बाल कथा: आदमी और जानवर

बाल कथा: आदमी और जानवर

एक शेर के तीन बच्चे थे। उन्हें अपने पापा की ताकत पर बहुत गर्व था। वे तीनों जब अपने मम्मी-पापा के साथ जंगल में घूमते, सारा जंगल डर से कांप उठता। पशु इधर-उधर अपनी जान बचाने के लिए भागने लगते। पक्षी शोर करते हुए पेड़ों से उडऩे लगते। शेर के बच्चे जब अपनी आंखों से यह सब देखते तो गर्व से उनका सीना फूल उठता। वे सोचने लगते, सचमुच ही संसार में उनके पापा से ज्यादा ताकतवर कोई नहीं है। शेर के तीनों बच्चों में से एक बच्चा बहुत चतुर था। उसकी समझ में यह बात नहीं आती थी कि वास्तव में उसके पापा ही संसार में सबसे अधिक ताकतवर कैसे हैं? ज्यादा दिनों तक वह अपने मन में यह बात छिपाकर न रख सका।

एक दिन उसने अपनी परेशानी मम्मी शेरनी के सामने रखी। शेरनी न बेटे का दिल तोडऩा चाहती थी, न ही बच्चों के पापा को किसी प्रकार अपमानित करना चाहती थी। उसने अपने बेटे की पीठ पर हाथ फिराकर कहा, 'हां, बेटा, तुम्हारे पापा से अधिक ताकतवर और कोई नहीं है।' शेर का बच्चा अपनी मम्मी के उत्तर से संतुष्ट नहीं हो सका। वह समझ गया कि मम्मी ने उसका मन रखने के लिए ही उसे यह कहकर टाल दिया है। वह अपनी धुन का पक्का था। उसे सही उत्तर चाहिए था। इसलिए उसने सोचा कि मम्मी से काम नहीं चला तो अब पापा से पूछना चाहिए। शेर का बच्चा अपने पापा के साथ एक नदी पर पानी पीने जा रहा था। तभी रास्ते में उसने अपने पापा के सामने वही प्रश्न रखा। शेर चलता-चलता रूक गया। उसने अपनी चमकदार आंखों से अपने बच्चे की ओर देखा। बच्चे की आंखों में वही सहज भावना थी। यह देख, शेर गहराई में डूब गया। फिर कुछ क्षण बाद गंभीर स्वर में बोला, 'हां, बेटा, मुझसे भी अधिक शक्तिशाली इस संसार में कोई है।' 'वह कौन है, पापा?' बच्चे ने पूछा।'आदमी।' उत्तर सुनकर शेर का बच्चा हैरान रह गया। 'वह कैसे, पापा?' बच्चे ने आश्चर्य से पूछा। 'हां, बेटा, आदमी मुझसे भी अधिक शक्तिशाली होता है क्योंकि उसमें बुद्धि होती है।' शेर ने बताया। बात आई-गई हो गई। दिन बीतते गए, लेकिन शेर के बच्चे के मन में एक इच्छा थी। वह आदमी से भेंट करके उसकी बुद्धि की परीक्षा लेना चाहता था। आखिर उसकी यह इच्छा भी पूरी हुई। अचानक एक दिन घूमते-फिरते शेर का बच्चा नदी के किनारे आया। वहां एक पत्थर पर आदमी बैठा था। शेेर का बच्चा छिपकर, पेड़ों की आड़ में होता हुआ एकदम उसके सामने जाकर खड़ा हो गया। उसे देखकर आदमी के होश उड़ गए। उसके पास तो कोई हथियार भी नहीं था कि अपनी जान बचा सके। आदमी ने समझा, आज मौत आ पहुंची। तभी शेर के बच्चे में गरजकर कहा, 'पापा का कहना है कि तुम उनसे अधिक शक्तिशाली हो क्योंकि तुम में बुद्धि है। क्या तुम इस समय अपनी बुद्धि का प्रदर्शन कर सकते हो? आदमी के पास चुनौती स्वीकार करने के सिवा और कोई चारा ना था, उसने धीरे से कहा, 'हां।' 'कैसे?' शेर के बच्चे ने उसे घूरा। इस बाद आदमी फिर सोच में पड़ा, लेकिन आखिर वह आदमी था। उसे ध्यान आया कि उसके झोले में लोटा-डोर रखी हैं। उसने डोर को निकाल लिया और उसे दोहरा-तिहरा कर लिया। फिर वह मुस्कुराकर शेर के बच्चे से बोला, 'इधर आगे आओ।' शेर का बच्चा अनजान सा सब देख रहा था। उस नादान की समझ में ही नहीं आ रहा था कि यह हो क्या रहा है? आदमी के कहने पर वह थोड़ा आगे बढ़ा। आदमी ने कहा, 'गर्दन झुकाओ।'

शेर के बच्चे ने गर्दन झुका दी। आदमी ने रस्सी का फंदा उसके गले में डालकर उसे एक पेड़ से बांध दिया। फिर कुछ दूर हटकर पूछा, 'अब आया समझ में कि कैसे आदमी शेर से अधिक शक्तिशाली होता है?' शेर का बच्चा, जानवर का बच्चा था। उसकी समझ में यह बात आसानी से आ जाती, तो वह गले में फंदा डलवाता ही क्यों? उसने गर्दन हिलाकर आदमी को उत्तर दिया कि अभी उसकी समझ में कुछ नहीं आया। आदमी खुलकर हंस पड़ा। फिर बोला, 'अरे, मूर्ख मुझ निहत्थे ने तुझे एक पेड़ से बांध दिया। अब मैं तेरा, जो चाहे कर सकता हूं। बता, है न तू मूर्ख? 'शेर के बच्चे की गर्दन आदमी के आगे झुक गई। आदमी ने उसे खोलकर कहा, 'कोई बड़ा शेर होता, तो उसे गोली से उड़वा देता। अभी तू बच्चा है और तेरे खेलने-खाने के दिन हैं, इसलिए छोड़ देता हूं। एक बात का ध्यान रखना कि आदमी का सामना आदमी ही कर सकता है, जानवर नहीं।'

- नरेंद्र देवांगन

Share it
Top