बाल जगत: छोटी उम्र, काम बड़े

बाल जगत: छोटी उम्र, काम बड़े

- गुरू नानक को 9 वर्ष की आयु में अपने गुरू मौलाना कुतुबुद्दीन से अधिक ज्ञान प्राप्त हो गया था।

- संत ज्ञानेश्वर ने 12 वर्ष की उम्र में भगवत गीता पर मराठी छंदों में 'ज्ञानेश्वरी गीता' लिखी थी।

- सन् 1594 में जन्मे जर्मनी के वॉन पैथनहेम को बाल्यावस्था में ही इतना योग्य समझा गया कि सिर्फ 14 वर्ष की उम्र में ही एल्डोर्फ यूनिवर्सिटी का प्राचार्य नियुक्त कर दिया गया।

- अंग्रेज इतिहासकार थामस बैबिंग्टन मैकाले बाल्यावस्था में बहुत तेज का दिमाग था। मात्र 4 वर्ष की आयु में उसने 42 पृष्ठ की कैटेलॉग 'द आर्फोड क्लैक्शन ऑफ आर्ट' में अंकित 3,000 वस्तुओं के नाम याद कर लिए थे।

- लेबबान के कैंटुकी नगर के सैंट मैरीज कॉलेज के एक छात्र मार्टिन जे स्पैंडलिंग (जन्म: 1810 मृत्यु: 1872) इतना प्रतिभासंपन्न समझा गया कि स्नातक की परीक्षा पास करने से दो वर्ष पहले ही मात्र 14 वर्ष की आयु में गणित का प्रोफेसर नियुक्त कर दिया गए थे

- फ्रांस के विश्व प्रसिद्ध कवि थेवेन्यू चार्ल्स साइमन केवल 15 वर्ष की उम्र में एक कॉलेज के प्रोफेसर बन गए थे।

- उन्नीसवीं सदी की विख्यात ब्रिटिश उपन्यास लेखिका चार्लोट यॉन्ज ने 7 वर्ष की आयु में अध्यापन कार्य प्रारंभ किया था।

- प्रथम परिकलन यंत्र (हिसाब जोडऩे की मशीन) का आविष्कार फ्रांस के ब्लेज पास्कल ने किया था। पास्कल गणित में तेज था और एक सेठ के पास बतौर मुनीम काम कर रहा था-इसी दौरान 1642 में उसने मात्र 19 वर्ष की आयु में उक्त क्रांतिकारी आविष्कार किया था।

- फ्रांसीसी विद्रोह की सर्वोच्च वैधानिक संस्था 'ग्रांड असैंबली' का एक बालक विधायक चुना गया। विधायक चुने जाने के वक्त जीन बैप्टिस्ट टैस्टे नामक इस बालक की उम्र 13 वर्ष थी।

- प्राच्य संस्कृति के जर्मन छात्र ने यूनानी, हिब्रू व लेटिन भाषाओं का बढिय़ा ज्ञान प्राप्त कर इन भाषाओं में 16 वर्ष की आयु में कविताएं लिखना शुरू कर दिया था।

- हरिशचंद्र चटर्जी ने 14 वर्ष की उम्र में प्रसिद्ध नाटक 'अबू हसन' लिखा था।

- सरोजिनी नायडू ने 1300 पंक्तियों की अंग्रेजी कविता 13 वर्ष की आयु में लिखी थी।

- रानी अहिल्या बाई ने 18 वर्ष की आयु में राजकाज संभाला था।

- तोरण का किला शिवाजी ने 13 वर्ष की आयु में जीता था।

- सिकंदर ने 16 वर्ष की उम्र में शोरोनियां का युद्ध जीता।

- 4 वर्ष की आयु में रविंद्र नाथ टैगोर ने अंग्रेजी नाटक 'मैकबेथ' का बांग्ला अनुवाद किया था।

- ए. पी. भारती

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