फिल्म साक्षात्कार: मैं सिर्फ अपनी दुनिया में मस्त रहने वाली लड़की हूं - सोनम कपूर

फिल्म साक्षात्कार: मैं सिर्फ अपनी दुनिया में मस्त रहने वाली लड़की हूं - सोनम कपूर

सोनम कपूर ने अपने करियर की शुरूआत अमिताभ बच्चन और रानी मुखर्जी स्टॉरर 'ब्लैक' (2005) के दौरान संजय लीला भंसाली की असिस्टेंट के तौर पर की लेकिन संजय, सोनम के इस काम से ज्यादा खुश नहीं थे। उन्हें लगता था कि सोनम को एक्टिंग में आना चाहिए और अपनी सोच को साकार रूप देते हुए उन्होंने सोनम कपूर को रनबीर कपूर के अपोजिट मेन लीड में लेकर 'सांवरिया'(200०7) बनाई।
इस तरह सोनम का एक्टिंग कैरियर शुरू हो गया। 'सांवरिया'(2007) बॉक्स ऑफिस पर बेहद निराशाजनक साबित हुई लेकिन राकेश ओमप्रकाश मेहरा द्वारा निर्देशित 'दिल्ली 6' (2009) में सोनम कपूर ने अपने अभिनय से प्रभावित किया।
'भाग मिल्खा भाग' (2013) और 'रांझणा' (2013) में सोनम ने एक्टिंग का और ज्यादा असर पैदा किया। सलमान खान के साथ उन्हें 'प्रेम रतन धन पायो' (2015) में काम करने का अवसर मिला। यह उनके करियर की सबसे बड़ी हिट साबित हुई। उसके बाद 'नीरजा' (2016) ने उन्हें नेशनल अवार्ड दिलवा दिया।
पिछले साल सोनम की कोई फिल्म रिलीज नहीं हुई लेकिन इस साल उनकी अक्षय कुमार के साथ 'पैडमेन' 26 जनवरी, संजय दत्त की बायोपिक 'संजू' 30 मार्च और 'वीरे दी वेडिंग' 18 मई को रिलीज होने वाली है। इन फिल्मों में सोनम अहम भूमिकाएं निभा रही हैं
सोनम कपूर, लेखिका अनुजा चौहान के उपन्यास 'द जोया फैक्टर' पर बनने वाली फिल्म में एक विज्ञापन एजेंसी में बड़े पद पर काम करने वाली लड़की जोया सिंह सोलंकी की मुख्य भूमिका निभाने वाली हैं। प्रस्तुत हैं सोनम कपूर के साथ की गई बातचीत के मुख्य अंश:
पहले आपं छोटी से छोटी बात के लिए बेहद उत्साहित हो जाया करती थी लेकिन अब ऐसा नहीं है । आपके अंदर यह बदलाव किस तरह आया ?
अब मैं जान चुकी हूं कि मैं एक ऐसे फील्ड में हूं जहां आपका पहले का काम लोग जल्दी भूल जाते हैं और हालिया काम ही याद रहता है। यहां के लोगों की मानसिकता थोड़ी अलग है। यदि आपकी फिल्म अच्छी जाए तो लोग बहुत ज्यादा खुश नहीं होते लेकिन फिल्म यदि
नहीं चली तो खिंचाई जल्दी शुरू हो जाती है।
तो क्या इन बातों को लेकर फिल्म इंडस्ट्री में आने पर कभी अफसोस होता है ?
सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री नहीं, हमारे देश के दूसरे फील्ड़्स में भी कुछ ऐसी ही मानसिकता है कि लोग एक दूसरे के लिए खुश नहीं होते, इसलिए अब मैंने तय कर लिया है कि जो कुछ करूं, उसके लिए मैं कुछ न बोलूं बल्कि उसके बारे में दूसरों को ही बोलने दूं।
कहा जाता है कि 'प्रेम रतन धन पायो' और 'नीरजा' जैसी फिल्में आपको, आपके पापा अनिल कपूर की सिफारिश पर मिली थीं ?
फिल्मों में काम करना हमारा काम है तो निश्चित रूप से फिल्म से जुड़े लोगों के साथ हमें बातचीत भी करती होती है। मुझे यहां पूरे आठ साल हो चुके हैं लेकिन जहां तक मुझे याद आता है, मेेरे पापा आज तक मेरे लिए, किसी के पास काम मांगने नहीं गए।
फिल्मों में आप मनोरंजन, मैसेज, इमोशन, किसे ज्यादा महत्त्व देती हैं ?
आखिर हर कोई मनोरंजन के लिए ही तो फिल्में देखने आता है। आप एक फिल्म देखते हुए अपनी सारी तकलीफों को भूल जाना चाहते हैं। हां, यदि फिल्म में मनोरंजन के साथ कोई मैसेज हो तो वह फिल्म को और भी मजबूती देने का काम करता है।
आप अपनी समकालीन किस अभिनेत्री से प्रभावित हैं। क्या कोई ऐसी एक्ट्रेस है जिसे आप खुद से ज्यादा पसंद करती हों ?
