बाल जगत/जानकारी :बालों की कहानी

बाल जगत/जानकारी :बालों की कहानी

बाल केवल मानव शरीर पर ही नहीं, दूसरे स्तन-धारियों पर भी होते हैं। मानव शरीर पर बंदर से ज्यादा बाल हैं लेकिन बहुत छोटे और बारीक। इनका पैदा होना हारमोन की मात्रा पर निर्भर करता है। नर के शरीर पर मादा से ज्यादा बाल होते हैं। अलग-अलग भागों के बालों की लंबाई अलग-अलग होती है। सिर के बाल 150 सेंटीमीटर तक बढ़ सकते हैं। ये 2-7 सेंमी. प्रति सप्ताह की दर से वृद्धि करते हैं। प्रतिदिन 70-80 बालों का झडऩा स्वाभाविक है।

बालों का जन्म चमड़ी के 'हेयर-फोलिकल' से होता है। बाल काले या भूरे हो सकते हैं। इनमें एक वर्णक होता है जिसे 'मैलेनिन' कहते हैं। बालों को खड़ा करने के लिए-'इरैक्टर पिल्ली' होते हैं जो डर या हैरानी में बालों को खड़ा कर देते हैं। बालों के पास एक सिबेशियस-गंरथि होती है जो बालों की जड़ों को नियमित तेल देती रहती है। पलकों के बाल आंखों की सुरक्षा करते हैं। इनको भी एक ग्रंथि तैलीय रखती है। दाढ़ी के बाल 6.2 मि. मी. मीटर और सिर के बाल 0.005 मि. मी. घने होते हैं। डर की अवस्था में एडरीनेलिन हारमोन के कारण यह खड़े हो जाते हैं। सिर के बाल एक साल में दो-बार टूट कर दोबारा अंकुरित हो जाते हैं। गंजापन एक प्राकृतिक एवं जीन द्वारा नियंत्रित क्रिया है जो केवल पुरूषों में होती है। स्त्रियां गंजी नहीं होती। बाल शरीर को गर्मी एवं सुन्दरता प्रदान करते हैं। स्त्रियों में बालों को संवारना-सजाना एक स्वाभाविक क्रिया है। बालों को केश या जुल्फ भी कहते हैं। इतिहास में वर्णित है कि द्रोपदी के पांच फुट लम्बे बाल थे। चोटी रखना एक पुराना रिवाज है। गुरूकुल शिक्षा के दौरान विद्यार्थी बालों में चोटी रखा करते थे। अब पंडित वर्ग में कहीं कहीं चोटी देखने में मिल जाती है। केश विन्यास के लिए आज कल हर शहर के हर-मुहल्ले में ब्यूटी पार्लर खुल चुके हैं।

आजकल नाई की दुकान पर या ब्यूटी पार्लर में बाल काट कर फेंकते नहीं। इनको बेचा जाता है और कई प्रकार का कीमती सामान बनता है। शरीर पर करोड़ों बाल होते हैं। इनको इकटठा कर के जलाना नहीं चाहिए। इनसे बहुत सी हानिकारक गैसें बनती हैं जिनसे प्रदूषण फैलता है। बालों द्वारा खाद बनाई जा सकती है। जलाने से वातावरण में प्रदूषण हो सकता है। इनसे जो जहरीली गैसें निकलती हैं वे मानव मस्तिष्क एवं फेफड़ों पर विपरीत प्रभाव डालती हैं। हमारे बाल प्रकृति की एक अनुपम भेंट हैं। इनका पालन पोषण ठीक से करें तो ये आपकी सुन्दरता को चार चांद लगा देंगे। बाल धूप में सफेद नहीं होते। उम्र के साथ सफेद बाल भी अपना ही महत्त्व रखते हैं। चांदीनुमा बाल बड़प्पन की निशानी हैं। सच है बाल करें कमाल। इनकी सुरक्षा से सुंदरता बढ़ जाती है।

- विजेन्द्र कोहली गुरदासपुरी

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