हमारे मूल अधिकार और कर्तव्य

हमारे मूल अधिकार और कर्तव्य

हमारा संविधान 26 जनवरी सन 1950 को लागू हुआ। संविधान में दी गई व्यवस्थाओं के अनुरूप ही हमारी शासन एवं कानून व्यवस्था का संचालन होता है। संविधान ने देश के नागरिकों को निम्नलिखित मूल अधिकार दिए हैं-

- समता का अधिकार।

- स्वतंत्रता का अधिकार।

- शोषण के विरूद्ध अधिकार।

- धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार।

- सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार।

- कुछ कानूनों के संरक्षण की व्यवस्था।

- संवैधानिक उपचारों का अधिकार।

भारतीय संविधान में नागरिकों के मूल कर्तव्य का कोई उल्लेख नहीं था। जनवरी 1977 में मूल कर्तव्यों के संदर्भ में एक संहिता को संविधान में शामिल किया गया। उसके अनुसार नागरिकों का मूल कर्तव्य है: -

- संविधान का पालन करना और इसके आदर्शों को संजोए रखना और इन्हें जीवन में अपनाना।

- भारत की संप्रभुता, एकता व अंखडता को बनाए रखना और इसकी रक्षा करना।

- देश की रक्षा करना और आहवान किए जाने पर राष्ट्रीय सेवा करना।

भारत के सभी लोगों के बीच धार्मिक, भाषाई और क्षेत्र या वर्ग के भेदभावों से ऊपर उठकर सदभाव और आपसी भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना,ऐसी प्रथाओं का त्याग करना जो स्त्रियों के सम्मान के विरूद्ध हैं।

- देश की सांझी संस्कृति का सम्मान और उसका संरक्षण।

- प्राकृतिक पर्यावरण की, जिसके अंतर्गत वन,झील,नदी और वन्य जीव हैं, रक्षा करना और उसका संवर्धन करना तथा प्राणी मात्र के प्रति दया रखना।

- वैज्ञानिक ंमनोवृत्ति, मानवतावाद तथा जिज्ञासा और सुधार की प्रवृत्ति विकसित करना।

- सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा करना और हिंसा से दूर रहना।

- सभी व्यक्तिगत तथा सामूहिक कार्यक्षेत्रों में उत्कृष्टता लाने के निरंतर प्रयास करना ताकि राष्ट्र प्रगति और उपलब्धियों के नए-नए शिखर छूता जाए।

- अनिल शर्मा

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