मैं दूसरों पर ध्यान ही नहीं देती कि कौन क्या कर रहा है। मैं सिर्फ अपनी दुनिया में मस्त रहने वाली लड़की हूं। अपने बारे में और अपनी फिल्मों के बिजनेस के बारे में ही सोचती हूं। मैं कभी किसी की तरफ नहीं देखती, इसलिए मुझे हमेशा मेरा काम आसान लगता है।
सोशल मीडिया पर जब कभी आपको ट्रोल किया जाता है, आप अपना आपा खो देती हैं ?
मैं नहीं चाहती कि मेरे बारे में कुछ भी लिखा जाए। ये सब कुछ मेरे कंट्रोल में होना चाहिए। सोशल मीडिया पर लोग मेरे बारे में कुछ भी कहते रहते हैं। ऐसे में यदि कोई मेरी लाइफ में आता है तो मुझे उसे भी प्रोटेस्ट करना होगा। इन सारी चीजों का असर उस नये इंसान पर क्यों पड़े। मेरी भी प्राइवेसी है इसलिए मैं अपनी लाइफ के बारे में बातें करना पसंद नहीं करती। मैं कभी कुछ छिपाऊंगी नहीं पर इस बारे में बातें भी कभी नहीं करूंगी।
लेकिन सोशल मीडिया पर ज्यादातर व्यूवर्स आपके खिलाफ क्यों रहते हैं ?
मैं सोशल मीडिया पर किसी को खुश करने वाली कोई बात नहीं कहती। वही कहती हूं जो दिल में होता है। सोशल मीडिया एक अच्छी जगह है लेकिन ट्रोल्स सेक्सिस्ट और जजमेंटल होते हैं। लोग मानते हैं कि हम सुंदर दिखते हैं और अच्छे कपड़े पहनते हैं तो लोगों को लगता है कि हमारे पास दिमाग नहीं है। शुक्र है कि मैं खुद में कंफर्टेबल हूं।
आर.बाल्की के साथ 'पैडमेन' करने का आपका अनुभव कैसा रहा ?
मुझे लगता है कि वो एक सकारात्मक सोच वाले बेहतरीन शख्स हैं। उनके साथ काम करने का मेरा अनुभव बेहद शानदार रहा। उनके साथ काम करते हुए, हमारे बीच काफी मजबूत जुड़ाव हुआ है। मैं उम्मीद करती हूं कि अब वो मुझे अपनी हर फिल्म में लेंगे।
'पैडमेन' को लेकर आप कितनी आशावान हैं ?
आर.बाल्की ऐसे मेकर हैं जो, अपनी फिल्मों के जरिए हमेशा कुछ न कुछ कहना चाहते हैं। मेरा मानना है कि जिसके इतने अच्छे इरादे हों, उसकी फिल्म दर्शक अवश्य पसंद करते हैं। मैं 'पैडमेन' को लेकर बहुंत उत्साहित हूं।
आर.बाल्की के अलावा ऐसे कौन कौन से मेकर हैं जिनके साथ काम करते हुए आपको संतुष्टि मिलती है ?
मुझे लगता है कि, आर.बाल्की, राकेश ओमप्रकाश मेहरा, राम माधवानी और आनंद एल राय ऐसे फिल्मकार हैं जिनके साथ काम करना मेरे लिए बड़े सम्मान की बात है। ये लोग विशुद्ध फिल्मकार हैं और सिर्फ सच्ची फिल्में बनाते हैं।
आम तौर पर देखा गया है कि फिल्म इंडस्ट्री में महिलाएं अपने भविष्य को लेकर काफी असुरक्षित रहती हैं। क्या आपके अंदर भी इस तरह का भाव है ?
मैं मानती हूं कि महिला कलाकारों के बीच असुरक्षा का भाव ज्यादा रहता है लेकिन मेरे लिए किसी और से प्रतियोगिता करने से ज्यादा जरूरी है कि मैं अपने पिछले काम की तुलना में बेहतर काम करने की कोशिश करूं। इंडस्ट्री में महिला कलाकारों को बेहतर दर्जा दिलाने के लिए एक दूसरे का समर्थन करना और उन्हें प्रोत्साहित करना बेहद जरूरी है। इसके लिए हम सभी को साथ आना होगा लेकिन अफसोस कि ऐसी पहल करने के बारे
में अब तक किसी ने सोचा तक नहीं है।
कुछ लोगों का आप पर आरोप है कि नेशनल अवार्ड पाकर आप काफी बदल गई हैं और यह बदलाव आपकी शारीरिक भाषा में भी नजर आने लगा है ?
मुझे यह भी नहीं लगता कि इस अवार्ड को पाने के बाद में बदल गई हूं लेकिन लगता है कि इस अवार्ड के बाद लोगों का मुझे जांचने और परखने का नजरिया बदल चुका है वर्ना मैं तो वही कल वाली सोनम आज भी हूं।
-सुभाष शिरढोनकर

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