जानकारी/बाल जगत: क्रांतियां जिन्होंने बदल दी जीवन शैली

जानकारी/बाल जगत: क्रांतियां जिन्होंने बदल दी जीवन शैली

दस पंद्रह वर्ष पूर्व और आज की जीवनशैली में इतना अंतर है जिसका अंदाजा शायद किसी ने नहीं सोचा होगा। कितनी भागदौड़ है जीवन में। जितनी भागदौड़ है, उतनी ही सुविधाएं भी हैं, तब भी सबके चेहरे तनावग्रस्त ही रहते हैं क्योंकि सब दूसरे से आगे बढऩा चाहते हैं और स्वयं को अधिक बुद्धिमान साबित करना चाहते हैं। इस होड़ ने सब सुविधाएं होते हुए भी चारों तरफ तनावग्रस्त वातावरण बनाया हुआ है।

जीवनशैली में इतने बड़े बदलाव का कारण है कुछ ऐसे बड़े तत्वों की भूमिका जिन्होंने हमारे रहन-सहन को बदल दिया है। पहले बैंकों में काम का सिस्टम, आफिस की कार्यशैली, एयर रेलवे रिजर्वेशन, शापिंग, एडमिशन फार्म आदि काम के तरीके बिलकुल अलग थे पर अब ग्लोबलाइजेशन और विज्ञान तकनीक की तरक्की के कारण सभी क्षेत्रों में काम करने के तरीकों में जबदरस्त बदलाव आया है।

इस बदलाव का स्पष्ट प्रभाव जीवन के हर पहलू और क्षेत्र में आया है जैसे खान-पान, रहन-सहन, कामकाज का तरीका, सोचने का तरीका आदि। इस बदलाव का सभी तरह के लोगों ने स्वागत किया है, किसी ने खुशी से तो किसी ने परिस्थितिवश और किसी ने मजबूरीवश क्योंकि कोई भी आज की दौड़ में पिछडऩा नहीं चाहता।

आइए देखें कौन सी ऐसी विशेष क्रांतियां हैं जिनके कारण हम सबमें बदलाव आया है।

इंटरनेट क्रांति:- इंटरनेट के कारण लोग कितने पास आ गए हैं जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। इंटरनेट ने समय और दूरी की सीमाएं तोड़ दी हैं। बिजली के बिल, रिजर्वेशन चाहे रेलवे की हो, एयर की हो या होटल की, एल आई सी प्रीमियम बिना लाइन में खड़े कर सकते हैं। बैंकिंग सिस्टम भी आप इसके द्वारा कंट्रोल कर सकते हैं। स्कूल, कालेज के फार्म, रिजल्ट सभी कुछ आप घर बैठकर इंटरनेट पर देख सकते हैं।

अब तो इंटरनेट का प्रयोग युवा पीढ़ी के साथ अधेड़ लोग और बुजुर्ग भी आसानी से कर लेते हैं। इंटरनेट के माध्यम से आप दूर बैठे लोगों के साथ संवाद कायम कर सकते हैं। आरकुट और फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स के माध्यम से आप अपने पुराने मित्रों से संबंधियों से संपर्क कर संवाद कर सकते हैं।

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मोबाइल क्रांति:- जब मोबाइल नए नए आए थे तो इतने महंगे थे कि कुछ गिने चुने रईस लोगों के पास ही थे। इतने महंगे होने के कारण लोग अपना मोबाइल नंबर बहुत कम लोगों को बताते थे क्योंकि उस समय इनकमिंग कॉल पर भी पैसे लगते थे। पिछले एक दशक में मोबाइल सर्वसुलभ हैं और आजकल घर में काम करने वाली नौकरानी के पास भी मोबाइल उपलब्ध हैं। मोबाइल में एस. एम. एस. सुविधा के कारण युवाओं में इसकी लोकप्रियता और बढ़ गई है। जो बात आप फोन पर या सामने कहते हुए सकुचाते हैं वही बात बिना हिचक के आप एस एम एस द्वारा आसानी से कर सकते हैं।

मोबाइल विद कैमरा और एफ एम तो इतना लोकप्रिय है कि काम करते हुए और यात्र करते हुए आप अपना दिल बहला सकते हैं और घूमते समय जो दृश्य पसंद आए, उसे अपने मोबाइल में कैद कर सकते हैं। आजकल थ्री जी मोबाइल का प्रचलन बढ़ रहा है जो कंप्यूटर का भी काम कर लेता है। मोबाइल के साथ टेलीफोन डायरेक्टरी या डायरी की आवश्यकता नहीं है। सभी महत्त्वपूर्ण नंबर उसमें सेव होते हैं। अलार्म घड़ी की सुविधा भी उसी से पूरी हो जाती है।

