फिल्म साक्षात्कार: मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है - कृति सेनन

फिल्म साक्षात्कार: मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है - कृति सेनन

कृति सेनन बॉलीवुड की एक ऐसी अभिनेत्री का नाम है जो किसी फिल्मी परिवार से ताल्लुक न रखने के बावजूद फिल्म इंडस्ट्री में अपना एक खास मुकाम बनाने में सफल रही।
'बरेली की बर्फी' (2017) के बाद कृति सेनन काफी अधिक उत्साहित हैं। अब वो साजिद नडियाडवाला की अगली फिल्म 'हाउसफुल 4' में अक्षय कुमार के साथ कॉमेडी करती नजर आएंगी। 'हाउसफुल फ्रेंचाइजी' की तीनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सुपर हिट साबित हुई हैं, इसलिए इस फिल्म को लेकर वह जरूरत से ज्यादा आश्वस्त और आत्म विश्वास से भरी नजर आ रही हैं।
'हाउसफुल 4' में पहली बार कृति सेनन और अक्षय कुमार की जोड़ी नजर आएगी। यह फिल्म 2019 की दीवाली पर आएगी। तीन साल पहले 2015 में अक्षय कुमार के साथ कृति सेनन को 'सिंह इज ब्लिंग' के लिए चुना था लेकिन उस वक्त कृति ने शाहरूख स्टॉरर 'दिलवाले' के चक्कर में 'सिंह इज ब्लिंग' छोड़ दी थी। बाद में कृति की जगह एमी जैक्सन को साइन किया गया।
कृति सेनन और शाहिद कपूर के साथ राज और डीके 'फर्जी' बनाना चाहते थे लेकिन शाहिद कपूर को स्क्रिप्ट पसंद नहीं आई। बाद में अर्जुन कपूर को अप्रोच किया गया लेकिन उन्होंने भी ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई और इस तरह यह फिल्म खटाई में पड़ गई।
खबर है मोहित सूरी बालाजी फिल्म्स के लिए 'एक विलेन' का जो रीमेक बनाने जा रहे हैं, इसमें वो इस बार सिद्धार्थ मल्होत्रा के अपोजिट कृति सेनन को कास्ट करना चाहते हैं। विशाल भारद्वाज की 'चूडिय़ां' में भी कृति सेनन के होने की खबर है। प्रस्तुत हैं कृति सेनन के साथ की गई बातचीत के मुख्य अंश:
'हीरोपंती' के बाद साजिद नडियाडवाला की 'हाउसफुल 4' के लिये कास्ट किए जाने पर कैसा महसूस हो रहा है ?
'हाउसफुल फ्रेंचाइजी' का हिस्सा बनकर मैं काफी अधिक उत्साहित हूं। सच कहूं तो मुझे घर वापस आने जैसा लग रहा है। मेरा फिल्मी सफर साजिद सर के साथ ही शुरू हआ था। तब से वह हमेशा मेरे साथ मेरे मार्गदर्शक के तौर पर जुड़े रहे हैं। उनके साथ फिर से काम करने के लिए मैं बेसब्री से इंतजार कर रही हूं।
'हाउसफुल 4' में आप पहली बार कॉमेडी करने जा रही हैं। आपके लिए कॉमेडी करना कितना कठिन होगा ?
मुझे कॉमेडी करने का बिलकुल भी अनुभव नहीं है। मैंने अब तक सिर्फ हल्के फुल्के रोमांटिक, इमोशनल किरदार ही निभाये हैं लेकिन मुझे यकीन है कि मैं अपना किरदार बेहतर तरीके से निभा सकूंगी। मैंने सुन रखा है कि कॉमेडी में सबसे ज्यादा असरकारक टाइमिंग होती है और मैं टाइमिंग पर सबसे ज्यादा फोकस करने की कोशिश करूंगी।
'हीरोपंती' के बाद आपकी 'दिलवाले' और 'राब्ता' उम्मीद के मुताबिक नहीं चली। उनके न चलने पर आप कितना असुरक्षित महसूस करने लगी थीं ?
उसे असुरक्षा नहीं कहा जा सकता। लेकिन इतना अवश्य सोचने लगी थी कि मेरे काम में कहां कमी रह गई जो नतीजे अच्छे नहीं रहे लेकिन बाद में मैंने अपने मन को कुछ इस तरह समझा दिया कि फिल्म का चलना न चलना किसी के हाथ में नहीं होता। हालांकि अपनी ओर से मैं हमेशा यही चाहती हूं कि मेरी हर फिल्म अच्छी चले लेकिन ऐसा हो नहीं पाता। मेरे बस में सिर्फ अपना काम ईमानदारी और मेहनत से करना होता है और वह मैं करती हूं। मेरी कोशिश यही होती है कि यदि मेरी कोई फिल्म न भी चले तो मेरा काम लोगों को पसंद आना चाहिए।
