कहीं आपका बच्चा बिगड़ तो नहीं रहा है?

कहीं आपका बच्चा बिगड़ तो नहीं रहा है?

प्राय: सभी माएं अपने बच्चों को प्रसन्न देखना चाहती हैं। हर तरह के साधन जुटाकर समय-समय पर अपने बच्चों की इच्छाओं की पूर्ति करती रहती हैं। साथ ही वे अपने बच्चों की गलतियों को छिपा लेती हैं ताकि वे पिता की डांट से बच सके।
यही आदत आगे चलकर बच्चों को निडर बना देती है जिसका परिणाम घातक होता है, इसलिए बच्चों की गलतियों पर कभी पर्दा न डालें। उन्हें प्यार से समझाएं। छोटे बच्चों को भी उनकी गलती का अहसास कराएं। उन्हें सही-गलत की पहचान कराएं। यदि बच्चा बार-बार प्यार से समझाने पर भी नहीं मानता और वही गलती करता है, तब उसे सजा अवश्य दें जिससे भविष्य में गलती न करने का अहसास उसे रहे।
बच्चों के साथ अधिक मारपीट न करें। अधिक मारपीट बच्चों को ढीठ व बेशर्म बना देती है। वे यह सोचने लग जाते हैं कि ज्यादा से ज्यादा मार ही तो पड़ेगी। मार तो यूं भी पड़ती ही रहती है। बच्चे प्यार से जितना काबू किए जा सकते हैं, उतना डांट या मारने से नहीं।
बच्चों को सुधारने हेतु माता-पिता को बच्चों की दिनचर्या को अनुशासित करना चाहिए और उनका टाइम टेबल बना देना चाहिए। बच्चों का अधिक टी.वी. देखना भी उन्हें विद्रोही बना देता है। आपस में छोटी-छोटी बातों पर मारपीट करना सिखा देता है।
बच्चों के सामने माता-पिता को पहले स्वयं शिष्ट बनना चाहिए। बच्चों पर माता-पिता की शिष्टता का बहुत प्रभाव पड़़ता है। बच्चों के सामने कभी धूम्रपान न करें।
शराब, तम्बाकू जैसे जहर का घर में प्रवेश न होने दें। यदि पिता स्वयं बीड़ी, सिगरेट, शराब पीता है तो बच्चे को किस तरह इस कार्य को करने से रोक सकता है।
बच्चों की रूचि के अनुसार उन्हें संगीत, खेलकूद, कला एवं अन्य क्षेत्रों में भी आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित करते रहना चाहिए, उनकी प्रतिभा को जगाना चाहिए।
अच्छे कार्य करने पर उन्हें प्रोत्साहन देना चाहिए। कभी-कभी उन्हें पारितोषिक भी देना चाहिए। इससे उनका उत्साह बढ़ता है। ये सारी क्रियाएं आपके बिगड़ते बच्चे को सुंदर एवं शिष्ट बनाती हैं। इन्हें जीवन में अपनाते रहें।
- मीना जैन छाबड़ा

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