाती है, तब उसे आगे की पढ़ाई-लिखाई में कोई दिक्कत महसूस नहीं होती। बच्चों के शैक्षिक विकास की दृष्टि से उनके...

  • बच्चे को दुलारिए मगर....

    बचपन में मां का भरपूर प्यार मिलने पर बच्चा बड़ा होकर संतुष्ट और सुखी इंसान बन जाता है। जिन बच्चों को उनकी माताएं सही-गलत का भेद नहीं समझा पाती, वे अनजाने में ही अपने बच्चे का भविष्य बिगाड़ देती हैं। नासमझ माताओं के बच्चे कठोर हो जाते हैं और समाज में अवांछित नागरिक बनकर रह जाते हैं। बच्चों की...

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