बाल जगत: आज की मां, मां नहीं, सुपर मॉम बन कर रहती है

बाल जगत: आज की मां, मां नहीं, सुपर मॉम बन कर रहती है

आधुनिक युग की मांएं बस मां का कर्तव्य ही नहीं निभाती, उसके साथ-साथ बच्चों के विकास हेतु हर पहलु पर उनका साथ निभाती हैं। गर्भकाल से लेकर उनके विकास, स्कूल, एक्स्ट्रा हॉबी क्लासेज, पौष्टिक आहार, स्पोर्टस पढ़ाई, करियर और उनके शौक का पूरा ध्यान रखती हैं। उनके साथ क्वालिटी टाइम बिताने के लिए पूरा ध्यान रखती हैं।

बदलती विचारधारा और जीवनशैली के साथ उन्होंने समझौता करना सीख लिया है ताकि उनका बच्चा आधुनिक दौड़ में पीछे न छूटने पाए। कामकाज के साथ साथ घर परिवार को कैसे संभालना है, अच्छी तरह से समझती हैं। घर पर रहने वाली मॉम भी घर की जिम्मेदारियों के साथ बाहर की सारी जिम्मेदारियों का बीड़ा खुशी से उठाती हैं।

कुशल प्रबंधक है आज की मॉम:-

इस प्रतियोगिता वाले युग में हर मां चाहती है उनका बच्चा हर क्षेत्र में अच्छा हो। इसके लिए वह इस तरह का तालमेल बैठाती है कि बच्चे पर विश्ेाष नजर रहे और घर भी इग्नोर न हो। मां दफ्तर अगर जाती है वहां से भी अपने घर और बच्चे पर पूरी नजर रखने का प्रयास करती है। प्रात: जल्दी उठकर बच्चों के लिए पौष्टिक नाश्ता, लंच और स्नैक्स तैयार कर उन्हें स्कूल भेजना, स्वयं आफिस भागना, फिर घर आकर उनके साथ खेलना, होमवर्क कराना, रात्रि में खाने की तैयारी और अगले दिन की तैयारी में लग जाती है। बच्चों के दिनभर के क्रियाकलापों की पूरी जानकारी भी रखती है। बच्चों के करियर की पूरी जानकारी रखना आदि सभी जगह संतुलन बना कर चलती है।

दोस्ती का हाथ बढ़ाती है मां:-

आजकल की मां बच्चे के साथ दोस्त बन कर रहती है, उनकी बात सुनती है, समय समय पर प्यार से जरूरी हिदायतें देती है, गलती होने पर डांटने के स्थान पर प्यार से समझाती है ताकि वह अपनी गलतियों को मां से छुपा न पाएं। मां इतनी नजदीक होती है कि अधिकतर बच्चे मां से हर बात शेयर करते हैं जिससे वह मां के साथ साथ उनकी हमराज भी बन जाती है। बात-बात में प्यार से बच्चों को उनकी सीमाएं बताना भी नहीं भूलती ताकि बच्चे भटकने न पाए।

बच्चों का कमरा भी सजाती है:-

आजकल की मांएं बच्चों से विचार विमर्श कर उनकी राय जानने का प्रयास करती हैं कि उनके कमरे को कैसे आधुनिक बनाया जाए। बच्चों की आयु अनुसार उनके इंटीरियर में बदलाव लाती रहती हैं ताकि उन्हें अपने कमरे में पढऩे, बैठने, सोने, छोटे हैं तो खिलौनों से खेलने में आनंद आए। कमरे की वाइट वाशिंग, उससे मैच करते परदे, बैडशीट्स का भी पूरा ध्यान रखती है।

बच्चों को देती हैं क्वालिटी टाइम:-

नौकरी करने वाली मांएं बच्चे को पूरा वक्त देने में असमर्थ होती हैं, फिर भी आफिस से फोन पर संपर्क बनाएं रखती है ताकि हर पल की जानकारी उन्हें मिलती रहे। छुट्टी के बाद और छुट्टी के दिन वह बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताती हैं। उनके साथ घूमना, अच्छे विषयों पर बातें करना, उनकी पसंद की शापिंग कराना, नए विषयों की जानकारी देना, उनके मित्रों के बारे में बात करना, स्कूल आदि के बारे में मस्ती करते हुए उनके साथ समय बिताती हैं।

नई तकनीकों से वाकिफ कराती हैं:-

बच्चों के प्रोजेक्ट और एडवांस जानकारियों के लिए बच्चों को कंप्यूटर फ्रैंडली बनाने में मदद करती हैं। बच्चों को ब्लाग्स पर लिखने के लिए प्रेरित करती हैं, ई-लर्निंग प्रोग्राम दिलवाती हैं। बच्चों को सोशल नेटवर्किंग, चैटिंग सीखाती हैं। दिमाग तेज करने वाले एजुकेशनल गेम्स से भी वाकिफ कराती है। इस तरह बच्चों को आधुनिक तकनीकों के लिए जागरूक करने में मदद कंरती है।

बच्चों के साथ अपनी फिटनेस का भी पूरा ध्यान रखती है:-

हर मां बच्चों और परिवार की फिटनेस पर विशेष ध्यान देती है पर सुपर मॉम परिवार के साथ अपनी फिटनेस पर भी उतना ही ध्यान देती है और समझती है कि अगर वह फिट है तभी परिवार को भी फिट रख पाएगी। अपने अच्छे व्यक्तित्व के लिए भी जागरूक रहती है। समय-समय पर पार्लर जाना, स्पा का आनंद लेना, डे्रस सेंस सुधारना, अपनी सुंदरता में वृद्धि लाना आदि। बच्चों को गर्व महसूस हो कि उनकी मां युवा और सुंदर है। अगर मां फिट रहती है तो बच्चे भी अपनी फिटनेस पर ध्यान देते हैं और बचपन से ही फिटनेस के लिए सजग रहते हैं। मां स्वस्थ रहने के साथ अपने पौष्टिक आहार का भी ध्यान रखती है।

कुकिंग में भी आज की मांएं ज्यादा स्मार्ट हैं:-

आधुनिक पढ़ी लिखी मां जानती है कि बच्चों के लिए जंक फूड अच्छा नहीं है इसलिए वह विभिन्न रेसीपीज पढ़कर कुछ नया बच्चों के लिए तैयार करती हैं जो पौष्टिक भी हो और स्वादिष्ट भी। उसका प्रयास होता है कि बच्चा चाव से उसके हाथ का भोजन खा सके।

बच्चों के करियर पर भी ध्यान देती हैं:-

आज की मांएं अंदर से स्वयं तो मजबूत रहती हैं और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए पूरा योगदान देती हैं। बच्चे को अगर दूर पढऩे के लिए भेजना पड़े तो आसानी से भेज देती हैं। किस क्षेत्र में बच्चा जाए तो भविष्य सुरक्षित रहेगा। इस बात पर भी खुले विचारों से बच्चे के साथ डिस्कस करती है।

- नीतू गुप्ता

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