फरीदाबाद महिला कॉलेज में लगेगी तनाव मुक्त पाठशाला

फरीदाबाद महिला कॉलेज में लगेगी तनाव मुक्त पाठशाला


फरीदाबाद। कालेजों में दाखिला लेने वाली छात्राओं का अब पढ़ाई के तनाव और मानसिक अवसाद दूर करने के उद्देश्य से राजकीय महिला कालेज में तनावमुक्त पाठशाला लगेगी। इसको लेकर कॉलेज में छात्राओं की काउंसलिंग के लिए विशेषज्ञों की टीम गठित की है। इसमें मनोविज्ञान की प्रोफेसर और मनोरोग विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। राजकीय महिला महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. भगवती राजपूत बताती हैं कि अधिकांश छात्राएं कॉलेज में कई उलझने साथ लेकर आती हैं।
यह उलझनें पारिवारिक और व्यक्तिगत होती हैं। छात्राओं को उस समय कोई समाधान कहीं मिलता नहीं हैं और वह अवसाद का शिकार हो जाती हैं। ऐसी छात्राएं बीच में ही कॉलेज छोड़ देती हैं। कई बार आत्महत्या जैसा कदम भी उठाती हैं। हालांकि उनके कॉलेज में ऐसी घटना नहीं हुई है, लेकिन बहुत-सी छात्राएं बीच में पढ़ाई छोड़ देती हैं| उनकी शादी कर दी जाती है। परिवार के पास आज भी लड़की की समस्या का समाधान उसकी शादी कर देना है।
जबकि समस्या कुछ और होती है। ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए कॉलेज में काउंसलिंग केंद्र स्थापित किया गया है। इस केंद्र का उद्देश्य होगा कि कोई भी छात्रा अवसाद में आकर भविष्य में कोई जोखिम भरा कदम न उठाए। प्राचार्या बताती हैं कि कॉलेज पहुंचने वाली छात्राओं में अक्सर असुरक्षा की भावना पैदा हो जाती है। कई छात्राओं को अवसाद की पीड़ा देखकर उन्होंने यह कदम उठाया है। छात्राओं की स्कूल में जन्मी उलझनें, पढ़ाई और अभिभावकों का दवाब इस समस्या को और बढ़ाता है। ऐसे में अगर छात्राओं की काउंसलिंग की जाएगी तो छात्रा को मानसिक बीमारी से दूर रखा जा सकता है। उनका उद्देश्य है कि छात्राएं बिना किसी तनाव के पढ़ाई करें और सुखद जीवन जिएं।
बुधवार को प्राचार्या भगवती राजपूत ने बताया कि कॉलेज में योगशाला तैयार की गई है। कॉलेज में पहले से जिम है, जिसे छात्राओं के लिए खोल दिया गया है। योगाभ्यास और प्राणायाम के माध्यम से किसी भी अवसाद या तनाव को दूर किया जा सकेगा। ऐसी छात्राओं के लिए योगशाला में योग कक्षाएं अनिवार्य की गई हैं। अन्य छात्राएं भी योग कक्षाएं ले सकती हैं। कॉलेज में छात्राओं के लिए जिम और योगाभ्यास को अनिवार्य किया जाएगा।
इसके लिए प्रशिक्षक नियुक्त कर दिए जाएंगे। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अजय भार्गव बताते हैं कि एक शोध के मुताबिक कॉलेज में पढ़ने वाला हर आठवां छात्र दिमागी तनाव और निराशा से ग्रस्त है। मौजूदा दौर में तकनीक में हो रहे बदलाव भी युवाओं की दिमागी परेशानी का सबसे बड़ा कारण बने हुए हैं। सोशल मीडिया पर छात्र पूरे समय फोन पर चिपके होते हैं। आभाषी (वर्चुअल) दुनिया और हकीकत के बीच लगातार लड़ाई उनकी जारी रहती है। स्मार्टफोन भी छात्रों में नींद की दिक्कत, निराशा, तनाव और चिंता बढ़ाता है। एक अध्ययन कहता है कि करीब चालीस फीसदी कॉलेज छात्र देर रात फोन पर चिपके होते हैं।

Share it
Top