सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को लेकर चल रहा उपद्रव हिन्दू धर्म के विरुद्ध षड्यंत्र: अय्यप्पा मंदिर दिल्ली

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को लेकर चल रहा उपद्रव हिन्दू धर्म के विरुद्ध षड्यंत्र: अय्यप्पा मंदिर दिल्ली



नई दिल्ली/पत्तनमतिट्टा। केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर चल रही रस्साकस्सी के बीच नई दिल्ली आरके पुरम स्थित श्री अय्यप्पा महामंदिर के एक धर्माचार्य अरविन्दजी ने कहा कि सबरीमाला मंदिर में जिस तरह का उपद्रव महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने को लेकर लेकर चल रहा है। उसके पीछे का षड्यंत्र बहुत ही भयानक है। देश में हिन्दुओं की आस्था से खिलवाड़ करने की यह सुनियोजित योजना है।

हालांकि उन्होंने उच्चतम न्यायालय के निर्णय पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा कि देश में हिन्दू धर्म के अलावा मुसलमान, जैन और ईसाई आदि धर्मों पर भी यह समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अय्यप्पा महाराज के मंदिर में ब्रह्मचारी साधु-संतों का ही प्रवेश है। ऐसे में महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर वहां की धार्मिक भावना आहत होगी और अराजकता का माहौल बनेगा।

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद प्रदर्शनकारियों के दबाव की वजह से दो महिलाएं सबरीमाला मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाई और उन्हें प्रवेश द्वार से बिना दर्शन किए वापस लौटना पड़ा। पुलिस को इस मामले में पीछे हटना पड़ा। पुलिस-प्रशासन के इस कदम से गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने रेहाना फातिमा के कोच्चि में उनके घर में भी तोड़फोड़ की। दूसरी ओर, सबरीमाला मंदिर सन्निधानम में सुबह से ही जमे प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे किसी भी हालत में 10-50 साल की महिलाओं को मंदिर में नहीं घुसने देंगे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हम सबरीमाला की सुरक्षा कर रहे हैं। इस संबंध में सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी कंदारारू राजीवारू वर्तमान हालात से परेशान हैं। दोनों महिलाओं के मंदिर के प्रवेश द्वार पर पहुंचने के बाद उन्होंने कहा कि अगर मंदिर में महिलाओं ने प्रवेश किया तो वो मंदिर में ताला लगाकर चाबियां सौंप देंगे। उनका कहना था कि वे श्रद्धालुओं के साथ खड़े हैं। इसके अलावा उनके पास कोई और चारा नहीं है।

पुलिस प्रदर्शन कर रहे श्रद्धालुओं के आगे बेबस नजर आई। आई.जी. श्रीजीत ने कहा, 'यह एक अनुष्ठान आपदा है। हम लोग उन्हें सुरक्षा के बीच यहां तक ले आए। लेकिन दर्शन पुजारियों की सहमति के बगैर नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि दोनों महिलाओं को जिस तरह की भी सुरक्षा चाहिए होगी, हम देने को तैयार हैं| मंदिर के लिए कूच करने से पहले ही हमने उन्हें वहां की स्थिति से अवगत करा दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि हम चाहते तो उन्हें दर्शन करा देते। लेकिन जैसे ही हम दोनों महिलाओं को मंदिर प्रांगण तक लेकर आए, तभी पुजारी ने मंदिर खोलने से मना कर दिया। हमने इंतजार किया, तब उन्होंने कहा कि अगर हम उन्हें मंदिर में प्रवेश कराने का प्रयास करेंगे, तो वे मंदिर को लॉक कर देंगे।'

सबरीमाला की प्रथा जो 800 साल से है जारी

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश करने की इजाजत दी थी। यहां 10 साल की बच्चियों से लेकर 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी थी। प्रथा 800 साल से चली आ रही थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ केरल के राजपरिवार और मंदिर के मुख्य पुजारियों समेत कई हिंदू संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। अदालत ने सुनवाई से इनकार कर दिया था। सबरीमाला मंदिर पत्तनमतिट्टा जिले के पेरियार टाइगर रिजर्व क्षेत्र में है। 12वीं सदी के इस मंदिर में भगवान अय्यप्पा की पूजा होती है। मान्यता है कि अय्यपा, भगवान शिव और विष्णु के स्त्री रूप अवतार मोहिनी के पुत्र हैं। दर्शन के लिए हर साल यहां करीब पांच करोड़ लोग आते हैं।


Share it
Top