फिल्मों की नाकामी के बाद कलाकार को भुला दिया जाना और एक हिट के बाद ढेर सारी फिल्में, इन सारी बातों को किस रूप में लेती हैं ?
कलाकारों को काम उनके टेलेंट के आधार पर मिलना चाहिए न कि उनकी बॉक्स ऑफिस सफलता के आधार पर लेकिन यह बड़ी विडंबना है कि ज्यादा टेलेंटेड न होने के बावजूद यदि आपकी फिल्म टिकिट खिड़की पर रंग जमा जाती है तो आपको दो चार नई फिल्मों में काम मिल जाता है। खैर, 'बरेली की बर्फी' के बाद अब मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है।
इन दिनों बॉलीवुड में महिला प्रधान फिल्मों का बोलबाला है। अब एक्टर के बजाए एक एक्ट्रेस के कंधों पर भी फिल्म चलने लगी हैं। इस बदलाव पर क्या कहना चाहेंगी ?
यह बहुत अच्छा बदलाव है कि अब इस इंडस्ट्री में ऐसी फिल्में बनने लगी हैं वर्ना कुछ साल पहले तक इस इंडस्ट्री को पूरी तरह मेल डोमिनेटेड माना जाता था। सबसे अच्छी बात यह है कि यहां अब हीरोइन को केन्द्र में रखकर न सिर्फ फिल्में बनने लगी हैं बल्कि वे अच्छा बिजनेस भी कर रही हैं। हालांकि यह प्रोसेस अभी थोड़ा स्लो है लेकिन फिर भी खुशी की बात है कि कम से कम बदलाव नजर आने लगा है।
इस इंडस्ट्री में हीरो और हीरोइन की फीस में जो बड़ा अंतर है, उसके बारे में किस तरह के विचार हैं ?
इस बारे में बस इतना ही कहूंगी कि यह अंतर नहीं होना चाहिए। कलाकारों को पेमेंट उनके काम और मेहनत के आधार पर होना चाहिए। अगर एक एक्ट्रेस, ऑडियंस को उतनी ही अटे्रक्ट कर रही है जितना कि एक्टर तो फिर उसकी फीस एक्टर के मुकाबले कम क्यों है ?
इस सारी सोच में सुधार के लिए आपके पास क्या प्रस्ताव हैं ?
मैं अभी नई हूं। मुझे अभी इस तरह की बातों में नहीं पडऩा चाहिए। मैं खुद को सुधारक या विचारक के तौर पर प्रस्तुत करना नहीं चाहती लेकिन इतना अवश्य चाहती हूं कि यहां मेल के मुकाबले फीमेल को देखने का जो नजरिया है, उसमें बदलाव आना चाहि ए। एक बात और कहना चाहूंगी कि यदि यहां की लड़कियां शादी कर लें तो उन्हें साइड में करते हुए उनकी एक्टिंग लाइफ को खत्म मान लिया जाता है। जिस तरह एक्टर्स की कोई एज लिमिट नहीं है। उसी तरह का नियम फीमेल एक्टर्स को लेकर भी होना चाहिए।
अपने लंबे कद को आप नुक्सानदेह या फायदेमंद, किस रूप में देखती हैं?
मुझे खुशी है कि दीपिका, कैटरीना और अनुष्का की तरह मैं भी लंबी हूं। सोनम भी कुछ कम लंबी नहीं है। मुझे नहीं लगता कि लंबी हीरोइन को किसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता हो। फिल्म इंडस्ट्री में काफी लंबे हीरो मौजूद हैं और फिर मैं तो छोटे कद के वरूण के साथ काम करके उस बैरियर को ही तोड़ चुकी हूं।
नेपोटिज्म पर आपकी क्या राय है। आपके लिए यह इंडस्ट्री कितनी सख्त या नरम रही है ?
यहां पर नेपोटिज्म से इन्कार नहीं किया जा सकता क्योंकि अगर आप इंडस्ट्री से नहीं हैं तो आपको पहले कुछ मौके बड़े ही मुश्किल से मिलते हैं। उसके बाद आपकी पहली फिल्म का चलना भी बेहद जरूरी हो जाता है। अगर आपकी पहली फिल्म नहीं चली तो आपको दूसरी फिल्म नहीं मिलती लेकिन यदि आप फिल्मी बैकग्राउंड से हैं तो आपके लिए हालात अलग हो जाते हैं लेकिन मैं खुद को उन लकी इंसानों में से मानती हूं जिन्हें इंडस्ट्री के बाहर का होने के बावजूद टेलेंट दिखाने का मौका मिला है।
-सुभाष शिरढोनकर

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