Read latest updates about "बाल जगत" - Page 1

  • शेयरिंग करना सिखाएं बच्चों को

    बच्चे अपने माता-पिता, घर-परिवार और आस-पास के वातावरण से बहुत कुछ सीखते हैं। बच्चे गंदी आदतें जल्दी सीखते हैं और अच्छी आदतों पर पूरा ध्यान नहीं देते। ऐसे में माता-पिता की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक बच्चों को बचपन से ही शेयरिंग का अभ्यास करवाना होगा। तभी वह सीख पाएंगेे और साथ ही...

  • बाल कहानी: चांदी की डिबिया

    सुखराम कहने को किसान था पर काम दूसरे के खेतों पर करता था। मुश्किल से परिवार का गुजारा कर पाता था। एक दिन सुखराम को कुछ सामान लेने बाजार जाना पड़ा। वह साहूकार दीनदयाल की दुकान पर पहुंचा। साहूकार ने उसे पहचान कर कहा, 'वर्षों पहले तुम्हारे पिता ने मुझसे पचास रूपए उधार लिए थे। वे रूपए न उन्होंने लौटाए,...

  • बोध कथा: ईश्वर की कृतियां

    एक बार एक किसान के घर में रखे बर्तनों में कांसे की बनी थाली और अल्यूमीनियम के कटोरे में वार्तालाप हो गया। थाली ने कहा, 'मैं तुमसे बड़ी हूं, क्योंकि मैं कांसा धातु की बनी हूं, तुमसे ज्यादा कीमती हूं तथा रसोईघर में मेरा अधिक महत्त्व है। तुम जैसे तीन-चार कटोरों का सामान अकेले मैं रखने के काम आ सकती...

  • बाल कथा : बंदर का बाक्सिंग स्कूल

    आलसी बंदर इस बार शहर से जंगल के जानवरों को बेवकूफ बनाने की एक नई तरकीब सोचकर लौटा था। बात यह थी कि उसने शहर में एक 'बाक्सिंग स्कूल' देख लिया था जिसमें लोग बाक्सिंग सीखने जाते थे। उसने सोचा कि वह भी जंगल में बाक्सिंग सिखाने का स्कूल खोल ले। वह बाक्सिंग तो जानता नहीं था पर अपनी चालबाजी पर उसे पूरा...

  • बाल जगत/जानकारी: क्लोरोफार्म की खोज की कहानी

    क्लोराफार्म की खोज की कहानी भी बड़ी मजेदार है। एक बार एक दुर्घटना में घायल व्यक्ति की टांग काटनी थी नहीं तो कुछ देर में पूरे शरीर में जहर फैल जाता। चिकित्सकों ने मरीज के हाथ-पैर रस्सी से बांध दिए, दो-तीन आदमी भी उसे पकड़े हुए थे मगर रोगी बुरी तरह छटपटा रहा था। बहुत बुरा दृश्य था। ऐसा दृश्य देखकर...

  • बच्चों को सिखाएं कुछ जरूरी काम

    - अपने खिलौने उचित स्थान पर रखना। - स्कूल से आने पर स्वयं स्कूल बैग रखना और पानी की बोतल के स्थान पर बोतल खाली कर रखना। - अपने जूते उचित स्थान पर रखना, स्कूल के लिए यूनिफार्म, रात को बैल्ट रूमाल, जुराब, टाई और जूते आदि निकालकर यथा स्थान पर रखना। - फ्रिज में खाली बोतलें भर कर रखना। - रात्रि में...

  • बाल जगत/जानकारी: रूपए-का पहिया, चलता ही जाए

    पुरातन में समाज में वस्तुओं के आदान-प्रदान से समाज चलता था। बाजार में नोट, सिक्के नहीं प्रचलित थे। गाय देकर बैल ले आते या गेहूं देकर घोड़ा खरीद जाते थे। कौडिय़ां भी सिक्कों की जगह चलती रही। कुछ वर्ष पूर्व गांवों में यह प्रथा भी थी कि गेहूं देकर दुकानदार से चावल लिए जाते थे। गलियों में लोहा खरीद कर...

  • बाल कथा: जाति का ढोल

    एक बार आचार्य जे. बी. कृपलानी रेल से यात्रा कर रहे थे। रेल के तृतीय श्रेणी के जिस डब्बे में वे बैठे थे, वहीं उनकी बगल में मोटे-से तिलकधारी सेठ भी बैठे हुए थे। उन्होंने कीमती वस्त्र पहन रखे थे। सिल्क का कुरता, उसमें सोने के बटन, बढिय़ा धोती और सिर पर पगड़ी और आंखों पर सुनहरा चश्मा। अपने पास बैठे हुए...

  • डर एक रोग है, इसे छोडि़ए

    डर एक मानसिक रोग है जो अच्छी-खासी विचार प्रणाली को जर्जर कर देता है। यूं तो यह जीवन की एक सहज प्रवृत्ति है व नियम, व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखने के लिए एक हद तक उपयोगी भी है तथा सुरक्षा, बचाव, सावधानी के लिए आवश्यक भी है। भय इस सीमा तक तो ठीक है मगर सदा डरे सहमे रहना, मूढ़ता, जड़ता, संत्रस व आतंक...

  • बाल कथा: पिता की सीख

    बिलासपुर गांव में रामप्रसाद नाम का एक व्यक्ति रहता था। वह गांव की पाठशाला में शिक्षक था। वह एक ईमानदार और स्वाभिमान वाला व्यक्ति था। उसने अपने जीवन में किसी के आगे कभी हाथ नहीं पसारा। बस, अध्यापन कार्य से वेतन रूप में जो भी थोड़ी-सी आय होती थी, उसी में घर का गुजारा चला लेता था। उसके दो लड़के थे। ...

  • बाल जगत/जानकारी: बच्चे के विकास के लिए विशेष है यह उम्र

    बच्चे के पैदा होने से 3 साल की आयु विशेष होती है जिस पर बच्चे का सही विकास निर्भर करता है। इस आयु में बच्चे को पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है। यदि इस आयु में माता-पिता बच्चे के पौष्टिक तत्वों के लिए लापरवाह होते हैं तो उनका बच्चा कमजोर रहता है और बार-बार बीमार पड़ता है। अगर माता-पिता पूरा समय...

  • बाल जगत/जानकारी: गंगा प्रदूषण की कहानी-गंगा की जुबानी

    मैं आपकी पतित पावनी 'गंगा' बहुत दुखी हूूं। मेरा अमृतमय पानी प्रदूषित होकर विषाक्त हो गया है। वह पीने लायक भी नहीं रह गया है। उसमें जो औषधिकारक गुण था, वह धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। मैं बीमारियों का घर बन गयी हूं। मेरे पानी के सेवन से अनेक लोगों को हानि पहुंच सकती है। इन सब कारण से मैं बहुत...

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