बाल कथा: हिरामन तोता और ग्रेट टीट बर्ड

बाल कथा: हिरामन तोता और ग्रेट टीट बर्ड

हिरामन तोता राजस्थान के भरतपुर उद्यान में रहता था। उसे घूमने फिरने का बहुत शौक था। गर्मी की छुट्टियों में वह विभिन्न उद्यानों की सैर करने निकल पड़ता था।

इस बार वह बिहार के बाल्मीकि बाघ अभ्यारण्य जा रहा था। उसने पढ़ा था कि वहां बाघों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। वह बाघोंं को देखना चाहता था। उसे पशुपक्षियों से मिलने और उनसे बात करने में बहुत मजा आता था।

हिरामन को बाल्मीकि बाघ अभ्यारण्य में घूमने और बाघों को देखने में बहुत मजा आ रहा था।

घूमते-घूमते वह थक गया तो थोड़ा आराम करने के लिए एक पेड़ की डाल पर बैठ गया। उस डाल पर पहले से एक पक्षी बैठा हुआ था, वह पक्षी गोरैया की तरह दिखता था।

चलो, इस पक्षी से बात की जाए, यह सोच कर हिरामन ने उस पक्षी से पूछा, तुम इसी उद्यान में रहते हो क्या?

वह पक्षी मुस्कुराता हुआ बोला, नहीं दोस्त, मैं यहां नहीं रहता हूं। मैं भी तुम्हारी तरह यहां घूमने आया हूं।

कहां रहते हो तुम, हिरामन ने उत्सुकता से पूछा, अपने बारे में कुछ बताओ न?

दोस्त, मैं हिमालय की तराई में रहता हूं, वह पक्षी मुस्कुराता हुआ अपने बारे में बताने लगा, मुझे ग्रेट टीट बर्ड कहते हैं। हिंदी में मेरा नाम राम गंगारा पक्षी है।

मैं गोरैया की तरह दिखता हूं मगर गोरैया नहीं हूं लेकिन गोरैया की तरह हमारी संख्या भी बहुत कम है। अच्छा दोस्त, अब मैं चलता हूं। इतना कहकर वह वहां से उड़ गया और एक दूसरे पेड़ की डाल पर जा कर बैठ गया।

बड़ा अजीब पक्षी है, हिरामन ने हैरानी से सोचा, यहां रूककर अपने बारे में कुछ और नहीं बता सकता था। उस पेड़ पर जा कर बैठ गया।

हिरामन भी उस पेड़ पर पहुंच गया।

अरे दोस्त, तुम वहां रूक कर बात नहीं कर सकते थे क्या? हिरामन ने शिकायती लहजे में कहा, तुम यहां चले आए, लगता है तुम बहुत चंचल पक्षी हो।

बिलकुल ठीक कहां तुमने, ग्रेट टीट बोला, हमें पक्षियों में सबसे चंचल पक्षी माना जाता है। किसी भी स्थान पर हम पांच दस सेकेंड से अधिक नहीं रूकते।

दोस्त, तुम्हारा भोजन क्या है? हिरामन तोते ने पूछा।

दोस्त, हम कीड़े-मकोड़े खाते हैं। ग्रेट टीट पक्षी ने जवाब दिया।

एक बार में तुम कितने अंडे देते हो? हिरामन ने पूछा।

ग्रेट टीट पक्षी बोला, हम एक साथ चार अंडे देते हैं।

तुम यहां कब तक रहोगे? हिरामन ने जानना चाहा।

अभी हम यहां कुछ दिन और रूकेंगे, ग्रेट टीट पक्षी बोला, असल में मौसम में आए बदलाव के कारण हमें यहां आना पड़ा है।

मौसम के बदलाव का असर हम पर भी पड़ता है इसलिए हिमालय की तराई को छोड़ कर हम इस अभ्यारण्य में आए हैं।

तभी हिरामन तोते को लौटने का ख्याल आया। वह ग्रेट टीट बर्ड से विदा लेते हुए बोला, दोस्त, तुमने अपने बारे में बताया और मुझसे बात की इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

- हेमंत कुमार यादव

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