Read latest updates about "बाल जगत" - Page 3

  • बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है नमक

    कुछ मनोचिकित्सकों के अनुसार कुछ नये जन्मे बच्चों में, नमक की थोड़ी भी अधिक मात्रा से उनका ब्लडप्रेशर सामान्य बच्चों से कहीं अधिक बढ़ जाता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के डॉक्टरों ने एक शोध में यह पता लगाया है कि कुछ नवजात बच्चों को नमक खाना बहुत अच्छा लगता है लेकिन यह उनके लिए बहुत ही खतरनाक सिद्ध...

  • बाल कथा: बच्चों पर बढ़ता बोझ

    आजकल की भाग दौड़ भरी जिंदगी में मातापिता अपने बच्चों की देखभाल एवं पालन पोषण के लिए उचित समय भी नहीं निकाल पाते। माता-पिता तो दिन भी अपने कामों में लगे होते ही हैं। बच्चे भी भाग दौड़ में शामिल हो चुके हैं। सुबह स्कूल फिर घर, ट्यूशन, शाम को हॉबी क्लासीज वगैरह। सुनीता और उसके पति विशाल दोनों ही...

  • जानकारी: मोटर साइकिल

    आज एक से बढ़कर एक आकर्षक मॉडलों वाली तेज रफ्तार मोटरसाइकिलें सड़क पर दौड़ रही हैं मगर उपलब्ध विवरणों के मुताबिक 1885 से पहले कोई मोटर साइकिल नहीं थी। सबसे पहली मोटर साइकिल सन 1885 में जर्मनी के गौटलीब डाइमलर ने बनायी थी जिस पर पहली बार सवारी की थी विल्हेल्म मेबाख ने। एक सिलेंडर और चार स्ट्रोक वाला...

  • बाल कथा: मन का मंदिर

    एक राजा था। उसने एक दिन ढिंढोरा पिटवाकर नगर के बढ़इयों के दस पुत्रों को दरबार में बुलवाया। राजा ने कहा, 'देखो बच्चो, तुम होनहार कलाकार हो। मैं तुम्हारी कारीगरी का कमाल देखना चाहता हूं। तुममें से हर एक को कल शाम तक एक सुंदर और छोटा-सा लकड़ी का मंदिर बनाकर मेरे सामने प्रस्तुत करना होगा। सबसे अच्छा...

  • बाल जगत: आज की मां, मां नहीं, सुपर मॉम बन कर रहती है

    आधुनिक युग की मांएं बस मां का कर्तव्य ही नहीं निभाती, उसके साथ-साथ बच्चों के विकास हेतु हर पहलु पर उनका साथ निभाती हैं। गर्भकाल से लेकर उनके विकास, स्कूल, एक्स्ट्रा हॉबी क्लासेज, पौष्टिक आहार, स्पोर्टस पढ़ाई, करियर और उनके शौक का पूरा ध्यान रखती हैं। उनके साथ क्वालिटी टाइम बिताने के लिए पूरा ध्यान...

  • बच्चे का डर दूर करें

    बच्चों का काल्पनिक खतरों से डरना एक आम समस्या है। प्राय: बच्चे भूत-प्रेत, बाबाओं, कुत्ता, बिल्ली, अंधेरे आदि से डरते हैं। इनकी अनुपस्थिति में भी बच्चों के मन में इनके प्रति भय रहता है। इस प्रकार का डर उन्हें दब्बू बना देता है, उनमें आत्मविश्वास की कमी आ जाती है तथा उनके व्यक्तित्व का संतुलित विकास...

  • बाल कथा: कर्म की श्रेष्ठता

    एक बार भाग्य और कर्म में बहस छिड़ गई कि कौन श्रेष्ठ है। उस समय वे एक गरीब ब्राह्मण के झोंपड़े के पास से गुजर रहे थे। कर्म बोला, यदि इस गरीब बाह्मण को बिना कर्म किए अमीर बना दो तो मैं तुम्हारी श्रेष्ठता स्वीकार कर लूंगा। भाग्य बोला, इसमें कौन सी बड़ी बात है। कल देखना यह ब्राह्मण अत्यंत वैभवपूर्ण...

  • बाल जगत: अस्तित्व की समाप्ति की ओर अग्रसर समुद्री जीव

    पूंजीवाद की अत्यधिक दोहन की भूख ने समुद्री जीवों के अस्तित्व पर ग्रहण लगा दिया है। अध्ययनकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि समुद्री मछलियों को बचाने के जल्दी ही पुख्ता इंतजाम नहीं किए गये तो सन् 2050 तक इन जीवों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। यह चेतावनी समुद्री परिस्थितिकी तंत्र (सी इकोसिस्टम) और खाद्य तथा...

  • बच्चों का व्यक्तित्व चित्रों द्वारा जानिए

    आमतौर पर बच्चे स्कूल में चित्र बनाते हैं, कभी कॉपी पर, कभी किताबों पर तो कभी डेस्कों पर। यह चित्रकारी कहीं न कहीं उनके व्यक्तित्व को उजागर करती है, अनचाहे में उनकी इच्छाओं को झलकाती है। आइए जानें कि आप अपने बच्चों को चित्रों के माध्यम से कैसे समझ सकते हैं। तारे:-यदि आपका बच्चा प्राय: कॉपियों,...

  • बाल कथा: चिडिय़ां भूल गई

    तब की बात है, जब चिडिय़ां पेड़ों पर नहीं रहती थीं। उनके अपने मोहल्ले होते थे। वहां वे सब इकटठी रहकर नाचती-गाती थीं। उनके पास आग भी थी, जिससे खाना पकाती थीं। एक दिन की बात, नाचती-गाती सारी चिडिय़ां सो गईं। बाहर आग जलती रही। उसे अंदर रखना भूल गईं। रात में तेज बारिश हुई। आग बुझ गई। सुबह चिडिय़ों को आग...

  • शेयरिंग करना सिखाएं बच्चों को

    बच्चे अपने माता-पिता, घर-परिवार और आस-पास के वातावरण से बहुत कुछ सीखते हैं। बच्चे गंदी आदतें जल्दी सीखते हैं और अच्छी आदतों पर पूरा ध्यान नहीं देते। ऐसे में माता-पिता की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक बच्चों को बचपन से ही शेयरिंग का अभ्यास करवाना होगा। तभी वह सीख पाएंगेे और साथ ही...

  • बाल कहानी: चांदी की डिबिया

    सुखराम कहने को किसान था पर काम दूसरे के खेतों पर करता था। मुश्किल से परिवार का गुजारा कर पाता था। एक दिन सुखराम को कुछ सामान लेने बाजार जाना पड़ा। वह साहूकार दीनदयाल की दुकान पर पहुंचा। साहूकार ने उसे पहचान कर कहा, 'वर्षों पहले तुम्हारे पिता ने मुझसे पचास रूपए उधार लिए थे। वे रूपए न उन्होंने लौटाए,...

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