बाल कथा: बिल्ली का बच्चा

बाल कथा: बिल्ली का बच्चा

बिल्ली का बच्चा म्याऊं.........म्याऊं...... कर रहा था। वह भूखा था। वह अपनी मां को ढूंढऩे की कोशिश कर रहा था लेकिन वह सड़क पर नहीं जाना चाहता था क्योंकि उसे कुत्तों और कौओं से डर लगता था। वह एक झाड़ी के नीचे बैठा म्याऊं......म्याऊं कर रहा था।

पास में ही एक मुर्गी बड़ी शान से मिट्टी में से छोटे-छोटे कीड़ों को चुन-चुन कर खा रही थी। अचानक उसे म्याऊं....म्याऊं.... की आवाज सुनाई पड़ी तो चौंक उठी। मुर्गी ने इधर-उधर गर्दन घुमाई तो पास की एक झाड़ी के नीचे उसे बिल्ली का बच्चा दिखाई दिखा।

मुर्गी उसके पास गई। मुर्गी को देख कर बिल्ली का बच्चा चुप हो गया। मुर्गी ने थोड़ा झुकते हुए उससे पूछा, 'अरे, तुम रो क्यों रहे हो? क्या तुम भूखे हो?'

'म्याऊं.......म्याऊं.....।' बिल्ली के बच्चे ने जवाब दिया।

'ठीक है, मेरे साथ आओ।' उसने कहा, 'मैं तुम्हें गाय के पास ले चलती हूं। वह तुम्हें दूध दे देगी। मैं जानती हूं कि तुम मेरी तरह कीड़े नहीं खा सकते।'

बिल्ली का बच्चा दूध का नाम सुन कर बहुत खुश हुआ। फिर वह जोर-जोर से म्याऊं...म्याऊं..... करने लगा। मुर्गी ने उसे पुचकारा और तेजी से पास ही के एक बाड़े की ओर चलने लगी। बिल्ली का बच्चा उसके पीछे-पीछे था। बाड़े में एक गाय बंधी थी। वह घास खा रही थी।

'गाय।' उसने कहा, 'मैं तुम्हारी मदद चाहती हूं।'

गाय ने पीछे मुड़ कर मुर्गी और बिल्ली के बच्चे को आश्चर्य से देखा। गाय को घूरता देख बिल्ली का बच्चा डर गया। वह भाग कर मुर्गी के पीछे हो गया।

'कहो, मुर्गी?' गाय ने पूछा, 'मैं तुम्हारी क्या मदद कर सकती हूं?'

'यह बिल्ली का बच्चा बहुत भूखा है।' मुर्गी बोली, 'क्या तुम इसे थोड़ा सा दूध दे सकती हो?'

गाय ने हंस कर कहा, 'मुझे अफसोस है मुर्गी, जब तक मेरा दूध दुहा न जाए, मैं दूध नहीं दे सकती। इसलिए मालकिन के पास जा कर कहो। वह इस बिल्ली के बच्चे के लिए जरूर दूध दुह देगी।'

मुर्गी समझ गई लेकिन बेचारा बिल्ली का बच्चा कुछ नहीं समझ सका। बहुत भूखा होने के कारण वह म्याऊं...........म्याऊं.....करने लगा। मुर्गी तेजी से घर की रसोई की ओर चल दी। उसके पीछे-पीछे बिल्ली का बच्चा भी चल दिया।

घर की मालकिन रसोई में काम कर रही थी। मुर्गी दरवाजे पर खड़ी हो कर मालकिन का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए अजीबोगरीब आवाज निकालने लगी।

'अरे, मोटी मुर्गी।' वह चिल्लाई, 'क्या तुम अब भी भूखी हो? कीड़े-मकोड़े खा कर तुम्हारा पेट नहीं भरा? तुम कुछ दाने चाहती हो क्या?' कह कर उसने मुटठी भर दाने आंगन में फेंक दिए।

मुर्गी निराश हो गई लेकिन वह फिर भी उसी तरह की आवाज निकालती रही। मालकिन चिढ़ गई। वह मुर्गी को भगाने के लिए मुड़ी कि बिल्ली के खूबसूरत बच्चे को देख कर हैरान रह गई। फिर मालकिन रसोई से बाहर निकली और बिल्ली के बच्चे को उठा लिया।

'अरे, तुम?' महिला ने खुश होते हुए कहा, 'भूखे लगते हो? अब म्याऊं....म्याऊं...... बंद करो।' फिर वह उसे रसोई में ले गई और एक छोटी सी प्लेट में दूध डाल कर उसने प्लेट बिल्ली के बच्चे के सामने रख दी।

बिल्ली का बच्चा दूध की प्लेट पर झपटा और दूध पीने लगा। महिला हंस पड़ी। मुर्गी खुशी के मारे जोर से आवाज करती हुई पूरे आंगन में घूमने लगी। गाय भी बहुत खुश हुई। वह अपना सिर उठा कर बां.....बां......करने लगी।

- नरेंद्र देवांगन

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