मेदांता अस्पताल का फार्मेसी लाइसेंस 7 दिन के लिए निलंबित

मेदांता अस्पताल का फार्मेसी लाइसेंस 7 दिन के लिए निलंबित


गुड़गांव। डेंगू पीड़ित बच्चे के इलाज में दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक दाम वसूलने के आरोप में स्वास्थ्य विभाग ने मेदांता अस्पताल का फार्मेसी लाइसेंस सात दिन के लिए निलंबित कर दिया गया है। जिले के सीनियर ड्रग कंट्रोलर सुनिल चौधरी ने आज इसकी पुष्टि की।
धौलपुर (राजस्थान) हाऊसिंह बोर्ड कालोनी निवासी गोपेंद्र सिंह परमार ने अपने आठ वर्षीय बेटे शौर्य प्रताप की मौत के बाद मेदांता अस्पताल के डॉक्टरों को जिम्मेदार ठहराते हुए पुलिस में शिकायत देने के साथ प्रदेश व केंद्र सरकार को शिकायत दी थी। जिसमें उन्होंने बताया था कि उनके आठ वर्षीय बेटे शौर्य प्रताप को पिछले साल 25 अक्टूबर की शाम तेज बुखार आया था। उसे मेदांता मेडिसिटी अस्पताल में 29 अक्टूबर की रात दाखिल कराया था।
परमार का आरोप है कि 15 नवंबर तक डाक्टर यही कहते रहे कि बच्चा ठीक हो जाएगा लेकिन स्थिति सुधरने की बजाय बिगड़ती चली गई। उन्होंने इस दौरान रिश्तेदारों से लेकर जानकारों तक से 15 लाख 88 हजार 434 रुपये उधार लेकर अस्पताल में जमा कराए। सोलह नवंबर को उनसे कहा गया कि बच्चे की हालत ठीक नहीं है, आप आगे खर्च नहीं उठा सकते इसलिए किसी सरकारी अस्पताल में चले जाओ।
परमार के अनुसार बच्चे को 20 नवंबर की रात वह दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल ले गए जहां पर 22 नवंबर को उसकी मौत हो थी। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश के बाद अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे के इलाज में ली गई रकम लौटा दी थी। इसकी भनक हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को जब हुई तो उन्होंने अधिकारियों से कहा था रकम भले लौटा दी गई पर कमियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग की जांच के अनुसार बच्चे के इलाज में लापरवाही नहीं हुई मगर दवाओं के दाम अधिक लिए गए। खून की दर चार सौ रुपये प्रति बोतल तय है मरीज के परिजन से 1950 रुपये लिए गए। कई दवाओं के दाम भी अधिक लिए गए।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अस्पताल प्रबंधन ने हरियाणा स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल और सिविल सर्जन के आदेशों की अवहेलना की है। यह बात नेग्लिजेंसी बोर्ड की रिपोर्ट में सामने आई जिसके बाद सात दिन के लिए फार्मेसी लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है।

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