मैक्स अस्पताल फिर खुलने पर राजनिवास की कोई भूमिका नहीं

मैक्स अस्पताल फिर खुलने पर राजनिवास की कोई भूमिका नहीं

नयी दिल्ली। राजधानी के शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल के फिर से खुलने को लेकर उठे सवाल और इस मामले में राजनिवास को घसीटे जाने पर उपराज्यपाल कार्यालय ने स्पष्ट किया है इस प्रकरण से उसका कोई लेना-देना नहीं है।
दिल्ली सरकार ने जीवित शिशु को मृत बताकर परिजनों को सौंप दिए जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए इस अस्पताल का लाइसेंस आठ दिसम्बर को रद्द कर दिया था। यह अस्पताल आज से फिर खुल गया। अस्पताल में 30 नवम्बर को समय से पूर्व जुडवां बच्चों का जन्म हुआ था। एक बच्चे की जन्म के समय ही मृत्यु हो गयी थी जबकि दूसरे को भी डाक्टरों ने कुछ समय बाद मृत घोषित कर दिया था और पार्सल में लपेट कर परिजनों को सौंप दिया था। बच्चों को ले जाने के दौरान एक बच्चे के शरीर में हरकत हुई थी तो परिजनों ने उसे एक अन्य अस्पताल में भर्ती कराया जहां एक सप्ताह बाद उसकी भी मृत्यु हो गयी थी।
राजनिवास की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि अस्पताल के फिर से खुलने के मामले में उपराज्यपाल कार्यालय किसी भी स्तर पर शामिल नहीं है। बयान में कहा गया है कि मैक्स हेल्थ केयर इंस्टीट्यूट ने दिल्ली सरकार
के स्वास्थ्य सेवा निदेशालय के उसका लाइसेंस रद्द करने के आदेश के खिलाफ दिल्ली नर्सिंग नर्सिंग होम्स पंजीकरण अधिनियम 1953 के धारा 8 (3) के तहत वित्तीय आयुक्त के समक्ष अपील की थी।
राजनिवास ने कहा है कि यह ध्यान देने योग्य है कि दिल्ली नर्सिंग होम्स रजिस्ट्रेशन कानून 1953 के साथ-साथ विभिन्न अधिनियमों के तहत दिल्ली विधानसभा अधिनियम नामित दिल्ली (डेलीगेशन आफ)(संशोधित) अधिनियम 1994 द्वारा अपीलीय प्राधिकारी की शक्तियां वित्तीय आयुक्त दिल्ली को दी गयी है।
अपीलीय प्राधिकारी की शक्तियां अर्द्ध न्यायिक कार्य होने के कारण वित्तीय आयुक्त दिल्ली के लिए गए फैसले में किसी प्राधिकारी का हस्तक्षेप या निगरानी नहीं होती है।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि वित्तीय आयुक्त दिल्ली के आदेशों को किसी भी पीड़ित व्यक्ति या संस्था द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष उसके क्षेत्राधिकार में चुनौती दी जा सकती है। राजनिवास ने कहा है कि ऐसा प्रतीत होता है कि निहित स्वार्थों ने यह गलत सूचना प्रसारित की है जबकि उपराज्यपाल कार्यालय उक्त मामले में किसी भी स्तर पर शामिल नहीं है।
अस्पताल की तरफ से जारी बयान में कहा गया था कि अपीलीय प्राधिकारी से दिल्ली सरकार के लाइसेंस रद्द करने के आदेश पर रोक लगाने के बाद परिचालन फिर से शुुरू कर दिया गया है। अस्पताल ने कहा है कि हमारा पूरा ध्यान मरीजों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने पर रहता है। अस्पताल समाज के आर्थिक रुप से पिछड़े लोगों के लिए प्रतिबद्धता का पालन करते हुए इस वर्ग के मरीजों को मुफ्त में उपचार सुनिश्चित कराता है।
इस पूरे मामले में सरकार ने तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही अस्पताल का लाइसेंस रद्द किया गया था। दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष ने इस मामले में दिल्ली सरकार को घेरते हुए कहा कि वह पहले ही लाइसेंस रद्द करने के मामले पर सवाल उठा चुके थे और अब अस्पताल के फिर से खुलने पर उन्हें कोई आश्चर्य नहीं है। यह सब केजरीवाल सरकार की सांठगांठ का परिणाम है। सरकार ने कानूनी रुप से कमजोर मामला बनाकर प्रतिबंध केवल जनता को गुमराह करने के लिए लगाया था।
तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को यह बताया जाना चाहिए कि मैक्स अस्पताल प्रशासन से उनका क्या सौदा हुआ जिसकी वजह से इतना कमजोर मामला बनाया गया जो पहली सुनवाई में ही नहीं ठहर पाया।

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