बाल कथा: मनुष्य से दूर जा रहा है हाथी

बाल कथा: मनुष्य से दूर जा रहा है हाथी

यह सच है कि हाथी आने वाले भूकम्प का अनुमान पहले से ही लगा लेता है और अपनी भाषा में इसकी सूचना देने का प्रयास भी करता है परन्तु यह भाषा हर किसी की समझ से परे है। भारतीय (एशियाई) हाथी में सिर्फ नर के ही दांत होते हैं जबकि अफ्रीकी हाथी में नर व मादा दोनों के ही दांत होते हैं। अपने जीवन काल में करीब 24 दांत धारण करने वाला हाथी आवश्यकता पडऩे पर छह सौ किलोमीटर से अधिक लम्बी यात्रा तय कर लेता है।

हाथियों की देखने की क्षमता बहुत कम लेकिन सूंघने व सुनने की क्षमता बहुत अधिक है। छोटे कीड़े व चींटी हाथी को तभी नुकसान पहुंचा सकते हैं जब वह आराम की मुद्रा में हो।

पहले सिर्फ भारत में ही हाथी की सात जातियां मौजूद थी। जबसे मानव की क्रूर निगाहें हाथीदांत पर गढ़ी, तब से सिर्फ दो जातियां एशियाई हाथी एलिफस मैस्किमस व अफ्रीकी हाथी लैक्सोडांटा अफ्रीका ही मौजूद हैं। एशियाई हाथी भारत के अतिरिक्त बांग्लादेश, श्रीलंका, बर्मा, थाईलैण्ड, कम्बोडिया, वियतनाम, दक्षिणी चीन, लाओस, मलाया, बोर्नियो और सुमात्र में भी मिलते हैं। जंगली हाथी नियमित रूप से प्रवास यात्रा करते हैं। इनकी यात्रा का कारण भी प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियां, भोजन और पानी की कमी व प्रजनन स्थल की खोज है।

इनमें सबसे चौंकाने वाली व अधिक आश्चर्यजनक बात तो यह है कि हाथी आने वाले भूकम्प का अनुमान पहले से ही लगा लेता है और वह इसकी सूचना अपनी भाषा में देने की कोशिश करता है। आज जरूरत उसकी भाषा को समझने व महसूस करने की है जिससे हमें प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में मदद मिले।

ऊपरी जबड़े के दूसरे जोड़े के इनसीजर ही हाथी के बाहरी दांत टस्क हैं। नरों में दो हाथी दांत वाले को 'टस्कर' एक दांत वाले को 'गणेश' व बिना दांत वाले नर को 'मखनाÓ कहा जाता है। हाथी की एक विशेषता यह है कि हाथी अधिकांशत: सुबह भोर के समय ही भोजन ग्रहण करता है। दिन में धूप के कारण घने जंगलों में आराम करता है तथा शाम को घने जंगलों से निकलकर खुले मैदान में विचरण पंसद करता है। एश्यिाई हाथी के अगले पैरों में ज्यादातर पांच नाखून होते हैं जबकि पिछले पैरों में तीन या चार ही नाखून होते हैं।

हाथी अधिकतर बांस के पेड़ खाता है। वैसे बेल, बेर, बरगद, पीपल, खैर, गूलर, महुआ का भी कभी-कभी चटखारा ले लेता है। आराम करने के लिहाज से हाथी को बड़ के पेड़ की छाया पसंद है। हाथियों पर हुए शोध में पाया गया है कि विगत कुछ वर्षों से हाथियों और मनुष्य के बीच का समन्वय टूटा है। यही कारण है कि मानव को देखते ही हाथी क्रोधित हो उठता है।

सड़क पर आकर बसों ट्रकों को रोकना, लोगों के खेत उजाडऩा और उनकी जाने लेना आज हाथियों के लिए आम है, जो हाथियों व मानव के बीच के समन्वय के टूटने की पुष्टि करता है।

- संजीव चौधरी गोल्डी

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