बाल कथा: शराब की कहानी

बाल कथा: शराब की कहानी

पुराने जमाने की बात है। एक नदी के किनारे एक विशाल पीपल का पेड़ था। उस पर एक मैना रहती थी। वह सवेरे जाग जाती थी और खूब गाती थी। इसके बाद वह उड़ जाती थी और फिर शाम को वापस आती थी। थोड़ी देर तक चहक कर सो जाती थी।
कुछ दिनों के बाद एक तोता आया और उसी पेड़ पर रहने लगा। दोनों में परिचय हुआ और अब दोनों एक साथ एक ही घोंसले में रहने लगे। मैना गाती थी और तोता भी उसके सुर के साथ अपना सुर साधता था। दोनों के मिले जुले स्वर में एक विशेष मिठास थी जो आसपास के वातावरण को मधुमय बना देती थी। दोनों खुश थे। सवेरे-शाम गाते थे और रात भर सोते थे। दिन भर पेट भरने की चिन्ता में इधर-उधर फुदकते फिरते थे।
प्रतिदिन की तरह दोनों शाम को अपने नीड़ में आये और शाम का गाना शुरू ही हुआ था कि पेड़ के नीचे की आवाज से उनका ध्यान टूट गया। चारों आंखों ने ठीक से देखा कि पेड़ के नीचे एक बाघ और एक सूअर एक दूसरे से भिड़े हैं। उनकी लड़ाई से ऐसा लगता था कि दोनों में बल एक समान है।
मैना ने कहा- लडऩा बंद करो। मैं गाना गाती हूं और तुम दोनों सुनो। इस वाक्य ने जादू का काम किया। उनकी लड़ाई बंद हो गई। गाना शुरू हुआ और उन पर इतना अधिक प्रभाव पड़ा कि दोनों दुश्मन एक दूसरे के निकट आ गये। प्यार से दोनों ने एक दूसरे को सूंधा और सो गये। वहीं रहने लगे। सवेरे गाना सुनते थे और जब गाना बंद हो जाता था तब बाहर निकल जाते थे। वे पेड़ के नीचे अपनी जगह बना चुके थे। चारों जीव खुश थे।
एक दिन एक आदमी उस पेड़ के नीचे आया। दोपहर का समय था। उसने एक भटठी सुलगाई और उस पर महुए से भरी एक हांडी चढ़ा दी। काफी देर तक गर्म करने के बाद भी एक बूंद रस नहीं निकला।
वह आदमी बहुत उदास हुआ और उसी क्षण गांव में आया। वहां उसने एक ज्योतिषी से इसका कारण पूछा। ज्योतिषी ने गणना करके बताया कि उस पीपल के पेड़ की शाखाओं को काटकर भटठी में झोंको, तब तुमको सफलता मिलेगी। उसने वैसा ही किया। उसने आकर सभी शाखाओं को काटकर नीचे गिरा दिया और उनको भटठी में ताबड़तोड़ झोंकने लगा। शाम को मैना और तोता आये। उन्होंने देखा कि पीपल का पेड़ ठूंठ पड़ा है। वहीं एक आदमी भटठी में लकडिय़ों को झोंक रहा है।
मैना से नहीं रहा गया। वह उड़कर सीधे बर्तन में बैठ गई। तोते ने भी वैसा ही किया। देखते ही देखते दोनों महुए के साथ घुल-मिल गये। बाघ और सूअर भी आये।
वहां की अवस्था देख वे तिलमिला उठे। बाघ ने एक छलांग लगाई और बर्तन में समा गया। सूअर ने भी वैसा ही किया। देखते ही देखते वे दोनों भी उसमें घुल-मिल गये। उस दिन बर्तन से खूब रस निकला। आदमी खुशी के मारे नाच उठा।
उसने गांव वालों को बुलाया और उनको पिलाया। खुद भी जी भर पिया। जिन लोगों ने नहीं पिया, उन्होंने देखा कि पीने वालों ने क्या-क्या किया। पहले तो सभी चहक पड़े और मीठे गाने सुनाने लगे। फिर गरजना-तरजना शुरू हुआ। खूब भाग दौड़ के बाद अंत में सभी जहां तहां बेहोश होकर गिर पड़े।
कहा जाता है कि उसी दिन से इस रस का नाम शराब पड़ा। इसमें चारों जीवों का अंश पूरा-पूरा आ गया था। शराबी पहले प्याले के साथ मैना की तरह चहकता है और मीठी-मीठी चुहलबाजियों के बीच पीना शुरू करता है। बाद में तोते के अंश का प्रभाव दिखलाता है। वह और मस्त हो जाता है। कंठ फूट पड़ता है और वह झूम-झूमकर गाने लगता है।
इस दौर के बाद बाघ का अंश सिर पर अपना प्रभाव दिखाता है। वह अब गुर्रा उठता है। ठेलमठेल शुरू होती है और महाभारत का दृश्य उपस्थित हो जाता हैं वह सोचता है। कि पृथ्वी पर अब मेरी तरह बलवान और कोई नहीं है। अंत में सूअर का अंश आता है। वह घों-घों करता हुआ इधर-उधर दौड़ भाग करता है।
धीरे-धीरे उसकी ज्ञानशक्ति समाप्त हो जाती है और वह कहीं किसी नाली में एक ओर लुढ़क जाता है।
-रमाशंकर पांडेय

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