विकसित करें बच्चों का शैक्षिक माहौल

विकसित करें बच्चों का शैक्षिक माहौल

यह एक तथ्य है कि जो बच्चा शुरूआती दौर में पढ़ाई-लिखाई में तेज होता है, वही आमतौर पर आगे चलकर शैक्षिक जीवन में अच्छा प्रदर्शन करता है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब बच्चे के अध्ययन की नींव मजबूत हो जाती है, तब उसे आगे की पढ़ाई-लिखाई में कोई दिक्कत महसूस नहीं होती।

बच्चों के शैक्षिक विकास की दृष्टि से उनके बचपन के दिनों खासकर जन्म से लेकर आठ साल तक का समय काफी महत्त्वपूर्ण होता है। इसे ध्यान रखना आवश्यक है कि पठन-पाठन की प्रक्रिया के बगैर बच्चा किसी भी विषय का ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता। बच्चों का बेहतर रूप से शैक्षिक विकास तभी संभव है, जब अभिभावक अपनी संतानों के लिए घर पर भी शैक्षिक माहौल विकसित करें।

बच्चे के शैक्षिक विकास की प्रक्रिया प्राथमिक कक्षा में औपचारिक रूप से अध्ययन प्रारम्भ करने से पहले ही प्रारम्भ हो जाती है। पढ़ाई-लिखने से संबंधित बुनियादी बातों की जानकारी दे दी जानी चाहिए। अभिभावक बच्चों के साथ समय दें तथा उन्हें श्रवणकुमार, धु्रव आदि से संबंधित रोचक जानकारियों को देखकर उनका मनोरंजन-सह शिक्षा का माहौल तैयार करें।

अभिभावकों का यह दायित्व है कि वे अपने बच्चों के साथ संवाद स्थापित करें ताकि उन्हें प्रश्न करने की शैली एवं जिज्ञासा को शान्त करने की प्रणाली का ज्ञान हो सके। बच्चों को मानसिक स्तर के अनुरूप प्रतिदिन घटित होने वाली घटनाओं से भी परिचय कराया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त बच्चों को प्रतिदिन एक निश्चित समय पर पढ़ाई करने के लिए भी प्रेरित किया जाना चाहिए।

रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

आज के समय में अधिकांश बच्चों का मन पढऩे-लिखने से उचट रहा है। अभिभावकों द्वारा दबाव बनाये जाने के बाद ही वे पढऩे के लिए बैठते हैं। ऐसा क्यों हो रहा है? इस का जवाब तलाशना आवश्यक है। टेलीविजन, कम्प्यूटर, वीडियो गेम्स आदि के बढ़ते प्रभावों के कारण ही बच्चों का मन पढ़ाई से उचटने लगा है। बच्चों को समझाया जाना चाहिए कि वे एक निश्चित समय तक ही उनका उपयोग करें। खेलने के समय पर खेलें तथा पढऩे के समय पर पढ़ें। बच्चों में पढऩे की अच्छी प्रवृत्ति विकसित करने के लिए अभिभावक को स्वयं ही 'रोल मॉडल' के रूप में विकसित करना चाहिए।

बच्चों के समक्ष अभिभावक को स्वयं पढऩा चाहिए। आपको पढ़ता हुआ देखकर वे भी पढऩे के लिए उत्साहित होंगे और इसका अच्छा प्रभाव उन पर पड़ेगा। पढ़ाई के संदर्भ में बच्चों को डराना, धमकाना, मारना-पीटना आदि अच्छा नहीं होता है क्योंकि इससे बच्चे में उद्दण्डता बढ़ती है और उसकी बुद्धि कुण्ठित होती है।

बच्चा जिस भाषा को समझता है, उसी भाषा में उसे समझाया जाना चाहिए। बच्चे को मातृभाषा से अधिक लगाव होता है, इसलिए उसे सर्वप्रथम उसी भाषा की पुस्तकों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। जब एक भाषा में पढऩे की प्रवृत्ति विकसित होने लगे, तभी वह दूसरी भाषा को सीखकर आगे बढ़ सकता है।

बच्चे को दिनचर्या के प्रति समझाकर, उसके प्रति रूचि जागृत करने की परम्परा को विकसित करना आवश्यक होता है। समय पर उठना, समय पर सोना, समय पर खाना, समय पर शौचादि कर्मों को निबटाने की प्रेरणा प्रारम्भ से ही दी जानी चाहिए ताकि उसका स्वास्थ्य ठीक रहे। उत्तम स्वास्थ्य ही विकसित बुद्धि की कुंजी होती है। स्वास्थ्य, प्रसन्नता एवं अपनत्व की गंगोत्री से सराबोर होकर बच्चा निश्चित ही अपने शैक्षिक माहौल तैयार कर लेगा।

- आनंद कुमार अनंत

रॉयल बुलेटिन की नई एप प्ले स्टोर पर आ गयी है।royal bulletin news लिखे और नई app डाउनलोड करें

Share it
Top