महान सुरबहार वादक अन्नपूर्णा देवी का निधन

महान सुरबहार वादक अन्नपूर्णा देवी का निधन

मुंबई। प्रख्यात सुरबहार वादक अन्नपूर्णा देवी का शनिवार तड़के निधन हो गया। वह 91 वर्ष की थीं। वह जाने माने सितार वादक पंडित रविशंकर की पूर्व पत्नी थीं। शादी के 21 साल के बाद दोनों का तलाक हो गया था।

अन्नपूर्णा देवी फाउंडेशन के प्रवक्ता ने यहां बताया कि वृद्धावस्था की वजह से वह कई बीमारियों से ग्रस्ति थीं। उन्हें यहां के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां आज तड़के तीन बजकर 51 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। वर्ष 1977 में उन्हें पद्मभूषण से नवाजा गया था। मशहूर बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया उनके प्रमुख शिष्यों में शामिल हैं। उनका मूल नाम रोशनआरा खां था। उनका जन्म मैहर घराने के उस्ताद बाबा अलाउद्दीन खां और मदीना बेगम के घर वर्ष 1927 को हुआ था। अलाउद्दीन खां महाराजा बृजनाथ ङ्क्षसह के दरबारी संगीतकार थे। उन्होंने जब बेटी के जन्म के बारे में दरबार में बताया तो महाराजा ने उसका नाम अन्नपूर्णा रख दिया। पंडित रविशंकर अलाउद्दीन खां के शिष्य थे। इस दौरान दोनों में नजदीकियां बढ़ी और वे परिणय सूत्र में बंध गये।

उन्हें वर्ष 1991 में संगीत नाटक अकादमी, 1999 में विश्वभारती विद्यापीठ की ओर से दिसिकोट्टम पदवी और 2004 में रत्न पुरस्कार समेत कई प्रतिष्टित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। सूत्रों के अनुसार श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने एक अखबार को दिये साक्षात्कार में कहा था कि समय के साथ पंडित जी और उनके बीच संगीत ही 'बाधक' बन गया। पचास के दशक में साथ में कार्यक्रम पेश करने के दौरान में उन्हें ज्यादा वाहवाही मिलती थी। उन्होंने कहा था, पंडित जी ने अपने हाव-भाव से जता दिया था कि उन्हें मिलने वाली तारीफ से वह खुश नहीं थे।

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