बाल कथा: अक्ल खरीदी

बाल कथा: अक्ल खरीदी

एक गांव में किशन नाम का गरीब ब्राह्मण रहता था। उसके पास आय का कोई साधन नहीं था। उसकी पत्नी राधा उसे रोज कहती कि जाओ कुछ कमा कर लाओ वरना खाएंगे क्या। लेकिन किशन ऐसे ही हाथ पर हाथ धरे बैठा रहता था।

एक दिन राधा के बहुत कहने पर वह कमाने जाने राजी हुआ लेकिन उसने कहा, रास्ते में मुझे भूख लगेगी तो मैं क्या खाऊंगा? कुछ रूपए हों तो दे दो।

राधा ने बड़े जतन से बीस रूपए रखे थे, सो किशन को दे दिए। किशन चल पड़ा पर जाएगा कहां, यही सोचता चला जा रहा था कि उसे जंगल में एक कुटिया दिखाई दी। कुटिया के आगे दस-बारह लोग खड़े थे। किशन वहीं रूक गया। पूछने पर एक आदमी ने बताया, 'अंदर एक महात्मा हैं जो पैसे ले कर अक्ल बेचते हैं।

किशन ने सोचा चलो अंदर चल कर देखा जाए और वह भी कतार में खड़ा हो गया। अपनी बारी आने पर वह अंदर गया तो महात्मा ने पूछा, 'अक्ल खरीदोगे ?

'हां। किशन ने कहा।

महात्मा ने पूछा, 'कितनी अक्ल चाहिए तुम्हें? एक अक्ल के पांच रूपए लगते हैं।

किशन ने पांच रूपए दे दिए। महात्मा ने कहा, 'जिस बात को चार लोग कहें, उसे मत टालना, हमेशा लाभ होता है।

किशन ने सोचा एक और खरीद लूं। महात्मा ने दूसरी बार कहा, 'तुम्हें धन मिले तो उसे गुप्त रखो, ढिंढोरा मत पीटो।

किशन की जिज्ञासा बढ़ गई, सोचा दो और ले लूं। तीसरी बार महात्मा जी बोले, 'अपना राजदार किसी को मत बनाओ, अपनी पत्नी को भी नहीं।

चौथी बार उन्होंने कहा, 'राजा से कभी झूठ मत बोलो।

पैसे खत्म हो गए थे इसलिए किशन सीधे घर की ओर चल पड़ा। रास्ते में एक गांव पड़ता था। उसने देखा, वहां भीड़ लगी हुई है, लोग आपस में बहस कर रहे हैं। खाट पर एक मृत व्यक्ति पड़ा है। किशन को देख कर वे सभी उससे कहने लगे, 'भाई, इसे शमशान तक पहुंचा दो और अंतिम संस्कार कर दो। इसका अपना कोई नहीं है और यह भिखारी था।

किशन को पहली बात याद आ गई। वह खाट सहित मरे आदमी को सिर पर उठा कर ले गया। श्मशान पहुंच कर उसने देखा कि मैली-कुचैली चादर के नीचे ढेर सारे रूपए बिछे हैं। वह उन्हें ले कर अपने गांव चला गया।

पत्नी के इतने पैसों के बारे में पूछने पर किशन को दूसरी बात याद आ गई और उसने यह कह कर बात टाल दी, 'तुम्हें इससे क्या? बस कमा लिए।

किशन ने उन रूपयों से एक छोटी सी पान की दुकान खोल ली। दुकान चल निकली और उसकी खूब आमदनी होने लगी। लोग सोचने लगे कि आखिर अचानक किशन को इतने रूपए कहां से मिल गए। सभी उससे किसी न किसी बहाने रूपए के बारे में जानना चाहते थे। हार कर किशन ने सभी से कहा, 'आधी रात को जाने पर बरगद वाला भूत रूपए देता है, जा सकते हो तो जाओ।

सभी समझ गए कि किशन झूठ बोल रहा है। गांव वालों ने किशन की शिकायत राजा से कर दी। राजा के सामने जाने पर किशन को चौथी बात याद आ गई। उसने सारी बात साफ-साफ बता दी। उसकी सच्चाई से राजा बहुत प्रभावित हुआ। उसने किशन को अपना दरबारी बना लिया। महात्मा जी के आशीर्वाद से किशन की जिंदगी बदल गई।

- नरेंद्र देवांगन

Share it
Top