गोरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग हुई राज्यसभा में

गोरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग हुई राज्यसभा में

नई दिल्ली। गोरक्षा के नाम गुंडागर्दी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग करते हुए राज्यसभा में आज विपक्ष ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था गर्त की ओर बढ़ रही है और कृषि, निवेश तथा कारोबार का माहौल खराब हो रहा है। देश भर में अल्पसंख्यकों और दलितों की पीट पीट कर हत्या और उनपर अत्याचार की घटनाओं में कथित वृद्धि से उत्पन्न स्थिति पर अल्पकालिक चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस के कपिल सिब्बल ने कहा कि देश में गोरक्षा और धर्म के नाम पर अल्पसंख्यकों, दलितों, आदिवासियों और कमजोर वर्गों के लोगों की हत्याएं हो रही है। सोशल मीडिया पर ऐसे दृश्य दिखाएं जा रहे हैं, जो भयानक हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में भीड़ द्वारा हत्या के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों से माहौल खराब हो रहा है। समाज में भय का वातावरण बन रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री के कई पुराने भाषणों का जिक्र किया। इस पर संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने इन भाषणों की प्रामाणिकता साबित करने की मांग की। श्री नकवी ने कहा कि श्री सिब्बल के वक्तव्य से उन संगठनों के नाम निकाल देने चाहिए, जो सदन में मौजूद नहीं हैं। उप सभापति पी जे कुरियन ने कहा कि वह मामले को देखेंगे और जरूरी हुआ तो कार्यवाही से निकाल देंगे। श्री सिब्बल ने कहा कि हिंसा के माहौल से देश में निवेश का माहौल बिगड़ रहा है। कारोबार मंदा हो रहा है। चमड़ा उद्योग चरमरा रहा है और चमड़ा निर्यात घट गया है। इससे महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।
जनता दल (यूनाइटेड) के शरद यादव ने कहा कि देश गृहयुद्ध की ओर बढ़ रहा है। सरकार अल्पसंख्यकों, दलितों, आदिवासियों और महिलाओं की रक्षा करने में विफल हो गयी है। किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। गोरक्षा के नाम पशुओं का लेन देन बंद हो रहा है। अर्थव्यवस्था के आधार किसान हैं और किसान की अर्थव्यवस्था खेती और पशुओं से चलती है। नोटबंदी के बाद से खेती खत्म हो गयी। पशुओं की खरीद फरोख्त पर रोक लगाने से उनकी आमदनी भी समाप्त हो गयी। देश में हिंसा और भय का माहौल है जिससे निवेश रुक रहा है। कारोबार खत्म हो रहा है और बेरोजगारी बढ़ रही है। उन्होंने सहारनपुर हिंसा के प्रभावित लोगों के साथ न्याय करने को कहा। उन्होंने कहा कि सरकार को वहां की हालत जानने के लिए दौरा करना चाहिए। दलित महिलाओं के साथ बहुत बुरा बर्ताव किया गया है। उन्होंने कहा कि कानून को कुचला जा रहा है। सरकार को ध्यान रखना चाहिए कि राजनीति और धर्म का संतुलन बिगडऩे से भारी गड़बड़ होती है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक और सीरिया इसके उदाहरण है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी़ राजा ने कहा कि संसद भीड़ द्वारा हत्या जैसे मुद्दे पर चर्चा कर रही है, शर्म की बात है। जीवन का अधिकार संसद नहीं बल्कि संविधान देता है। उन्होंने कहा, संविधान को सही भावना के साथ लागू करने में हम विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मनुवादी फासीवाद है और यह खतरनाक है। इसका एकजुटता के साथ सामना करना जरूरी है। इससे पहले चर्चा शुरू करते हुए शिरोमणि अकाली दल के नरेश गुजराल ने कहा कि हत्याओं की घटनाओं को राजनीतिक रंग नहीं देना चाहिए। इन घटनाओं पर समाज को आत्ममंथन करने की जरूरत है। ऐसी घटनाएं पूरे देश में हो रही हैं और राजनीतिक दल आरोप- प्रत्यारोप में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि विविधता में एकता भारत की विशेषता है और इसको बनाए रखने की जिम्मेदारी सभी की है। एक ओर समाज में सहिष्णुता और सहनशीलता की भावना को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। दूसरी ओर, गोरक्षा, धर्म या जाति के नाम पर गुंडागर्दी करने वाले लोगों को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए। ऐसे मामलों से निपटने के लिए विशेष अदालतें बनाई जानी चाहिए।

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