बाल जगत/जानकारी: बच्चे के विकास के लिए विशेष है यह उम्र

बाल जगत/जानकारी: बच्चे के विकास के लिए विशेष है यह उम्र

बच्चे के पैदा होने से 3 साल की आयु विशेष होती है जिस पर बच्चे का सही विकास निर्भर करता है। इस आयु में बच्चे को पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है। यदि इस आयु में माता-पिता बच्चे के पौष्टिक तत्वों के लिए लापरवाह होते हैं तो उनका बच्चा कमजोर रहता है और बार-बार बीमार पड़ता है। अगर माता-पिता पूरा समय देकर बच्चे को पौष्टिक आहार देते रहेंगे तो बच्चे में खाने की हैल्दी हैबिट्स डिवलेप हो जाती हैं और बच्चा स्वस्थ, खुश मिजाज रहता है।

पैदा होने से छ: माह तक:-

इंडियन एकेडमी आफ पीडियाट्रिक और वल्र्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन के अनुसार इस आयु के बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार मां का दूध है। संभव हो तो बस बच्चे को मां का दूध ही मिले। मां के दूध में ऊर्जा और पौष्टिकता दोनों होती हैं। जो बच्चे को आगे चलकर स्वस्थ रखती है। बच्चे को यूरिन इंफेक्शन, अस्थमा और आंतों के रोगों से बचा कर रखती है। अगर छ: माह तक बच्चा बस मां का दूध ले रहा है तो उसे अलग से पानी देने की भी जरूरत नहीं। मां का दूध बच्चे के स्वास्थ्य के साथ-साथ मां की सेहत के लिए भी अच्छा होता है।

छ: माह से एक साल की उम्र तक:-

जब बच्चा छ: माह का हो जाता है तो उसे ब्रेस्ट फीडिंग के अलावा सेमी सालिड व सालिड देने की आवश्यकता होती है क्योंकि बच्चे की भूख बढऩी शुरू हो जाती है। छ: मास की उम्र से बच्चे को लिक्विड फूड चम्मच की सहायता से आसानी से निगलने वाला खिलाना चाहिए ताकि उसका पेट भर सके। 8 माह की उम्र के बच्चे को बिस्किट आदि हाथ में दें ताकि उसे गीला कर खा सके। 9 माह की आयु से बच्चे को खिचड़ी, दाल, सूजी की खीर, केला मैश किया हुआ अच्छे से पिसा हुआ दें।

एक साल तक पहुंचते पहुंचते बच्चे के दांत निकलने प्रारंभ हो जाते हैं उस समय उबले चावल हाथ से हल्का मैश कर, घी वाली रोटी के बहुत नन्हें टुकड़े हाथ से मैश कर सब्जी भी मैश कर उसे दे सकते हैं ताकि बच्चा भूखा न रहे क्योंकि उम्र के बढऩे के साथ-साथ बच्चे की शारीरिक सक्रियता बढ़ती है और उसे भूख भी लगती है।

एक वर्ष से तीन वर्ष की उम्र में:-

इस आयु में जो भी आप घर पर बनाते हैं, उसे थोड़ा थोड़ा उसकी प्लेट में छोटे आकार के टुकड़े करके दें। अगर बच्चा चम्मच से खुद खाना चाहे तो उसे खाने दें। कुछ गिराएगा, कुछ खायेगा बीच बीच में स्वयं भी उसके मुंह में डालें। बच्चे को अपने साथ बैठा कर वही खाना प्लेट में कम मात्रा में डाल कर दें ताकि उसे लगे कि मम्मी पापा यही खा रहे हैं तो मुझे भी यही खाना है।

बच्चा शुरू में नखरे करता है। यह मत सोचें कि खाता ही नहीं, उसे बार बार खाने को दें तो उसका स्वाद उसे पसंद आने लगेगा। थोड़ी मेहनत तो करनी पड़ेगी। बच्चों को खाने में सख्त चीजें न दें जैसे मूंगफली, सूखे मेवे, सख्त टाफी, कच्ची गाजर न दें। इससे बच्चे को खास पौष्टिकता नहीं मिलती। बस ऊर्जा मिलती है थोड़ा ही खाने दें। इसके अतिरिक्त थोड़े घी वाली सब्जी, रोटी दें ताकि बच्चे को वसा भी मिल सके। अति किसी की भी न करें।

- मेघा

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