नियंत्रित किया जा सकता है अति चंचल बच्चों को

नियंत्रित किया जा सकता है अति चंचल बच्चों को

बच्चों का नाम आते ही उनके मस्त, शैतानी भरे स्वभाव की तस्वीर आंखों के आगे घूमने लगती है। बच्चा अगर शरारत न करे, तब भी वह बुद्धु लगता है पर यदि जरूरत से अधिक शरारतें करे, तब भी मुसीबत लगती है।

हर बच्चा अपना अलग स्वभाव लिए होता है। कुछ चंचल तो कुछ चुपके से शैतानी करने वाले, कुछ खुल कर शरारतें करने वाले, कुछ बुद्धू और कुछ अत्यधिक चंचल होते हैं।

अत्यधिक चंचल बच्चे कुछ न कुछ मुश्किलें पैदा किए रहते हैं, मां-बाप के साथ, अपने बहन-भाइयों के साथ और अपने मित्रों के साथ। उन पर कभी-कभी तो काबू पाना भी मुश्किल हो जाता है। न तो वे टिककर पढऩा चाहते हैं, न खेलना, न खाना खाना और न ही अपनी वस्तुओं के प्रति जिम्मेवारी दिखाते हैं। इन बच्चों को हाईपरएक्टिव या 'ए. डी. एच. डी' श्रेणी में रखा जाता है।

ऐसे बच्चों की पहचान

- ऐसे बच्चे बोलते अधिक हैं और ख्याली पुलाव बना कर उन सपनों में रहते हैं।

- प्राय: एक जगह पर टिक कर नहीं बैठते।

- दूसरों की बातों और हरकतों पर ध्यान रखते हैं।

- ऐसे बच्चों को कुछ भी कहा जाए, उन पर प्रभाव नहीं होता। वे सुन कर अनसुना कर देते हैं।

- अपनी बात मनवाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं जैसे तोडफ़ोड़, मार पिटाई, गाली गलौज आदि।

- उन्हें बाहरी खान-पान और बाहरी वातावरण ही अच्छा लगता है।

- कोई बात पूरी सुने बिना ही उत्तर देते हैं और दूसरों की बातों में हस्तक्षेप करते हैं।

- स्कूल या घर में किसी काम पर पूरा ध्यान नहीं देते। पढ़ाई में प्राय: अधिक अच्छे नहीं होते।

- चुपचाप बैठना, खेलना या पढऩा उनकी फितरत में नहीं होता।

- किसी भी काम को पूरा न करना उनकी विशेष आदत होती है।

- यदि वे गु्रप में खेल रहे हैं तो उन्हें दूसरों को तंग करने में मज़ा आता है और अपनी बारी से पहले खेलना चाहते हैं।

- उनका अपने हाथ, पैर, आंख व जुबान पर नियंत्रण नहीं होता। बस इधर उधर नटखट बच्चे की तरह भागते रहते हैं और आसपास की चीजें गिराते चलते हैं।

- दोस्तों और बहन भाइयों को हमेशा 'बुली' करते रहते हैं।

क्या करें, क्या न करें

- ऐसे बच्चों में आत्म विश्वास जगाएं।

- ऐसे बच्चों को थोड़ा अधिक समय और प्यार दें।

- उन्हें गु्रप में खेलने के लिए प्रोत्साहित करें।

- अपने खिलौने और खाने पीने की चीज़ों को दूसरों के साथ 'शेयर' करना सिखाएं।

- ऐसे बच्चों के दिमाग को एकाग्र रखने के लिए 'बिल्डिंग मेकिंग ब्लॉक्स, डॉक्टरी सेट, वर्कशाप ब्लॉक्स, पेंटिंग, कलरिंग, कोलाज मेकिंग आदि कामों में व्यस्त रखें।

- लगातार अधिक समय तक एक ही काम में बच्चों को न लगाकर थोड़ा-थोड़ा ब्रेक भी दें।

- अध्यापक के साथ मिलकर उन्हें आगे बिठाने को कहें ताकि उन पर नजऱ रखी जा सके और जिम्मेदारी भरे काम उन्हें बताते रहें जिससे काम हो जाने पर वे गर्व महसूस करें।

- अच्छे काम के बाद उन्हें शाबाशी देना न भूलें।

- उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करें।

- शारीरिक व्यायाम के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

- संतुलित और पौष्टिक भोजन दें।

न करें:

- ऐसे बच्चों से अधिक अपेक्षा न रखें।

- ऐसे बच्चों की अन्य बच्चों से तुलना न करें।

- फास्टफूड, चॉकलेट, टॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स आदि अधिक खाने को न दें।

- बच्चों पर किसी भी प्रकार का अधिक दबाव न डालें।

- बच्चों को भूत-प्रेत की कहानियों से डराएं नहीं।

- नीतू गुप्ता

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