बाल कथा : स्वामीभक्त शक्तिशाली पक्षी-बाज

बाल कथा : स्वामीभक्त शक्तिशाली पक्षी-बाज

स्वाभिमानी, शक्तिशाली एवं स्वामीभक्त पक्षी बाज के संबंध में जीव वैज्ञानिकों का मत है कि यदि हमारे नेत्रों में भी वही विशेषताएं होती जो कि साधारणत: बाज की आंखों में रहती है तो हम एक किलोमीटर की दूरी तक रखी हुई किसी भी वस्तु को देख सकते।
तीव्र वेग एवं दृष्टि के कारण ही वृक्ष अथवा ऊंचे से ऊंचे स्थान पर बैठा बाज कहीं भी शिकार दिखते ही उसकी तरफ उठते हुए बड़ी तेजी से शिकार पर झपट पड़ता है। अनुसरणीय पक्षी बाज को इच्छा अनुसार पाला-पोसा एवं शिक्षित किया जा सकता है।
बाज छोटे, कमजोर और मासूम पक्षियों का शिकार कभी नहीं करता। प्राचीनकाल से ही कुछ राजा महाराजा एवं धनाढ्य व्यक्तियों द्वारा बाज को पालने का शौक सर्वविदित रहा है जिससे उसकी शक्ति एवं स्वामीभक्ति प्रमाणित होती है।
बाज के शरीर के ऊपर का रंग भूरा सुनहरी होता है किन्तु नीचे का रंग सफेद रहता है जिससे काली भूरी लकीरें स्पष्टत: दिखलाई पड़ती है। बाज की आंखे स्वाभाविक चमकीली काली, डैने लम्बे और नुकीले रहते हैं किन्तु चोंच लम्बी मुड़ी हुई तथा पत्थर जैसी मजबूत होती हैं जो शिकार के मांस को चीरने फाडऩे खाने के लिये सदैव उपयुक्त रहती है।
नर मादा बाज के रंग रूप में अन्तर रहता है। आकाश में केवल बाज ही गरूड़ के बाद सबसे अधिक बलशाली योग्य पक्षी है जो वायुमण्डल में तीन किलोमीटर की ऊंचाई पर पड़ते हुए भी अपने शिकार को बिजली की भांति झपट कर दबोच लेने की क्षमता रखता है।
उडऩे से पहले बाज अपने पंखों को सिर की तरफ ऊंचा उठाता चला जाता है ताकि अधिक से अधिक वायु पंखों में घिरती चली जाए। अब बाज के पंख हवा में तैरते हुए ऊंचाई की ओर अग्रसर हो आगे बढ़ते रहते हैं और आसमान में यदि कोई शिकार दिखलाई पड़ गया तो वह बड़ी कुशलता से शिकार को झपट लेता है किन्तु केवल भूखे होने पर ही बाज शिकार करता है अन्यथा कभी नहीं करता।
पृथ्वी पर उतरते एवं झपटते समय बाज अपने पंख समेटते हुए पत्थर के समान स्थिर बन सुगमतापूर्वक बिना किसी विशेष प्रयत्न के पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण के कारण नीचे उतर जाता है किन्तु इस समय उसकी गति 150 किलोमीटर से 300 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो जाती है।
बाज की प्रजातियों में एक विशेष प्रकार का मत्स्य बाज पाया जाता है जो पानी पर तैरती हुई मछलियों को पकड़ लेता है। वायु विज्ञान के संबंध में बाज को इतनी अधिक जानकारी रहती है कि जब बाज मछली को पकड़ कर उडऩा प्रारंभ करता है तो मछली का सिर सदैव नीचे की ओर ही झुकाए रखता है ताकि उस पर वायु का दबाव अधिक न पड़ सके।
अमेरिका के वैज्ञानिकों एवं कृषि विभाग के विशेषज्ञों द्वारा समय-समय पर किये गए परीक्षणों से प्रमाणित हो जाता है कि बाज आकाश में दर्शनीय सभी प्रकार के कर्तव्य - कौशल दिखलाने की सामर्थ्य रहते हुए कृषि क्षेत्र में वरदान सिद्ध हो रहा है क्योंकि वह उन्हीं कीड़े मकौड़ों और पक्षियों को मारता है जो फसल को हानि पहुंचा कर नष्ट कर रहे होते हैं।
अमेरिकी कृषि विशेषज्ञों के मतानुसार अमेरिका में एक बाज पक्षी से किसान को पन्द्रह हजार रूपये प्रतिवर्ष तक का लाभ हो जाता है क्योंकि बाज खेत को हानिकारक कीड़ों और पक्षियों द्वारा फसल को नष्ट होने से बचाता रहता है। इस प्रकार बाज विलक्षण शक्ति के साथ-साथ उपयोगिता में भी परिपूर्ण प्रमाणित हो रहा है।
- सुरजीत सिंह साहनी

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