कंप्यूटर क्रांति:- डेढ़-दो दशक पहले तक कंप्यूटर के नाम से लोग डरते थे। पता नहीं इसे हैंडल करना कितना मुश्किल काम है। आज बचपन से ही बच्चे इसे चलाने लगते हैं चाहे वो कंप्यूटर गेम ही क्यों न खेलें। अब तो स्कूल में भी प्रारंभ से ही कंप्यूटर पर पेंट ब्रश बच्चों को सिखाया जाता है। पहले तो ऑफिस में एक ही कंप्यूटर होता था जिसे विशेषज्ञ ही प्रयोग कर सकते थे। अब कई कार्यालयों में हर कर्मचारी कंप्यूटर पर ही काम करते हैं। क्लर्ड स्क्रीन, टी एफ टी मॉनिटर कई सॉफ्टवेयर से लैस कंप्यूटर आज की जरूरत बनती जा रही है। लैप टॉप और पॉम टॉप कंप्यूटर्स ने तो इसे सुविधाजनक, कहीं भी ले जाना और प्रयोग करना इतना आसान बना दिया है कि लोग यात्र में इसे आसानी से अपने साथ रखते हैं। घर बैठे कंप्यूटर पर आप अपने ऑफिस का काम निबटा सकते हैं। अपने महत्त्वपूर्ण डाक्यूमेंट उसमें सेव कर सकते हैं।

अपार्टमेंट क्रांति:- महानगरों में अपार्टमेंट संस्कृति तो पूरी तरह से फैल चुकी है। अब तो छोटे नगरों में भी अपार्टमेंट संस्कृति पैर फैलाती जा रही है क्योंकि जगह की कमी को इसी आधार पर ही पूरा किया जा सकता है। अपार्टमेंट संस्कृति ने लोगों में सिविक सेंस बढ़ा दी है, देश के सभी राज्यों के लोगों को नजदीक ला दिया है और धार्मिक और सामाजिक समारोह में लोगों की दिलचस्पी बढ़ा दी है पर दूसरी तरफ अपार्टमेंट संस्कृति ने संयुक्त परिवारों को अलग कर दिया है क्योंकि रोजगार के कारण लोग महानगरों की तरफ भागते हैं।

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जिम क्रांति:- लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आई है। अब लोग अपने खान-पान के साथ व्यायाम को भी महत्व देते हैं। पहले तो लोग व्यायाम के नाम पर सैर करते थे, दौड़ते थे, व्यायामशाला जाते थे, तैराकी करते थे या कोई खेल खेलते थे। आधुनिक समय में लोगों के पास समय की कमी है अत: अब वे जिम जाकर ही एअरकंडीशंड वातावरण में व्यायाम करना पसंद करते हैं। पहले तो उच्च स्तर के लोग ही जिम जाया करते थे। अब तो छोटी छोटी कालोनियों में जिम हैं और लोग वहां जाकर वर्कआऊट करना पसंद करते हैं। महिलाएं भी हेल्थक्लब और जिम जाकर अपना फिगर बनाए रखती हैं।

इसके अलावा बैंकों ने ईएम आई (इक्वेटेड मंथली इंस्टालमेंट) द्वारा मध्यम वर्गीय लोगों को भी घर खरीदने, घर की सुविधा के लिए बड़े सामान खरीदने और कार खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया है जिससे वे भी आरामदायक जीवन व्यतीत कर सकें और स्वयं को इस दौड़ में पिछड़ा महसूस न करें।

शापिंग माल्स द्वारा भी जीवन शैली में बदलाव आया है। बड़े-बड़े शापिंग कांपलेक्स में लोग परिवार के साथ जरूरत का हर सामान खरीद सकते हैं। कपड़े, ज्वैलरी, देसी-विदेशी बड़े ब्रांड की चीजें, इलैक्ट्रॉनिक गुड्स खरीद सकते हैं।

शापिंग मॉल्स में खरीदारी के साथ खाने के लिए फूड कोर्ट्स हैं जहां अपनी पसंद के स्नैक्स, लंच, डिनर व ड्रिंक्स ले सकते हैं। बड़े शहरों में शापिंग माल्स जीवनशैली का महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन सभी क्रांतियों ने मिलकर भारतवासियों के रहन सहन को ही बदल दिया है।

- नीतू गुप्ता

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