मत घबराइये परीक्षाओं से

मत घबराइये परीक्षाओं से

परीक्षा के दिन भी क्या दिन होते हैं। विद्यार्थी के लिए यह कठिन समय होता है। न खाने की चिन्ता रहती है, न शरीर का ध्यान। बस मन में एक ही भय समाया रहता है-परीक्षा का। चाहे गरीब विद्यार्थी हो या अमीर, कमजोर हो अथवा कक्षा में सदैव प्रथम आने वाला, सभी अपने आस पास रंग बिरंगी किताबें फैलाए उन्हीं में खोए रहते हैं और सभी का उद्देश्य यही होता है कि किसी न किसी प्रकार परीक्षा में उतीर्ण हो जाएं जिससे उन का एक वर्ष नष्ट होने से बच जाए। कई छात्र-छात्रओं को इन दिनों एक्जामिनेशन फीवर भी हो जाता है।

एक सर्वेक्षण के अनुसार अधिकतर प्रान्तों में शिक्षा का स्तर गिरा है और परीक्षा में छात्रों द्वारा प्राप्त प्राप्तांकों में गिरावट आई है। अक्सर देखने में आता है कि विद्यार्थी रात-दिन मेहनत करके या तो 'रॉयल' डिवीजन प्राप्त कर लेते हैं या फिर अनुत्तीर्ण होकर उसी कक्षा की शोभा बढ़ाते हैं। अंतत: शिक्षकों ने भी एक तरीका अपना लिया है कि छात्रों को धक्का देकर आगे बढ़ाते जाओ, चाहे उनकी शिक्षा का स्तर कैसा भी चल रहा हो। कोई सिरदर्दी लेने को तैयार नहीं होता। परिणामस्वरूप छात्रों की योग्यता का आकलन मैट्रिक अथवा सीनियर सैकण्ड्री/इन्टर आदि में ही हो पाता है। मैं यहां बुद्धिमान और कर्मठ छात्रों की बात नहीं कर रहा हूं बल्कि विचार का विषय तो साधारण छात्र हैं। प्राय: देखा गया है कि एक ही कमरे में एक ही परीक्षा देने वाले छात्रों में से एक 'रॉयल' और दूसरा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होता है। इसका कारण यह होता है कि विद्यार्थी परीक्षा की उस अध्ययन और लेखन पद्धति से भिज्ञ नहीं होता जो विद्यार्थी को कामयाबी की राह दिखा सकती है और जो परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण होती है।

परीक्षा एक कला है और सभी विद्यार्थियों का उसमें उत्तीर्ण होना आवश्यक होता है। यह जरूरी नहीं कि आप रात-दिन पढ़ें। बेशक आप कम पढ़ें किन्तु उसे अच्छी तरह समझें तो आपके हित में होगा। खासकर आपको प्रश्न समझने की शक्ति तथा उसे प्रस्तुत करने का ढंग आना चाहिए। इसके अतिरिक्त परीक्षा में असफल होने के अन्य कई कारण होते हैं।

अध्ययन की एकाग्रता किसी भी विद्यार्थी की सफलता की कुंजी है। एकाग्रता के अभाव में पढ़ते रहना व्यर्थ होता है। अधिकांश विद्यार्थी साल भर नहीं पढ़ते। वर्ष के आरम्भ में ही वे मौज उड़ाने के लिए कक्षाएं छोड़कर भागना कहने से तो उनका अपमान होगा, फिल्में देखने या फिर रंगारंग कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लग जाते हैं। कुछेक पार्टी पोलिटिक्स में पड़ जाते हैं।

होस्टल में रहने वाले कई विद्यार्थी खराब साथी मिल जाने से शराब, जुआ तथा वेश्यावृत्ति जैसे हथकंडे सीख लेते हैं। जब परीक्षाएं सिर पर आ जाती हैं तो वे रात दिन पढ़ाई में जुट जाते हैं। इससे वे अच्छे नोट्स को भी बिना सोचे समझे पढ़कर रट लेते हैं। इस तोता रटंत के कारण वे उसे भूल भी जाते हैं। इसके अलावा भी वे रात को अधिक देर तक पढ़ते हैं जिससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।

मुद्दों के क्रमानुसार लेखन का दूसरा नाम ही परीक्षा है। मौखिक परीक्षा में जहां बोलने का ढंग देखा जाता है, वहीं सैद्धान्तिक परीक्षा में लिखने का ढंग और तथ्यों का प्रस्तुतीकरण देखा जाता है। याद रखिए, परीक्षक यह नहीं देखता कि आपने कितना बड़ा उत्तर लिखा है। आप उस समय परीक्षक के सामने नहीं होते बल्कि आपकी उत्तर पुस्तिका ही उसके सामने होती है और वही आपकी योग्यता का प्रमाण प्रस्तुत करती है।

उत्तर की लम्बाई के बजाय इस बात से आपकी बुद्धि की परीक्षा होती है कि आप प्रश्न का उत्तर किस प्रकार प्रस्तुत करते हैं। दूसरे शब्दों में आप प्रश्न की आत्मा को कहां तक पहचानते हैं। इस प्रकार आपके उत्तर के प्रथम अनुच्छेद को पढ़कर ही परीक्षक आपकी प्रस्तुतीकरण क्षमता से पूरे उत्तर की नब्ज पहचान लेता है।

बहुत से विद्यार्थी खूब उत्तर पुस्तिकाएं भरने में विश्वास करते हैं। वे प्रश्नों को अच्छी तरह से पढ़े और समझे बगैर ही उत्तर लिखना शुरू कर देते हैं जिसका न कोई सिर होता है और न पैर। उसे पढ़कर परीक्षक का झल्लाना स्वाभाविक ही है और वह आपको कम अंक देता है तथा विद्यार्थी परीक्षक पर दोषारोपण करते हैं। परीक्षा के दिनों में कुछ बातों का ध्यान रखिए। सफलता निश्चित रूप से आपके कदम चूमेगी।

(1) रात को देर तक न पढ़ें। (2) सुबह जल्दी उठकर, संभव हो तो चार साढ़े चार बजे, पढ़ाई करनी चाहिए। (3) यह भी ध्यान रखें कि इन दिनों इधर-उधर की यानी उपन्यास या कॉमिक्स आदि पुस्तकें न पढ़ें। (4) केवल अपने कोर्स की पुस्तकें पढ़ें। (5) खाली समय में भी पुस्तकों में दिये गए प्रश्नों के उत्तरों पर विचार करने की कोशिश करें। (6) पुस्तक की सहायता के बिना ही नोट्स तैयार करने का प्रयास करें। (7) परीक्षा हॉल में बिना किसी डर के बैठें और पूरे तारतम्य से एकाग्रचित होकर उत्तर लिखें।

इस प्रकार यदि विद्यार्थी पूरी तैयारी और सोच समझ के साथ परीक्षा दे तो कोई शक नहीं कि आप निश्चित रूप से उत्तीर्ण होंगे और आपका भविष्य सुधरेगा।

-शेख रईस अहमद

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