बाल जगत: परीक्षा शिक्षा की कसौटी है

बाल जगत: परीक्षा शिक्षा की कसौटी है

- अनूप मिश्रा आज के बदलते दौर में कदम-दर-कदम परीक्षाओं का कड़ा सामना करना ही पड़ता है। जिस प्रकार सोने की कसौटी पर परखने हेतु तथा शुद्ध करने के लिए आग में तपाया जाता है कि उसी तरह छात्रों की योग्यता की कसौटी को जांचने के लिए परीक्षा का आयोजन भली-भांति किया जाता है। ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ इसी युग में दिखाई दे रहा है बल्कि प्राचीन काल में भी गुरू अक्सर अपने शिष्यों की समय-समय पर परीक्षाएं लेते रहे हैं क्योंकि यदि जीवन में परीक्षा शब्द ही नहीं होगा तो छात्र के गुण-दोषों का सही मूल्यांकन करना बड़ी टेढ़ी खीर हो जाएगा, इसलिए परीक्षा का होना अति आवश्यक है। वैसे भी परीक्षा शिक्षा की कसौटी है। परीक्षा के बगैर शिक्षा का कोई अस्तित्व नहीं होता, इसलिए परीक्षा के नजदीक आते ही मन में भय न पालें, ध्यान लगाकर पढ़ें। अवश्य ही समस्या का समाधान खुद ब खुद हो जाएगा। इस बारे में शिक्षा शास्त्री तथा परीक्षा काउंसलरों की राय है कि छात्रों के परीक्षण के लिए परीक्षा परम आवश्यक है। यद्यपि सभी के जीवन में परीक्षा का क्षण एक बार अवश्य आता है परंतु छात्रों को परीक्षा से कई बार दो चार होना पड़ता है। यदि जब कोई चीज अनिवार्य है, तो फिर उससे भयभीत क्यों होना? फिर तो डटकर सामना करना चाहिए। इससे ही उनकी बुद्धि, प्रतिभा, स्मरण शक्ति, परिश्रम, लेखनशक्ति का सही मायनों में मूल्यांकन होता है। निस्संदेह, परीक्षा के परिणाम के आधार पर ही छात्रों के भविष्य की दिशा निर्धारित होती है। इसीलिए प्रत्येक छात्र का प्रयास होता है कि वह परीक्षा में अन्य छात्रों से बेहतर प्रदर्शन कर पर कई बार ऐसा करते समय छात्र तनावग्रस्त तक हो जाते हैं। इसलिए उन्हें प्लानिंग के साथ तैयारी करने की बेहद जरूरत होती है। तभी वे सफलता की ऊंचाइयों को स्पर्श करने में सफल हो सकते हैं हालांकि परीक्षा के दिन उन्हीं छात्रों के लिए परेशानीदायक सिद्ध होते है जो पूरे साल मौज-मस्ती में खोये रहते हैं या फिर अपना सारा का सारा बेशकीमती समय टी वी देखने और खेल-कूद में व्यतीत कर देते हैं। हकीकत में ऐसे छात्रों पर परीक्षा का भूत चढऩा स्वाभाविक है। इस बीच विषय अधिक होते हैं, समय अल्प। अत: छात्र घबरा जाते हैं और चेहरे से पसीना छूटने लगता है। फलस्वरूप छात्र बीमार हो जाते हैं या फिर अपना मानसिक संतुलन खो बैठते हैं। परिणामस्वरूप अंत में कुछ याद नहीं होते देख शार्ट कट अपनाने के साथ-साथ अनैतिक तरीकों से अर्थांत नकल द्वारा उत्तीर्ण होने का ख्वाब देखने लगते हैं जिसका परिणाम अंतत: बुरा ही साबित होता है। हमें बोर्ड परीक्षाएं निकट आते ही समय सारिणी को तैयार करके हर एक विषय पर गहनतापूर्वक ध्यान देना चाहिए। यही नहीं, छात्रों को वर्ष भर नियमित ढंग से अध्ययन करना चाहिए और परीक्षा को एक मुसीबत न समझकर, अपनी योग्यता की जांच का सुनहरा अवसर मानकर इस चुनौती का कड़ा सामना डटकर करना चाहिए। तभी ऐसे में छात्रों को अपना भविष्य उज्ज्वल होता दिखाई देगा जो उनके भविष्य को नया आयाम देता नजर आयेगा।

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