जानकारी: घरौंदों को सजाने वाले पक्षी

जानकारी: घरौंदों को सजाने वाले पक्षी

नाना प्रकार के बेलबूटों द्वारा हम अपने घरों को सजाते हैं। अपने ड्राइंग रूम को तस्वीरों आदि से सुसज्जित रखते हैं। बड़े-बड़े होटलों में डेकोरेटर होते हैं जिनका काम होटल को करीने से सजाना होता है। गृह सज्जा को बाकायदा एक कला मानकर उसका प्रशिक्षण दिया जाने लगा है।
हमने जीव-जन्तुओं की कला चातुरी को नहीं देखा। वे भी अपने घरों को बड़े कलात्मक ढंग से सजाते हैं। कभी-कभी उनकी सजावट को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानों उन्हें जीव-जन्तुओं ने नहीं बल्कि किसी कुशल कारीगर ने सजाया है।
चिडिय़ा अपने घरों को बड़े कलात्मक ढंग से सजाती हैं। सियोल के आस पास के टापुओं में एक नीलकंठ की तरह की चिडिय़ा पाई जाती है जिसे वहां के निवासी स्वर्ण चिडिय़ा कहते हैं। यह चिडिय़ा सुन्दर छटा बिखेरने वाली होती है। अपने अतिथियों के स्वागत में नृत्यमंडल बनाती है और क्रीड़ांगन को सुसज्जित करती हैं। इनके घोंसले हिण्डोले की तरह होते हैं जो धीरे धीरे हल्की हवा से हिलते रहते हैं।
चिडिय़ों में नर अपनी प्रेयसी को रिझाने के लिए भांति भांति के नृत्य करता है। इनमें विवाह आदि भी सामूहिक ही होते हैं।
यों तो हर पक्षी कुंज कला में प्रवीन होता है। इन पक्षियों में नर के कलगी होती है जो चमकीली और साटन की तरह होती है। नर सजावट के लिए रंग-बिरंगे पत्थर सीप आदि लाता है। इसे नीला रंग बहुत प्रिय होता है, इस लिए अधिकांश चीजें नीले रंग की होती हैं।
अधिकतर चिडिय़ां अपने घोंसलों को सजाने के लिए हल्के गुलाबी रंग तथा श्वेत फूलों को चुनती हैं। ये अपने घोंसले ऐसे स्थान पर बनाती हैं जहां दो छोटे वृक्ष के ठूठ हों। इन ठूंठों को भी ये बड़े कलात्मक ढंग से सजाती हैं।
कुछ पक्षी अपने घोसलों को बीस फुट ऊंचे वृक्ष पर बनाते हैं। ब्राजील की एक चिडिय़ा जिसे 'हैट जिन' कहते हैं अपने घोंसले का निर्माण पृथ्वी से बीस फुट की ऊंचाई पर करती हैं। ये अपना घोंसला कोमल टहनियों से बनाती हैं।
सबसे विलक्षण घोंसला मछली पकडऩे वाली 'किंगफिशर' का होता है यह अपना घोंसला एक कोठरी की तरह बनाती है। इस कोठरी की तह में यह फूल बिछाती है तथा एक कोने में मछलियों के ढेर एकत्र करती है जिन्हें विवाहादि में खाया जाता है। घोंसले का एक ही द्वार होता है जिस पर यह खुद बैठती है।
टर्की की जंगली मुर्गी घोंसला बनाने में बड़ी सिद्धहस्त होती है। इसके घोंसले का आकार भी अन्य पक्षियों की अपेक्षा कहीं बड़ा होता है। मुर्गी अपना घोंसला बनाने में पूरा एक वर्ष लगाती है। न जाने कहां कहां से अपने घोंसले के लिए ये पत्तियां एकत्र करती है। इस कार्य में वह किसी का सहयोग नहीं लेती। जब घोंसला बनकर तैयार हो जाता है, तब वह अपने मिलने वालों को उसे दिखाती है।
- जया मण्डावरी

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